
जो कुछ बाहर से आ रहा है, वो भाग्य के अधीन है, उस पर आपका कोई नियंत्रण नहीं। सुख-दुःख, लाभ-हानि, जन्म-मरण — सब संयोग हैं। ये इसलिए बताया गया है ताकि आप इन पर नियंत्रण करने की व्यर्थ कोशिश छोड़ दें। जिस पर नियंत्रण किया ही नहीं जा सकता, उसे नियंत्रित करने में ऊर्जा और समय व्यर्थ करेंगे। इस झूठी सुरक्षा भावना से बचें और अपनी ऊर्जा वहीं लगाएँ जहाँ वह सच में फलदायी हो सकती है।

हम कहते हैं कि अब कुछ नया करते हैं, फ़ूड योगा , मूड योगा * । कोई ऐसा शब्द नहीं है जो अब * योगा के साथ नहीं जोड़ दिया गया है। नई-नई क्रियाएँ निकल रही हैं, नई-नई प्रक्रियाएँ निकल रही हैं। ये मुद्रा, ये आसान, ये करते हैं, वो…


सागर पार करके लंका पहुँचने हेतु पुल बन रहा था। उसमें यह सब वानर, भालू सब लगे हुए थे, हनुमान तो थे ही, इंजीनियर थे नल-नील, यह सब। और वहाँ एक फुदकी गिलहरी, वो भी लगी हुई है साथ में पूँछ उठाए। वह क्या कर रही है? वह बालू के…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जब सीता और हनुमान दोनों ही राम तक पहुँचने के मार्ग हैं, तो इनमें मूलभूत रूप से क्या अंतर है?
आचार्य प्रशांत: एक है अपने को मिटा देना, और दूसरा है अपने को मिला देना।
मिटा देना ऐसा है कि जैसे कोई सपने से उठ गया हो,…

प्रश्नकर्ता: गर्भवती पत्नी को वन में छोड़ने पर भी राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। जुऐ में द्रौपदी को हारकर भी युधिष्ठिर धर्मराज कहलाए। अरे! अगर ये धर्म है तो, फिर अधर्म क्या है?
आचार्य प्रशांत: ताली बजादूँ डायलॉग पर या जवाब दूँ? चलो जवाब दिए देता हूँ।
क्रिकेट विश्व कप के…

आदमी यूँ ही नहीं सिगरेट, शराब पीता; उसे कुछ चाहिए जो उसे मिल नहीं रहा इसलिए वो सिगरेट से क्षुधापूर्ति करना चाहता है। एक सिगरेट से बात बनती नहीं इसलिए दूसरी सिगरेट पीता है, दूसरी सिगरेट से भी बात बनती नहीं तो तीसरी पीता है, चौथी पीता है, पीता ही…

हम इज़्ज़त को बहुत बड़ी बात समझ बैठते हैं। हमारे जीवन का, समय का, ऊर्जा का, ध्यान का न-जाने कितना बड़ा भाग सिर्फ़ दूसरों की नज़रों में अपनी छवि चमकाने में लग जाता है, है न?
हमारी एक-एक भावना अन्ततः सिर्फ़ एक उद्देश्य के लिए है – इस शरीर को…