
लड़की को पढ़ाई के लिए दो-सौ किलोमीटर दूर भेजना हो तो यही माँ-बाप और भाई कन्नी काट जाते हैं, और ब्याह कर वो दो-हज़ार किलोमीटर दूर जा रही हो इन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा। और पढ़ाई के लिए जाएगी तो किसी यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहेगी, सुरक्षा में रहेगी, हॉस्टल…

जो कुछ बाहर से आ रहा है, वो भाग्य के अधीन है, उस पर आपका कोई नियंत्रण नहीं। सुख-दुःख, लाभ-हानि, जन्म-मरण — सब संयोग हैं। ये इसलिए बताया गया है ताकि आप इन पर नियंत्रण करने की व्यर्थ कोशिश छोड़ दें। जिस पर नियंत्रण किया ही नहीं जा सकता, उसे नियंत्रित करने में ऊर्जा और समय व्यर्थ करेंगे। इस झूठी सुरक्षा भावना से बचें और अपनी ऊर्जा वहीं लगाएँ जहाँ वह सच में फलदायी हो सकती है।


उन्होंने भारतीय स्त्रियों को दयनीय स्थिति से बाहर निकालने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि अगर व्यक्ति दृढ़ निश्चय कर ले तो गरीबी, अभाव, व दुर्दशा की स्थिति पर विजय प्राप्त करके वे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ सकता है।…

आज ही के दिन, 22 अगस्त 1907 को जर्मनी में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में इन्होंने भारत का झंडा फहराया था।
आज़ादी से 40 साल पहले, भारत का झंडा फहराने वाली वे पहली भारतीय बनी। अधिकतम समय उन्होंने भारत से बाहर ही बिताया लेकिन उन्हें आज भी 'भारतीय क्रांति की जननी'…

इन्होंने पिछड़े वर्ग व महिलाओं की शिक्षा के लिए काम किया, लेकिन अधिकतर लोग इन्हें भूल चुके हैं। इन्होंने आधुनिक भारत के सबसे बड़े शिक्षा आंदोलनों में से एक को, फलने-फूलने की ज़मीन दी, लेकिन आज लोगों को उनका नाम भी नहीं पता। इन्हें भारत की पहली मुस्लिम महिला अध्यापिका…

अभी एक पिक्चर देखी ‘छिछोरे’, आईआईटी बॉम्बे पर आधारित है वो। कैंपस में चालीस लड़कों पर एक लड़की है। लेकिन वो जो लड़की है उसका कहानी में जो कुल योगदान है वो यही है कि वो सुंदर-सुंदर है और सब लड़के उसके पीछे पड़े हैं।
तो पूरी कहानी में लड़कों…

स्त्री चूँकि गर्भ रखती है तो प्रकृति ने ही उसे शरीर के प्रति बड़ा संवेदनशील बना दिया है। वो बार-बार अपने शरीर को देखती रहती है क्योंकि उसको एक बहुत महीन काम करना है, डेलिकेट काम; उस काम में अगर ज़रा भी गड़बड़ हो गई, इंफेक्शन हो सकता है, कुछ…

औरतों से मुझे जितनी शिक़ायत है, उतना ही उनको लेकर के दुःख भी है। उनको देखता हूँ, बहुत दुःख लगता है। और शिक़ायत इस बात की है कि वो अपने दुःख का कारण स्वयं हैं। भावना को वो अपना हथियार समझती हैं। देह को वो अपनी पूंजी समझती हैं। देह…

एक साधारण-सी दिखने वाली लड़की हो, स्कूल में या कॉलेज में वो जब पढ़ाई करेगी, ऊँचा स्थान लाएगी, या खेलों में जीतकर दिखाएगी या किसी और क्षेत्र में अपना हुनर दिखाएगी, उसको तब जाकर के कुछ ध्यान, कुछ अटेंशन मिलेगा। और जो सुंदर लड़की होगी वो कुछ नहीं, वो एक…

हिंदुस्तान में अभी भी दो जगह हैं जहाँ पर लडकियाँ बहुत कम पायी जाती हैं – लड़कियाँ, स्त्रियाँ सब – एक, श्मशान घाट, दूसरा, सत्संग। दोनों ही जगहों पर सच दिख जाता है न, और दोनों ही जगहों पर देह की नश्वरता दिख जाती है न। समाज नहीं चाहता है…

जब तुम अपने-आप को बेरोज़गार कहना शुरू कर देते हो, आंतरिक पतन होने लगता है। और वैसे ही पतन होने लगता है उन गृहणियों का जिनके ऊपर अब गृहस्थी की कोई खास ज़िम्मेदारी नहीं है, फिर भी वह घर पर ही बैठी हुई हैं।
मैं समझ सकता हूँ आप काम…

लड़की होगी वो चाहे गुड़गाँव में काम कर रही हो, चाहे बंबई में, चाहे बेंगलुरु में, उसकी दो ज़िंदगियाँ होती हैं। एक जो दफ्तर में होती है, दफ्तर में हो सकता है मैनेजर हो, पंद्रह लोग उसको रिपोर्ट करते हों, पंद्रह लोग उसके अधीनस्थ हों। और वहाँ पर वो एक…

पैसा ख़ुद कमाना पड़ता है न तो ज़िम्मेदारी अपने-आप आ जाती है। अधिकांश मामलों में जहाँ पर आज हम महिला को शोषक के तौर पर देख रहे हैं, वहाँ बात यह है कि ख़ुद वो कमा नहीं रही है।
पैसा कमाने बाहर अगर निकलो, सड़क पर जाओ तो आटे-दाल का…

बिलकुल तयशुदा कहानी है, उसमें कोई बड़े उतार-चढ़ाव नहीं हैं। उस कहानी में आता है – थोड़ी बहुत पढ़ाई, सात फेरे, मेटरनिटी वार्ड, दूध की बोतलें, दुनिया की देखा-देखी घर को फर्नीचर से भरना, कर्ज़ लेकर के मकान खरीदना, रोज़ आइने में देखना कि उम्र बढ़ रही है, और…

जिसके हाथ में ताक़त नहीं, वो बस उपभोग की वस्तु होगा। आदमी कहाँ से निकला है? जंगल से। और जंगल में प्रेम नहीं होता। जंगल में शिकारी होता है, और शिकार होता है। या जंगल में हीर-राँझा होता है? जो बाहुबल में ऊँचा हो वो क्या हो जाएगा? शिकारी। जो…

कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः। धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत || १, ४० ||
कुल के नाश से सनातन कुल-धर्म नष्ट हो जाते हैं तथा धर्म का नाश हो जाने पर सम्पूर्ण कुल में पाप भी बहुत फैल जाता है। —श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय १, श्लोक ४०
अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः। स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मैं एक गृहणी हूँ। परिवार में पति है, एक चार साल का बच्चा है और मम्मी-पापा हैं। तो उनके कामों में मेरा पूरा दिन निकल जाता है। मम्मी-पापा बुज़ुर्ग हैं, बीमार भी हैं, बच्चा छोटा है, पति भी है। मैं अपनी लाइफ (जीवन) में गवर्नमेंट जॉब (सरकारी…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, कल एक रिकोर्डिंग देखी जिसमें एक महिला एक शांत दिखने वाले और एक गरीब आदमी को सरेआम पीट रही थी। कोई बीच-बचाव करने नहीं आया और शायद पुलिस भी उस आदमी को ही फँसा रही है। मेरे पुराने घाव उघड़ आए क्योंकि मैं भी झूठे दहेज के…

आचार्य प्रशांत: मैं तो सब समाप्त करके सोने ही चला गया था, फिर एक, दो, तीन संदेश आने लगे कि "आचार्य जी, बहुत लोग आज के एक मुद्दे पर सवाल पूछ रहे हैं, कुछ बोलिए।" तो मैंने मुद्दा देखा और फिर उठकर आ गया हूँ बोलने।
मुद्दा क्या है?
मुद्दा…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम, आप बताते हैं कि माँ की ममता नवजात बच्चे की सुरक्षा के लिए होती है और जानवरों में दिखता भी है कि जैसे-जैसे नवजात बच्चे बड़े होने लगते हैं माँ के भीतर से ममत्व खत्म होने लगता है लेकिन इंसान के साथ ऐसा नहीं दिखता। मेरी…

प्रश्नकर्ता: मैं घूमती-फिरती हूँ, टूरिज़्म (पयर्टन) करती हूँ, अच्छे कपड़ों और ज्वेलरी (गहने) का शौक है मुझे। शॉपिंग (खरीदारी) करती हूँ। मुझे इस बात पर शर्मसार क्यों होना चाहिए? मेरे हसबैंड (पति) का बड़ा बिज़नेस (व्यवसाय) है। पेंटिंग, ट्रैवलिंग, ब्लॉगिंग मेरी हॉबी है और फ़ेमिनिज़्म मेरी आईडियोलॉजी (विचारधारा)।…

प्रश्नकर्ता: उस तक जाने का रास्ता वही बताए, उसी ने शायद मुझे आपसे मिलवा भी दिया। साक्षात्कार के दौरान आपने कुछ ग्रंथों के पढ़ने के लिए कहा था जिनमें अष्टावक्र गीता, विवेक चूड़ामणि मुख्य थे। उनका पठन मैंने कर लिया है और आजकल रामकृष्ण परमहंस जी की कथामृत पढ़ रही…

वो चार अलग-अलग महासागरों और आठ अलग-अलग समुद्रों में तैर चुकी हैं।
स्वर्गीय माननीय भूतपूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी जी ने उन्हें वाटर एडवेंचर के लिए तेनज़िंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड से सम्मानित किया है।
वो अंटार्कटिक जल में खुली तैराकी में रिकॉर्ड स्थापित करने वाली पहली एशियाई महिला और…

प्रश्नकर्ता: हम जैसे अपने अभिभावकों के लिये एक बोझ की तरह होते हैं। जैसे कि आज मैं यहाँ (शिविर)पर हूँ, तो मेरे घर पर भी बहुत कुछ चल रहा है, कि क्यों मैं चली आयी, तो फिर यह एहसास करवाया जाता है कि तुम्हारी कुछ ज़िम्मेदारियाँ हैं और घर पर…

आचार्य प्रशांत: प्रश्न आया है, प्रश्न क्या है व्यंग आया है और प्रश्नकर्ता माने व्यंगकर्ता कहते हैं कि बहुत बढ़िया है सनातन धर्म और ऐसे सनातन धर्म को कोटि-कोटि प्रणाम जिसमें जब स्त्रियों और पुरुषों की समानता की बात करनी हो तो उपनिषदों की आड़ ले लो और जब स्त्रियों…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। अभी मैं मास्टर्स कर रही हूँ, सेकंड ईयर में, आई.आई.टी. चेन्नई से रिसर्च कर रही हूँ। एकदम मैकेनिकल हो गए हैं, उसमें कुछ नया ही नहीं लगता। मैं बहुत बोरदम महसूस करती हूँ। कुछ उम्मीद नहीं रहती कि कुछ नया या अच्छा होगा। यदि कभी कुछ…

प्रश्न: आचार्य जी, लाल देद कह रही हैं, "देखते हुए अनदेखा करो; जानते हुए से अंजान बनो; और सुनते हुए को अनसुना करो," वैसे ही मैं एक गृहणी होते हुए किस तरीके से अपने अध्यात्म की ओर बढ़ रहे सभी क़दमों को अनदेखा कर सकती हूँ? क्या उनको अनदेखा करना…

प्रश्नकर्ता: एक महिला होकर घर और कार्यस्थल में समुचित तादात्म्य कैसे स्थापित किया जाए?
आचार्य प्रशांत: देखिए, जब आप कहती हैं कि - "एक महिला होकर घर और कार्यस्थल में समुचित तादात्म्य कैसे बैठाया जाए,” तो आप शायद अपनी पहचान के भीतर से ये सवाल कर रही हैं। आपने सवाल…

प्रश्न: मैं एक संबंध में थी। उसका आकर्षक व्यक्तित्व, प्यारी बातें और कई तरह के किस्सों के फेर में आ गई। अब पता चल रहा है कि जो कुछ वो अपने बारे में बताता था, वो ज़्यादातर तो झूठ था। दुःख से ज़्यादा मुझे शर्म और बेज़्ज़ती महसूस हो रही…

प्रश्न: सर, आप हमेशा शारीरिक सुंदरता को नीची नज़र से देखते हैं। मैं सुंदर और आकर्षक हूँ। पुरुष मेरी ओर ख़िचते हैं और मुझे इस बात पर नाज़ भी है। सुंदर होना कोई अपराध तो नहीं? पर आपको सुनती हूँ तो ऐसा लगता है जैसे सुंदर होकर मैंने कोई गुनाह…

मां हि पार्थ व्यपाश्रित्य येऽपि स्युः पापयोनयः।
स्त्रियो वैश्यास्तथा शूद्रास्तेऽपि यान्ति परां गतिम्॥
हे अर्जुन! स्त्री, वैश्य, शूद्र तथा पापयोनि चाण्डलादि जो कोई भी हों, वे भी मेरे शरण होकर परमगति को हीं प्राप्त होते हैं।
(श्रीमद्भगवद गीता, अध्याय ९, श्लोक ३२)
प्रश्नकर्ता: मेरे दो प्रश्न हैं, पहला यह कि…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। आज आश्रम आते हुए मन ज़रा दुविधापूर्ण रहा, आँखें अश्रुपूरित थीं। खयाल आ रहा था कि “देर रात घर से बाहर रहूँगी, जबकि आज दोनों बेटे घर पर ही हैं।“ मन चाहता था उनके साथ समय बिताऊँ, घर से बाहर ना जाऊँ।
आचार्य प्रशांत: जो आप…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, किसी के साथ कुछ गलत हो रहा है, तो अध्यात्म से कैसे उसे रिलीफ(राहत) मिल सकता है?
आचार्य प्रशांत: राहत मिलने की बात क्या है, अगर कुछ ग़लत हो रहा है तो उस वक्त जितनी भी आपकी सामर्थ्य है, अधिकतम वो करिए।
अगर आप अधिकतम वो…

प्रश्नकर्ता: औरतों का हर जगह शोषण क्यों होता है?
आचार्य प्रशांत: क्या इरादा है? अकारण तो नहीं पूछा ये सवाल। देखो बेटा, मेरे लिए बड़ा आसान होगा कि मैं कह दूँ, जैसे आमतौर पर कहा जाता है, समसामयिक नारी विमर्श में, नारीवादियों द्वारा कि ये सब इसलिए है क्योंकि पुरुषसत्ता…

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, मैम ने बंधनों की बात की तो मैं भी वैसा महसूस करती हूँ। मुझे ऐसा लगता है कि बंधन कुछ उम्र तक ही होता है। पर जब इनको देखा कि यह भी बंधनों में हैं तो मुझे अच्छा महसूस नहीं हुआ यह जानकार। परिवार वालों की…

प्रश्नकर्ता: मैं एक घरेलू महिला हूॅं और दिनभर काम करते वक़्त दिमाग में विचार घूमते रहते हैं, इन पर काबू कैसे करें?
आचार्य प्रशांत: कभी भी ये ना कहिएगा कि मेरे विचार मेरे विचार है। बंदर को याद रखियेगा। आपके विचार आपके विचार नहीं है। आपको जो चाहो वो सुचवाया…

प्रश्न: स्त्री की सुंदरता से उसकी कोमलता का जो एहसास होता है क्या वह परमात्मा की कोमलता जैसा है?
आचार्य प्रशांत: हमें तो पता था सत्यम-शिवम्-सुंदरम, स्त्री कब से सुन्दर होने लग गई? सत्य सुन्दर होता है, स्त्री पुरुष कब से सुन्दर हुए? कोमलता माने क्या? कोमल कठोर तो पदार्थ…

प्रश्न: आचार्य जी, आपका वीडियो देखकर साथी के चयन के प्रति कुछ स्पष्टता आई है, लेकिन इसे जीवन में व्यावहारिक तौर पर कैसे उतारूँ? कृपया मार्ग दिखाएँ।
आचार्य प्रशांत: अपने आसपास आप वही तो देखोगे ना जो आपने अपने आसपास इकट्ठा कर लिया है। आप किसी बाग़ में चले जाइए,…

प्रश्न: आचार्य जी, स्त्री का पर्दा करना कहाँ तक उचित है?
आचार्य प्रशांत: आसपास लोग ऐसे हों कि वहशी दरिंदे, तो पर्दा ठीक है।
मुझे पता हो कि यहाँ ऐसे लोग हैं जो मेरा मुँह देख के मुझे नोच लेंगे, तो मैं ही पर्दा कर लूँगा। कौन जान मराए? पर…

प्रश्नकर्ता: भारतीय समाज में पुराने ज़माने में महिला त्याग, संस्कार, और विनम्रता की मूर्ति हुआ करती थी। आज की आधुनिक महिला ग़लत को 'ग़लत' और सही को 'सही' बोलती है। क्या सही है? वो सही था, या ये सही है?
आचार्य प्रशांत: जो सही है, वो सही है। ना वो…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, स्त्री के लिये कमाना ज़रूरी क्यों है?
आचार्य प्रशांत: स्त्री के लिए तो बहुत, बहुत, बहुत ज़रूरी है, अपने पाँव पर खड़ा होना। स्त्री के लिए भी ज़रूरी है, पुरुषों के लिए भी। पर लड़कियों के लिए, स्त्रियों के लिए, विशेषतया ज़रूरी है कि वो ज़िन्दगी के…

प्रश्न: आचार्य जी, मुक्ति के मार्ग में एक गृहिणी के लिए क्या-क्या बाधाएँ आती हैं?
आचार्य प्रशांत जी: तुम्हारी जो पूरी गति हो रही है किसकी ख़ातिर हो रही है? कौन बैठा है उस गति के केंद्र में? किसको तुम सबसे अधिक महत्त्व दे रहे हो? प्रथम कौन है तुम्हारे…

प्रश्न: आचार्य जी, एक लड़की होने के कारण हमारे ऊपर बहुत सारी बंदिशें लगाई जाती हैं, जब भी अगर कुछ गलत होता है तो उसका इल्ज़ाम हम पर ही लगता है, क्या करूँ?
आचार्य प्रशांत: क्या नाम है?
श्रोता:- शिवांगी।
आचार्य प्रशांत: शिवांगी बैठो। शिवांगी ने…

प्रश्नकर्ता: सर, आज-कल जो परिवारों के मन में डर सा बना हुआ है, हर परिवार में, उस डर को दूर करने के लिए…
आचार्य प्रशांत: क्या डर है परिवार में?
प्र: सामूहिक बलात्कार वगैरह हो रहे हैं इस वजह से। लड़कियाँ बाहर पढ़तीं हैं, नौकरी करती हैं, तो कोई नाईट…



कृष्ण का खुद ऊँचा होना, कृष्ण के पूरे जीवनवृत्त में, उनकी ज़िंदगी की जो पूरी कहानी है उसमें और श्री कृष्ण की प्रेमकथा में एक सूत्र है जो साझा पिरोया हुआ है। गीता की ऊँचाई, कृष्ण के जीवन की ऊँचाई, और कृष्ण के प्रेम की ऊँचाई तीनों एक हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि कृष्ण बहुत ऊँचे हों और उनका प्रेम निचले तल का हो जाए। ये संभव नहीं है।

हम कहते हैं कि अब कुछ नया करते हैं, फ़ूड योगा , मूड योगा * । कोई ऐसा शब्द नहीं है जो अब * योगा के साथ नहीं जोड़ दिया गया है। नई-नई क्रियाएँ निकल रही हैं, नई-नई प्रक्रियाएँ निकल रही हैं। ये मुद्रा, ये आसान, ये करते हैं, वो…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, हम लोग कुछ भी करने बैठें, जैसे पढ़ने बैठें, योग करें, मैडिटेशन करें, यहाँ तक कि जब मैं आपसे ये सवाल भी पूछ रहा हूँ तो ये सवाल पूछते हुए भी मेरे दिमाग में कुछ और चल रहा है। तो प्रश्न ये है कि मन को नियन्त्रित…