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Mandukya Upanishad

वैदिक साहित्य में यज्ञ को महत्वपूर्ण क्यों बताया गया है? || (2018)
Adhyatma Upanishad
वैदिक साहित्य में यज्ञ को महत्वपूर्ण क्यों बताया गया है? || (2018)
8min
12reads

आचार्य प्रशांत: श्लोक संख्या ५ है, प्रथम मुण्डक, द्वितीय खंड से, “जो पुरुष यज्ञ में आहुतियाँ देता है यथासमय, अनुशासन का पालन करता है, उसे सूर्य की किरणें वहाँ ले जाती हैं जहाँ देवताओं का एकमात्र स्वामी इंद्र निवास करता है।“

बात बहुत सीधी है। यज्ञ का अर्थ होता है,…

इन्द्रियों पर विजय कैसे प्राप्त करें? कर्म और अकर्म क्या?
Truth
इन्द्रियों पर विजय कैसे प्राप्त करें? कर्म और अकर्म क्या?
16min
49reads
3
2

श्रद्धावान् लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेन्द्रिय: | ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति || ४, ३९ || जितेन्द्रिय, साधनापरायण और श्रद्धावान मनुष्य ज्ञान को प्राप्त होता है तथा ज्ञान को प्राप्त होकर वह बिना विलम्ब के तत्काल ही भगवत्प्राप्तिरूप शान्ति को प्राप्त हो जाता है। —श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय ४, श्लोक ३९प्रश्नकर्ता: आचार्य जी,…

Pradip Test Hindi
Dreams
Pradip Test Hindi
1min
21reads
Excerpts from Articles
रक्षा बंधन पर आचार्य प्रशांत का संदेश
\"रक्षाबंधन एक स्मरण हो सकता है कि हम सब मिलकर उस विवेक, उस करुणा की रक्षा करें जो जीवन को जीवन बनाती है। यह पर्व केवल उपहारों का आदान-प्रदान न रह जाए, बल्कि यह एक ऐसा संकल्प बन जाए जिसमें हम एक-दूसरे के आत्मबल और ऊंची चेतना के
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जीवन-मरण का ये चक्र चल क्यों रहा है? || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2021)
जन्म-मरण का चक्र क्यों है? इसका अर्थ यही नहीं है कि शिष्य बस इतना ही पूछना चाहता है कि कोई जन्मता क्यों है, कोई मरता क्यों है, चक्र क्यों चल रहा है। वो वास्तव में सबकुछ पूछ रहा है, सबकुछ। अब ये पढ़ने वाले की बुद्धि पर है कि वो इस बात को समझ जाए कि इतना ही नहीं पूछा गया है कि जन्म-मरण का चक्र क्यों है।
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Test Article Title
Description enwcoiew fkwsc J. Krishnamurti.
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Why do I restless
Hindi article on restlessness by AP
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कर्म और अतीत से मुक्ति कैसे मिले ?
इन सब से मुक्ति का एक ही तरीका है, वो बचो ही नहीं जो मूर्ख जाकर के दुनिया से, जगत से, प्रकृति से कामना पूर्ति की आशा रखता था, वो बचो ही नहीं। उसके अलावा और तुम कितने भी हथकंडे लगा लो, अतीत तो लौट-लौट के बार-बार आएगा और सर पर चढ़ेगा ही चढ़ेगा।
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Test notificationm
dfbjdsh
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new articles
asdasdknams kdas dlkas dasd
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राधा-कृष्ण में भी तो प्रेम था, तो आप हमारे प्रेम को सम्मान क्यों नहीं देते?
कृष्ण का खुद ऊँचा होना, कृष्ण के पूरे जीवनवृत्त में, उनकी ज़िंदगी की जो पूरी कहानी है उसमें और श्री कृष्ण की प्रेमकथा में एक सूत्र है जो साझा पिरोया हुआ है। गीता की ऊँचाई, कृष्ण के जीवन की ऊँचाई, और कृष्ण के प्रेम की ऊँचाई तीनों एक हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि कृष्ण बहुत ऊँचे हों और उनका प्रेम निचले तल का हो जाए। ये संभव नहीं है।
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स्मोक टेस्ट हिन्दी लेख 16 अगस्त 2026
हिन्दी स्मोक टेस्ट लेख का संक्षिप्त विवरण।
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Doc Type test
test doc type
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गुरु के प्रति धन्यवाद कम क्यों हो जाता है? आचार्य प्रशांत (2017)
अब देखिएगा, क्या हो रहा है। कोई कृतज्ञ कब अनुभव करेगा? जब पहले उसकी हालत ख़राब हो और कोई बचाए। आपके भीतर अभी यह इच्छा शेष है कि आप कृतज्ञ अनुभव करती रहें और कृतज्ञता अनुभव करने के लिए ज़रूरी है कि कुछ गड़बड़ हो और फिर उस गड़बड़ से आप उबार ली जाएँ। तो फिर आप कृतज्ञ अनुभव करेंगी कि, अरे, मेरा सौभाग्य कि मुझे किसी ने बचा लिया।
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Who controls your mood?
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शिव-शक्ति
नवरात्र का माहौल है। शक्ति के बारे में कुछ बातें करना प्रासंगिक रहेगा। शिव केंद्र हैं, शिव सत्य हैं। शिव वो हैं जिन तक मन, 'मन' रह कर नहीं पहुंच सकता। शिव को तो रहस्य रहना है सदा। शक्ति, मन है, संसार है। शिव में स्थिरता है, अचलता है।
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आंसू अगर सच्चे हैं तो भीतर आनंद ही आनंद है
अगर आँसू सच्चे हैं तो उनका संबंध उत्सव और आनंद से है, उनका संबंध जाते हुए दुःख से है। आँसुओं के अर्थ ये नहीं है कि तुम दुखी हो, आँसुओं का अर्थ भी हो सकता है कि तुम आनंदित हो। मुक्त अनुभव कर रहे हो, भीतर की जकड़ को छोड़ने के लिए।
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लोकमत न्यूज़ – "स्वतंत्रता दिवस: वास्तविक स्वतंत्रता क्या है
\"स्वतंत्रता कोई उपहार नहीं, बल्कि एक उपलब्धि है जिसे प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं अर्जित करना पड़ता है। राजनीतिक स्वतंत्रता हमें विरासत में मिल सकती है, किंतु मानसिक और आध्यात्मिक स्वतंत्रता के लिए सतत प्रयास
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NDTV Column hindi
kdnaksjv akssadn askdnaksjv akssadn askdnaksjv akssadn as kdnaksjv akssadn as
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Why do I restless
This article is related to restlessness.
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hindi
exam-2-oct-2exam-2-oct-2exam-2-oct-2exam-2-oct-2exam-2-oct-2
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Who controls your mood?
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IN media last publish state
in media 1
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What does love mean?
You must know what is love. How it shapes your life.
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Test sanity article
“माँसाहार गरीबों के लिए वरदान है क्योंकि माँसाहार के माध्यम से गरीबों को सस्ता प्रोटीन मिल जाता है।“ १ ग्राम प्रोटीन अगर आप मटन से लेते हैं तो लगते हैं ३ रुपये। उतना ही प्रोटीन, १ ग्राम, अगर आप अंडे से लेते हैं तो लगते हैं १ रुपय ३० पैसे, उतना ही प्रोटीन, १ ग्राम, अगर आप चिकन से लेते हैं तो लगता हैं १ रुपया।
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आत्मा न तो शरीर में रहती है, न शरीर का आत्मा से कोई संबंध है || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता (2023)
Ashtavakra Gita
आत्मा न तो शरीर में रहती है, न शरीर का आत्मा से कोई संबंध है || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता (2023)
3min
24reads

◾ एक ही जाति होती है - वह है "बल"। बल विकसित करो अपने भीतर।

◾ आत्मा का इस पूरे देह व्यापार से कोई लेना देना ही नहीं।

◾ मिथ्याचारी वह है जो आगे के लालच में अच्छा काम करता है।

◾ आत्मा का विकृत सिद्धांत ही भारत की दुर्दशा…

महिलाएँ श्मशान क्यों नहीं जातीं? || नीम लड्डू
Women Empowerment
महिलाएँ श्मशान क्यों नहीं जातीं? || नीम लड्डू
1min
20reads

हिंदुस्तान में अभी भी दो जगह हैं जहाँ पर लडकियाँ बहुत कम पायी जाती हैं – लड़कियाँ, स्त्रियाँ सब – एक, श्मशान घाट, दूसरा, सत्संग। दोनों ही जगहों पर सच दिख जाता है न, और दोनों ही जगहों पर देह की नश्वरता दिख जाती है न। समाज नहीं चाहता है…

तुझे याद न मेरी आयी || नीम लड्डू
Love
तुझे याद न मेरी आयी || नीम लड्डू
2min
12reads

किसी ने आपसे पूछा, “अरे! तुमने मुझे पाँच दिन से फ़ोन नहीं किया, तुम्हें मेरी याद नहीं आयी?” आप कहते हैं, “अगर मैं इसको सच बता दूँ तो इस बेचारे के दिल को चोट लगेगी, ये दुख जाएगा।“ तो आप कहते हैं, “नहीं याद तो बहुत आयी, वो नेटवर्क नहीं…

जब शरीर परेशान करने लगे || नीम लड्डू
Clarity
जब शरीर परेशान करने लगे || नीम लड्डू
1min
8reads

जब शरीर का कोई हिस्सा बड़ी माँग करने लगे किसी भी तरीके से, पेट माँग करता है कि, ‘मुझे भोजन दो’, कहीं दर्द हो गया तो वो जगह माँग करती है कि, ‘मुझे आराम दो, दवा दो।‘

कामोत्तेजना चढ़ने लगी तो जननांग माँग करते हैं कि, ‘हमपर ध्यान दो’, तो…

कमाओ, खूब कमाओ! || नीम लड्डू
Truth
कमाओ, खूब कमाओ! || नीम लड्डू
1min
8reads

दुनिया अगर ताक़त की भाषा समझती है तो ताक़त अर्जित करो। दुनिया अगर पैसे की बात सुनती है तो पैसा होना चाहिए तुम्हारे पास। हाँ, शर्त बस एक है कि तुम्हारी बात सदा सच्ची रहे। यह ना हो कि पैसा आ गया तो बात में झूठ आ गया।

जितना तुम्हारी…

ऐसे तो हार पक्की है || नीम लड्डू
Truth
ऐसे तो हार पक्की है || नीम लड्डू
1min
10reads

मैं जितने भी कपटी लोगों से मिलता हूँ, उनकी धूर्तता की कोई सीमा नहीं। उनका दिमाग चल रहा है। वो महत्वकांक्षी हैं। वो कुछ भी कर दिखाने को तैयार हैं। उनमें ऊर्जा पूरी है, वो दुनिया पर छा जाने के लिए हौसला रख रहे हैं। उनका आत्मविश्वास देखो!

और मैं…

इनका साथ कभी मत छोड़ो || नीम लड्डू
Truth
इनका साथ कभी मत छोड़ो || नीम लड्डू
1min
9reads

जो लोग दस दरवाज़ों पर खटखटा रहे होते हैं न उन बेचारों की त्रासदी यही होती है, वह ऐसे होते हैं जैसे कि कोई दस जगह गड्ढा खोदे।

यह ग्रंथों का अपमान है कि उनको एक बार पढ़ कर के किनारे रख दो। “मैंने गीता पढ़ ली!” कि, “मैंने बाइबल…

अहंकार और सत्य में क्या अंतर है? || (2016)
Truth
अहंकार और सत्य में क्या अंतर है? || (2016)
17min
30reads

प्रश्नकर्ता: इगो (अहंकार) में और सत्य में क्या अंतर है?

आचार्य प्रशांत: जितने अंतर हैं वह सब इगो में ही हैं। अंतर कुछ कर लो, समानताएँ और अंतर यह सब मानसिक परिकल्पनाएँ हैं। आत्मा में ना कोई भेद होता है, ना अभेद होता है। तुम अगर पूछोगे कि, "अहंकार और…

शिवमय होना क्या है? || (2018)
Truth
शिवमय होना क्या है? || (2018)
11min
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प्रश्नकर्ता: शिवमय होना क्या है?

आचार्य प्रशांत: बहुत मुस्कुरा रहे हो बेटा! यही होता है शिवमय होना। पूछ रहे हैं कि “शिवमय होना क्या होता है?” यही है, सोमस्त हो जाओ। सोम जानते हो न क्या होता है, क्या होता है? ख़ुमार; सोमस्त हो जाओ, यही होता है शिवमय होना।…

आप जानते हैं शिव का अपमान करने वालों को? || (2021)
Truth
आप जानते हैं शिव का अपमान करने वालों को? || (2021)
6min
51reads

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपको सुनने से पहले मैं एक भजन सुनता था उसमें बोलते थे कि "सिर से तेरी बहती गंगा, काम मेरा हो जाता चंगा, नाम तेरा जब लेता।" तो भजन सुनते-सुनते मुझे लगता था कि मैं महादेव के कुछ नज़दीक हो गया हूँ और अब मेरा काम चंगा…

हमसे ज़्यादा शक्तिशाली कौन! || (2019)
Truth
हमसे ज़्यादा शक्तिशाली कौन! || (2019)
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम, हमारा मन शरीर से ज़्यादा बलशाली है। और आत्मा के विषय में गुरुजनों से सुना है कि मन से भी ज़्यादा बलशाली है। ऐसा क्यों होता है कि हम भूल-चूक करते हैं और क्या इसका मतलब यह हुआ कि भूलना जो कि मन के तल पर…

क्या है जो नहीं मरता? || (2019)
Truth
क्या है जो नहीं मरता? || (2019)
8min
54reads

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मैं यूट्यूब के माध्यम से जुड़ा हूँ आपसे करीब दो साल से। उसके बाद आध्यात्मिकता में थोड़ी रुचि बढ़ी। इन दो सालों में मेरे कुछ नज़दीकी मित्र थे जिनकी मृत्यु हो गई। उसके बाद मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं मर रहा हूँ। तो ये…

समझो तो कि चाहिए क्या
Truth
समझो तो कि चाहिए क्या
10min
28reads

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जब सत्य/चेतना चुनाव करते हैं तो विवेक क्या है? चेतना और सत्य क्या भिन्न हैं? जब हम अध्यात्म की पहली सीढ़ी चढ़ते हैं, तो क्या विवेक ही नहीं है जो बढ़ता है? कृपया समझाएं?

आचार्य प्रशांत: हमारी चेतना, अशुद्ध चेतना होती है। उसका लक्ष्य होता है- सत्य।…

क्या खोज रहे हैं हम?
Truth
क्या खोज रहे हैं हम?
30min
102reads

प्रश्नकर्ता: क्या खोज रहे हैं हम?

आचार्य प्रशांत: यह जितना कुछ हम देखते हैं, यह जो कुछ भी हम अनुभव करते हैं, सुनते हैं, इसका अनुभव हमें यूँ ही नहीं हो रहा। थोड़ा गौर करेंगें तो आपको भी दिखेगा। कुछ भी आपको व्यर्थ ही नहीं दिख रहा, अकारण ही नहीं…

हृदय से जीना
Truth
हृदय से जीना
21min
25reads

आचार्य प्रशांत: यदि प्राणी हृदय से संचालित है तो वो वास्तव में परम स्रोत से ही संचालित है; पर ये शर्त बड़ी है कि उसे हृदय से संचालित होना चाहिए। जब वह हृदय से संचालित होता है तो इन्द्रियाँ वैसी हो जाती हैं जैसी श्रीकृष्ण भगवद्गीता में कहते हैं, कि,…

क्यों रचा गया वेदांत?
Truth
क्यों रचा गया वेदांत?
14min
39reads

प्रश्नकर्ता: वेदान्त क्यों रचा गया?

आचार्य प्रशांत: ऋषियों का एक-एक शब्द सुनने वाले बेचैन मन की शान्ति हेतु ही है। यही एकमात्र उद्देश्य है उपनिषदों का। एक-एक बात जो कही जा रही है वह किसी अवस्था विशेष से कही जा रही है; सत्य, अनावलंबित सत्य, निरुद्देश्य सत्य, निष्प्रयोजन सत्य, कहा…

मात्र उनके लिए जो ऊँचा उठना चाहते हों
Truth
मात्र उनके लिए जो ऊँचा उठना चाहते हों
15min
26reads

आचार्य प्रशांत: पूरे अस्तित्व की जहाँ से शुरुआत होती है। इस दुनिया में ही जो बिल्कुल प्रथम बिंदु है, ये याद रखना है कि उनसे भी श्रेष्ठ कोई है। तो पहले तो मन को ऊँचा-ऊँचा-ऊँचा, और ऊँचा, और ऊँचा उठाओ, अधिकतम और उच्चतम, जहाँ तक मन को ले जा सकते…

ब्रह्म की प्राप्ति
Truth
ब्रह्म की प्राप्ति
13min
77reads

प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी। शरीर, मन, बुद्धि, दृश्य व अदृश्य जगत का आधार ब्रह्म हैं और वह ब्रह्म सर्वत्र है, सर्वव्यापी है, विश्वरूप है। उसकी रचना वस्तु में भी ब्रह्म है, तो फिर यह अज्ञान क्यों? क्या हम वह नहीं है या अगला ब्रह्म नहीं है?

दूसरा प्रश्न है, "कुछ…

तीन गलतियाँ जो सब करते हैं
Truth
तीन गलतियाँ जो सब करते हैं
14min
10reads

आचार्य प्रशांत: सत्य को मायापति कहा गया है; समझते हैं। माया क्या? वो जो हमें प्रतीत होता है, जिसकी हस्ती के बारे में हमें पूरा विश्वास हो जाता है, पर कुछ ही देर बाद या किसी और जगह पर, किसी और स्थिति में हम पाते हैं कि वो जो बड़ा…

मा विद्विषावहै ऊँ शान्तिः शान्तिः शान्तिः
Truth
मा विद्विषावहै ऊँ शान्तिः शान्तिः शान्तिः
18min
26reads

आचार्य प्रशांत: गुरु और शिष्य जब आमने-सामने बैठे हैं देह रूप में तो है तो दोनों जीव हीं। बस एक जीव है जिसकी चेतना ऊँचाई पा चुकी है और उन ऊँचाइयों से अपने द्वारा पाए गए अमृत को बिखेरना चाहती है, नीचे वालों पर उड़ेलना चाहती है ताकि जो नीचे…

पाँच नाम बेहोशी के
Truth
पाँच नाम बेहोशी के
7min
62reads

आचार्य प्रशांत: पंचवर्ग क्या है -- जैसे माया के ही पाँच रूपों, पाँच वर्गों की बात की जा रही हो। आत्मा के ऊपर उपाधि बन कर -- अज्ञान, अविद्या या माया सत्य को छुपाए रहती है, ढके, आच्छादित किये रहती है। उसी अज्ञान को पाँच अलग-अलग तरीकों से कहा गया…

ज्ञानी वो जिसके लिए अब कुछ भी आफ़त नहीं है
Truth
ज्ञानी वो जिसके लिए अब कुछ भी आफ़त नहीं है
9min
40reads

क्व निरोधो विमूढस्य यो निर्वन्धं करोति वै।

स्वारामस्यैव धीरस्य सर्वदासावकृत्रिमः।।

~ अष्टावक्र गीता (अध्याय 18 श्लोक 41)

अनुवाद: जो आग्रह करता है, उस मूर्ख का चित्त निरुद्ध कहाँ है? आत्मा में रमण करने वाले धीर पुरुष का चित्त तो सदैव स्वाभाविक रूप से निरुद्ध ही रहता है ॥ 41॥

आचार्य…

शास्त्र यदि ज्ञान हैं, तो तुम्हारे काम न आएंगे
Truth
शास्त्र यदि ज्ञान हैं, तो तुम्हारे काम न आएंगे
10min
48reads

तत्त्वं यथार्थमाकर्ण्य मन्दः प्राप्नोति मूढतां।

अथवा याति संकोचम - मूढः कोऽपि मूढवत्॥

~ अष्टावक्र गीता (अध्याय 18 श्लोक 32)

A stupid man is bewildered when he hears the real truth, while even a clever man is humbled by it just like the fool.

आचार्य प्रशांत: यह श्लोक कहता है कि…

इच्छा अपूर्ण, मौज पूर्ण
Truth
इच्छा अपूर्ण, मौज पूर्ण
21min
11reads

प्रश्नकर्ता: उपनिषद् भी कहते हैं “एकोहम् बहुष्यामि”

तो क्या ये जो कल्पना होती है, वो ईश्वर के मन में होती है? कि, "मैं एक हूँ और बहुत हो जाऊँ?"

आचार्य प्रशांत: ये उसके मन में होती है जिसे बहुत दिख रहे हैं और जिसे एक दिख रहा है। ईश्वर न…

तुम्हारा स्वरुप क्या? तुम्हें विश्राम कहाँ?
Truth
तुम्हारा स्वरुप क्या? तुम्हें विश्राम कहाँ?
23min
26reads

कुत्रापिन जिहासास्ति नाशो वापि न कुत्रचित्।

आत्मारामस्यधीरस्य शीतलाच्छतरात्मनः॥

~ अष्टावक्र गीता (अध्याय १८ , श्लोक २३)

अनुवाद: जिसका अंत:करण शीतल एवं स्वच्छ है, वो आत्माराम है। उस धीरपुरुष की न तो किसी वास्तु के त्याग की इच्छा होती है, और न तो कुछ पाने की आशा।

प्रकृत्या शून्यचित्तस्य कुर्वतोऽस्य यदृच्छया।…

मात्र एक विशेष विधि से पढ़े जाते हैं उपनिषद
Truth
मात्र एक विशेष विधि से पढ़े जाते हैं उपनिषद
24min
14reads

आचार्य प्रशांत: उपनिषदों की, बल्कि अधिकांश आध्यात्मिक ग्रंथों की भाषा उनके रचनाकारों की ही तरह थोड़ी-सी विशिष्ट है। वो उन्हीं शब्दों का प्रयोग करते हैं जिन शब्दों का प्रयोग हम और आप करते हैं क्योंकि भाषा में, शब्दकोश में शब्द तो वही हैं। लेकिन उन साधारण शब्दों का भी प्रयोग…

पुल पर घर नहीं बनाते
Truth
पुल पर घर नहीं बनाते
15min
9reads

आचार्य प्रशांत: देखो प्रकृति से, संसार से भागा नहीं जा सकता, लेकिन प्रकृति और संसार तुम्हारे लिए आख़िरी चीज़ भी नहीं हो सकते। बहुत ध्यान से समझो इस बात को। ना इनसे भाग सकते हो—किससे?—दुनिया से, संसार से। अपने शरीर से बाहर निकलकर भाग सकते हो? तो संसार से बाहर…

संसार में और संसार से परे || (2017)
Truth
संसार में और संसार से परे || (2017)
8min
58reads

असंसारस्य तु क्वापिन हर्षो न विषादिता। स शीतलहमना नित्यं विदेह इव राजये॥

~ अष्टावक्र गीता, अध्याय १८, श्लोक २२

अनुवाद: संसार मुक्त पुरुष को ना कहीं कोई हर्ष होता है, ना विषाद, उसका मन सदा शीतल होता है और वह विदेह के समान शोभायमान होता है।

आचार्य प्रशांत: विदेह के…

लगे है, तब है; जब लगे नहीं है, तब भी है
Truth
लगे है, तब है; जब लगे नहीं है, तब भी है
21min
34reads

भवोऽयं भावनामात्रो न किंचित्परमर्थतः।

नास्त्यभावः स्वभावनां भावाभावविभाविनाम्।।

~ अष्टावक्र गीता (अध्याय 18 श्लोक 4)

अनुवाद: यह संसार केवल एक भावना मात्र हैं, परमार्थत: कुछ भी नहीं है। भाव और अभाव के रूप में स्वभावत: स्थित पदार्थों का कभी अभाव नहीं हो सकता।

आचार्य प्रशांत: पहली पंक्ति कह रही है कि…

संसार की सच्चाई क्या?
Truth
संसार की सच्चाई क्या?
11min
63reads

भवोऽयं भावनामात्रो न किंचित् परमर्थतः।

नास्त्यभावः स्वभावनां भावाभावविभाविनाम् ॥१८-४॥

~ अष्टावक्र गीता

अर्थ: विश्व तुम्हारी चेतना में उभरा हुआ एक चित्र है। विश्व तुम्हारी चेतना में उठती-गिरती एक तरंग है। जिसने जान लिया कि क्या अस्तित्वमान है, और क्या अस्तित्वहीन है वह जन्म मरण के पार चला जाता है। वह…

सच नहीं है, न झूठ ही है
Truth
सच नहीं है, न झूठ ही है
14min
15reads

येन विश्वमिदं दृष्टं स नास्तीति करोतु वै।

निर्वासनः किं कुरुते पश्यन्नपि न पश्यति॥१५॥

अनुवाद: जिसने इस विश्व को कभी यथार्थ देखा हो, वह कहा करें कि नहीं है, नहीं है,

जिसे विषय वासना ही नहीं है, वह क्या करें? वह तो देखता हुआ भी नहीं देखता।

~ अष्टावक्र गीता (…

सत्य के प्रति निष्ठा का अर्थ
Truth
सत्य के प्रति निष्ठा का अर्थ
9min
54reads

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, कई रिश्ते ऐसे होते हैं जो न चाह कर भी पीछे छूट जाते हैं, क्या उन्हें दोबारा पाया जा सकता है?

आचार्य प्रशांत:

“जिस समय निर्विकल्प समाधि द्वारा आत्मा का दर्शन होता है, उसी समय हृदय की अशानरूप गांठ का पूर्णत: नाश होता है।”

~ अध्यात्म उपनिषद…

ऐसे होते हैं उपनिषदों के ऋषि
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आचार्य प्रशांत (आचार्य): थोड़ी विचित्र है मनुष्य की स्थिति। रहना उसे शरीर में ही है, रहना उसे जगत के साथ ही है। पर सिर्फ़ शरीर बनकर रहता है तो मौत का डर सताता है, अपने चारों तरफ़ और ऊपर और नीचे अगर सिर्फ़ जगत को ही पाता है तो बेचैन…

सांख्य दर्शन और वेदांत में भेद
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प्रश्नकर्ता: मेरे जीवन में सांख्य और वेदांत दर्शन के पढ़ने के बाद काफ़ी बदलाव आया है। मैं आभारी हूँ कि जो मुझे पढ़ने का अवसर मिला, परन्तु दोनों दर्शन में कुछ मूल विरोध दिखाई देता है। मेरे सम्मत में आप नहीं दिखते, आप में सांख्य और वेदांत एक होते दिखते…

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प्रश्न: आचार्य जी, नचिकेता बिलकुल निडर होकर ब्रह्म के पास चले जाते हैं और कबीर जी के 'आई गँवनवा की सारी' के भजन का पात्र रो-रोकर जाता है। तो क्या ऐसा होता है कि बाल्यपन में आसान होता है, और समय बीतने पर स्वयं जाना मुश्किल है, या फ़िर घसीटना…

ब्रह्म सच है - न देवता न ईश्वर न भगवान
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आचार्य प्रशांत: देवता ज़रूर आदमी का ही एक परिवर्धित संस्करण है, ब्रह्म नहीं। उपनिषद और भारतीय दर्शन विशेष इसीलिए रहा है क्योंकि उपनिषदों ने विश्व को वो दिया जो कहीं और से नहीं आया। क्या? कुछ ऐसा जो आयामगत रूप से तुमसे भिन्न है, कुछ ऐसा नहीं जो तुम्हारा ही…

पूज्य क्या, पूजा क्या?
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ॐ तस्य निश्चिन्तनं ध्यानम्।

~ आत्मपूजा उपनिषद (प्रथम श्लोक)

हिंदी अनुवाद: उस आत्म तत्त्व का सतत चिन्तन ही उसका ध्यान है।

आचार्य प्रशांत: पहला क्या कह रहा है?

प्रश्नकर्ता १: आचरण वाला हीं, ॐ का निरंतर स्मरण..।

आचार्य: कैसे करोगे ये आचरण? ये आचरण कैसे हो सकता है?

किसका स्मरण?…

झूठा सपनों का महल, झूठा सन्यास का आश्रम
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झूठा सपनों का महल, झूठा सन्यास का आश्रम
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम, मेरा नाम विक्की है, युवा हूँ। मैंने घर की आर्थिक स्थिति के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ दी और मैं तीन साल से मल्टी लेवल मार्केटिंग व्यापार में हूँ। मुझे सब कुछ अपने ही दम पर करना है, समृद्ध बनना है। मेरे मित्र नौकरी छोड़कर ध्यान में…

धर्मग्रंथों की उपेक्षा धर्म को मिटाने की तैयारी है
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धर्मग्रंथों की उपेक्षा धर्म को मिटाने की तैयारी है
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प्रश्नकर्ता: आध्यात्मिक और धार्मिक ग्रंथों को लेकर वर्तमान समय में एक उपेक्षा का भाव है बल्कि कहीं-कहीं तो घृणा का। लोग कहने लग गए हैं, "ज्ञान तो हम अपने अनुभव से ही ले लेंगे। समझ तो हम अपने जीवन से यही सीख लेंगे। किसी ग्रंथ किसी शास्त्र की हमें कोई…

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी, और अध्यात्म
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प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी, और अध्यात्म
8min
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, दैनिक जीवन में कभी-कभी थक जाता हूँ, जिस कारण अपने कार्यों को अच्छे से कर नहीं पाता। मेरी मदद करें!

आचार्य प्रशांत: क्या काम है जो करना चाहते हो?

प्रश्नकर्ता: जैसे कि बहुत पढ़ना होता है।

आचार्य प्रशांत: क्या पढ़ना रहता है?

प्रश्नकर्ता: जैसे मैं GATE की…

मन‌ ‌ब्रह्म‌ ‌को‌ ‌कैसे‌ ‌जाने?
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मन‌ ‌ब्रह्म‌ ‌को‌ ‌कैसे‌ ‌जाने?
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आचार्य प्रशांत: कौन से श्लोक हैं, जिसपर बात करें?

प्रश्नकर्ता: पहला खण्ड, पाँचवा श्लोक, केनोपनिषद।

यन्मनसा न मनुते येनाहुर्मनो मतम्।

तदेव ब्रह्म त्वं विद्धि नेदं यदिदमुपासते॥५॥

(केनोपनिषद, खण्ड १, श्लोक ५)

हिंदी अनुवाद: मन से जिसका मन नहीं किया जा सकता; अपितु मन जिसकी महत्ता से मनन करता है, उसी…

सत्य समझ में क्यों नहीं आता? || आचार्य प्रशांत, श्रीरामचरितमानस पर (2017)
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सत्य समझ में क्यों नहीं आता? || आचार्य प्रशांत, श्रीरामचरितमानस पर (2017)
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मैं ध्यान नहीं करती। आँखें तो बंद हैं ही, और बंद करके क्या फ़ायदा? कोई साधना भी नहीं करती। साधना और साध्य यदि दो हैं तो गोल-गोल चक्कर काटने से क्या फ़ायदा? बस सत्संग देखना-सुनना, साहित्य पढ़ना, राम कथा, भागवत कथा भाव से सुनना-देखना—इन सब में शांति…

जब गुरु दनादन पीटे
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जब गुरु दनादन पीटे
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बस्स कर जी हुण बस्स कर जी

काई गल असां नाल हस्स कर जी।

तुसीं दिल मेरे विच वस्सदे सी, तद सानु दूर क्यों दसदे सी,

घत्त जादू दिल नु खस्सदे सी, हुण आइयो मेरे वस कर जी।

तुसीं मोयां नूं मार ना मुक्कदे सी, नित्त खिद्दो वांङ कुट्टदे सी,…

जब सत्य और माया दोनों आकर्षक लगें || आचार्य प्रशांत (2019)
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जब सत्य और माया दोनों आकर्षक लगें || आचार्य प्रशांत (2019)
6min
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प्रश्नकर्ता: सत्य और माया, दोनों अच्छे लगते हैं। बहुत चंचलता होती है। कोई उपाय बताएँ।

आचार्य प्रशांत: एक माया बुरी लगती है, एक माया अच्छी लगती है—ये मत कहो कि सत्य भी अच्छा लगता है और माया भी अच्छी लगती है। सत्य के सामने बुरा लगना ठहर सकता है, बंद…

नवरात्रि के नौ रूपों को कैसे समझें? || आचार्य प्रशांत (2019)
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नवरात्रि के नौ रूपों को कैसे समझें? || आचार्य प्रशांत (2019)
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, कल से जो हिन्दुओं की परंपरा का एक प्रमुख उत्सव माना जाता है, नवरात्रि, वो शुरू हो रहा है। शक्ति के नौ रूपों की आध्यात्मिक उपयोगिता क्या है? शिव-शक्ति को माना जाता है कि एक ही उनका स्वरूप है, फिर ये नौ अलग-अलग स्वरूप क्या दर्शाते हैं?…

सिद्धियों और शक्तियों का क्या महत्त्व || आचार्य प्रशांत (2019)
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सिद्धियों और शक्तियों का क्या महत्त्व || आचार्य प्रशांत (2019)
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प्रश्नकर्ता: अक्सर ऐसा सुनने में आता है कि किसी के पास कोई सिद्धि है और किसी के पास कोई शक्ति है। आध्यात्मिक जगत में ऐसे चर्चे बड़े सुनने को मिलते हैं। जीवन में मुमुक्षा जागृत हो या समाधि प्राप्त हो, इन सब में इन सिद्धियों का क्या महत्व होता है?…

उठो, अपनी हालत के खिलाफ़ विद्रोह करो! || (2017)
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उठो, अपनी हालत के खिलाफ़ विद्रोह करो! || (2017)
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मैं जब बहुत से लोगों, जैसे मजदूर, रिक्शेवालों इत्यादि से मिलता हूँ, देखता हूँ, तो लगता है मुझे ही चिंता रहती है, इन लोगों को मैंने कभी चिंतित होते हुए नहीं देखा। वो कहते हैं कि कल की कल देखेंगे। ऐसा लगता है कि वो तो बिना…

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