

चेतना ना बचे उसके बाद देह का हश्र भी देखा है? दो दिन पुराना मुर्दा भी देखा है, कैसा हो जाता है? यह है इस देह की औक़ात। बड़ी सुंदरता निखारते फिरते हो! यह जितने प्रेमी घूम रहे हैं, देह के, यह पास आने से घबराएँगे।
मर जाओगे उसके ४…

समय तुम्हें इसलिए दिया गया है ताकि समय से आगे जा सको। शरीर तुम्हें इसलिए दिया गया है ताकि शरीर से आगे जा सको। शरीर इसलिए नहीं दिया गया है कि शरीर ही को बचाए पड़े हो, “और दो-सौ साल जिएँगे!” जाते-जाते अपना थोड़ा सा अंश छोड़ गए कि, “इसकी …

ये ब्रेकअप होता क्या है? तुम्हें अगर प्रेम है तो क्या तुम तय करके किसी से दूर हो सकते हो? कर कैसे लोगे? ये बात तो हृदय की होती है, आत्मा की होती है। तुम तय थोड़े ही करोगे कि कल से इससे बात नहीं करनी है क्योंकि हमारा ब्रेकअप…

अगर कोई महिला ठीक-ठाक भी होती है तो उसको बिगाड़ने का काम उसका प्रेमी या उसका पति कर देता है। देखिए, महिला को सम्मान मिलना चाहिए उसके ज्ञान से, उसके गुणों से, उसकी आंतरिक शक्ति से। लेकिन आप जब उस महिला को महत्व देना शुरू कर देते हो इस वजह…

प्रश्नकर्ता: नमस्कार सर! यह आत्मा क्या है? आप क्यों कहते हैं कि आत्मा ना आती है, ना जाती है, ना देखती है, ना सुनती है?
आचार्य प्रशांत: वैसे तो वर्तमान में आत्मा के बहुत सारे अर्थ प्रचलित हो गए हैं, पर आत्मा का असली, मौलिक अर्थ क्या है, यह उन्हीं…

प्रश्नकर्ता: कोई जन्म से ही सात्विक विचारों वाला होता है, कोई जन्म से ही राक्षसी विचारों वाला होता है और कोई जन्म से अंधा और कोई जन्म से अपाहिज भी होता है। यह इतना भेद क्यों होता है? आत्मा तो एक है फिर यह इतना भेद क्यों?
आचार्य प्रशांत: यह…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, हम मृत्यु के बाद के जीवन के बारे में कुछ-न-कुछ कहानियाँ सुनते रहते हैं, आखिर मृत्यु के बाद क्या होता है?
आचार्य प्रशांत: पहेली है ये, कुछ है ही नहीं मृत्यु के बाद। संसार ही नहीं है, तुम्हारे ही देखे संसार है तुम्हारे ही देखे समय है।…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, श्रीमद्भागवतगीता में दूसरे अध्याय, बीसवें श्लोक में बताया गया है कि शरीरी ना कभी जन्म लेता है, ना मरता है। शरीर का नाश होता है, शरीरी का नहीं। और बाइसवें अध्याय में बताया गया है कि जैसे कपड़ा पहनकर आदमी बदल देता है, पुराने कपड़े छोड़ कर…

प्रश्नकर्ता: अगर पुनर्जन्म नहीं होता तो ईश्वर ने किस आधार पर किसी को अमीर और किसी को गरीब घर में पैदा किया है?
आचार्य प्रशांत: आप अपना जो वैल्यू सिस्टम है वो किसी ईश्वर के ऊपर क्यों आरोपित या इम्पोज़ कर रहे हो? आपके हिसाब से अमीर होना बहुत बड़ी…

प्रश्नकर्ता: ओशो कहते हैं कि तुम्हारा पुनर्जन्म नहीं होता लेकिन शारीरिक मृत्यु के बाद भी मन रहता है और उसी मन का पुनर्जन्म होता है। तो कृपया उस पर थोड़ा प्रकाश डालिए। और इसी तरह का सवाल है कि आप कहते हैं कि मृत्यु के बाद कुछ भी नहीं होता;…

प्रश्नकर्ता: जैसे पता चला कि शरीर का होश या देहभाव शुरू से ही होता है तो इससे दूसरी तरफ़ जाने की क्या संभावना है?
आचार्य प्रशांत: दूसरी तरफ़ वही जाएगा न जिसको दूसरी तरफ़ लाभ है। जिसको शरीर की तरफ़ रह कर के आराम ना मिल रहा हो, शांति ना…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मन, बुद्धि और आत्मा में क्या अंतर है?
आचार्य प्रशांत: बुद्धि मन का एक अंग समझ लीजिए और आत्मा सत्य है आपका। मन सो जाता है तो बुद्धि भी सो जाती है। मन के माहौल के अनुसार बुद्धि काम करने लग जाती है, तो बुद्धि छोटी चीज़…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, आज हमने शिविर में रीडिंग करते हुए पुनर्जन्म के बारे में पढ़ा। हमने आपका एक वीडियो भी देखा जिसमें आपने बताया है कि आत्मा का कोई जन्म या मरण नहीं होता, प्रकृति का जन्म-मरण बार-बार होता रहता है और मनुष्य एक ही बार जीता है और…

दुर्लभ मानुष जन्म है, मिले न बारम्बार। तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार।।
~ कबीर साहब
प्रश्नकर्ता: सत्य की साधना में यह मनुष्य का शरीर ही अवरोध बनती है तो इसे ही दुर्लभ क्यों कहा गया है?

ज्ञानं ज्ञेयं तथा ज्ञाता त्रितयं नास्ति वास्तवं।
अज्ञानाद् भाति यत्रेदं सोऽहमस्मि निरंजनः॥ २-१५॥
ज्ञान, ज्ञेय और ज्ञाता यह तीनों वास्तव में नहीं हैं, यह जो अज्ञानवश दिखाई देता है वह निष्कलंक मैं ही हूँ

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रश्न है कि – साधक की यात्रा में अच्छे और सुन्दर कपड़े किस सीमा तक महत्व रखते हैं?
आचार्य प्रशांत:
हर वो चीज़, जो तुमको तुम्हारे नियमित जगत से आगे की याद दिलाती हो, उपयोगी है।

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मुख्य क्या है – शरीर, मन, या आत्मा? तीनों का समन्वय संसार में आवश्यक है, तो कैसे जिएँ? एक को पकड़ो, तो दो छूटते हैं। कृपया मार्गदर्शन करें।
आचार्य प्रशांत: मुख्य आप हैं।
क्योंकि आपको पहले से ही पता है कि तीन अलग-अलग इकाईयाँ हैं- शरीर, मन,…

प्रश्न: आचार्य जी, आत्मा ही परमानन्द स्वरूप हैं, यदि आत्मा न हो तो शरीर से कौन प्रेम करेगा?
आचार्य प्रशांत: श्लोक कहता है कि अगर आत्मा न हो तो शरीर से कौन प्रेम करेगा? शरीर की बात नहीं है, तुम्हे जब भी प्रेम का अनुभव होगा, वो आत्मा से और…

प्रश्न: आत्मा की जो छवि होती है, जिसको हम अपना आत्म कहते हैं, वो छवि होती है जैसे आकाश की छवि घड़े में, पानी में मिल जाती है। तो घड़े को लगता है कि उसके अन्दर आकाश है। वैसे ही हमें लगता है कि हमारे अन्दर आत्मा है क्योंकि वो…

प्रश्नकर्ता: सर, कहते हैं पुराने जन्म में जो हमने कर्म किया है वो अब हम भुगतेंगे इस जन्म में; ये एक तरह से मूर्खता नहीं है? अगर अपने पुराने जन्म में ग़लत काम किए हैं, अगर पुराना जन्म होता है तो वो सज़ा हमें उसी समय मिलना चाहिए। अब ये…

साची लिवै बिनु देह निमाणी
अनंदु साहिब (नितनेम)
(Without the true love of devotion, the body is without honour)

प्रश्नकर्ता: सर, प्राण क्या चीज़ होती है और, वो आता कहाँ से है, जाता कहाँ है? क्या प्राण और आत्मा एक ही चीज़ हैं, या अलग-अलग हैं? वो क्या चीज़ है जो इंसान को जीवित बनाती है? क्या वो प्राण है, या आत्मा है? वो क्या है?
आचार्य प्रशांत: एक…

श्रोता: सर, हम अपने दिमाग का सौ प्रतिशत उपयोग क्यों नहीँ कर पाते, जैसे की आइंस्टीन ने किया था तो वो वैज्ञानिक हो गया था? तो हम लोग सौ प्रतिशत उपयोग क्यों नहीं कर पाते?
वक्ता: तुमने जो बात उठाई है ना, ये बहुत विवादास्पद बात है। जो मस्तिष्क का…

आचार्य प्रशांत: एक उपनिषदिक् वाक्य है;
नायमात्मा बलहीनेन लभ्यः
जो बलहीन है वो कभी भी अपने करीब नहीं पहुँच सकता। जो इतना डरपोक, मुर्दा और निर्बल है कि उसको अंतर पड़ने लग जाए कि दस लोग क्या बात कर रहे हैं इधर-उधर की, उसके बस की ये सब बातें नहीं

श्रोता: सर, हमने जब अहंकार के बारे में पढ़ा था तब हमें ये बताया गया था कि जहाँ पर भी ये आ जाये कि ‘मैं हूँ’, वहां पर अहंकार है।
वक्ता: ‘मैं हूँ’ नहीं, ‘मैं कुछ हूँ’।
श्रोता: अगर कोई भिखारी कहे कि मैं भूखा हूँ, तो…

श्रोता: सर, मुक्ति तो आत्मा से होती है, शरीर तो बन्धनों से जुडा ही रहेगा। जिसके पास कुछ नहीं है उसकी हर चीज़ पाने की कोशिश रहेगी और जिसके पास हर चीज़ है वो उसको बचाने की कोशिश करेगा। कुछ तो है जो चलता ही रहेगा, मुक्ति तो सिर्फ आत्मा…





Questioner(Q): What is the process of clarity? Is it just listening with immersion and no resistance? What is Truth? How we decide it?
Acharya Prashant (AP): Listening without effort, plus if there is Truth in what you hear, there is change and transformation, and that Truth becomes the master. We…



पृथ्वी को बचाने के लिए यूनाइटेड नेशंस की सीओपी ने यह शर्त रखी थी कि 2030 तक वैश्विक तापमान 1.5 डिग्री से अधिक नहीं बढ़ना चाहिए। हमने वह सीमा 2025 में ही लांघ दी है। यह आने वाले बहुत-बहुत बड़े विनाश का संकेत है। आदमी के इतिहास में इससे ख़तरनाक पल कभी नहीं आया। उस ख़तरे को चुनौती देने के लिए ही यह "ऑपरेशन 2030" है, जिसका उद्देश्य है कि आम आदमी में चेतना जगाई जाए — “देखो, तुम्हारा ग्रह विनाश की ओर कितनी तेज़ी से बढ़ रहा है। तुम अपने बच्चों के लिए एक ऐसा ग्रह छोड़कर जा रहे हो, जहाँ आफ़तें ही आफ़तें होंगी।”








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\n\n29 अप्रैल से 1 मई, 2022 तक आयोजित हुए वेदांत महोत्सव के एक प्रतिभागी की प्रेरणास्पद कहानी\n\nमेरा नाम राकेश कुमार है। मैं कानपुर नगर से हूँ। पिछले चार माह से मैं हर…

हम कहते हैं कि अब कुछ नया करते हैं, फ़ूड योगा , मूड योगा * । कोई ऐसा शब्द नहीं है जो अब * योगा के साथ नहीं जोड़ दिया गया है। नई-नई क्रियाएँ निकल रही हैं, नई-नई प्रक्रियाएँ निकल रही हैं। ये मुद्रा, ये आसान, ये करते हैं, वो


◾ एक ही जाति होती है - वह है "बल"। बल विकसित करो अपने भीतर।
◾ आत्मा का इस पूरे देह व्यापार से कोई लेना देना ही नहीं।


प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जो आत्मबल है उसमें आत्म का तो पता है, पर यह बल कहाँ से आएगा?
आचार्य प्रशांत: आत्मा का बल कभी आत्मा स्वयं प्रदर्शित करने नहीं आती। वो अपना बल किस पर प्रदर्शित करे, उसके अतिरिक्त तो कुछ है नहीं। तो आत्मा कभी स्वयं नहीं आएगी अपने…

यदा नाहं तदा मोक्षो
यदाहं बन्धनं तदा।
मत्वेति हेलया किंचिन्-
मा गृहाण विमुंच मा॥८- ४॥

आचार्य प्रशांत: मैं सवाल समझा देता हूँ सबको। कह रहे हैं…
~ अष्टावक्र गीता (अध्याय 2 श्लोक १५)
प्रसंग:
"The Self is abstract intelligence free from thought.…
अध्यात्म की रोशनी जीवन के हर क्षेत्र पर पड़ती है, तो राजनीति पर भी पड़ेगी ही पड़ेगी। ऐसा कुछ नहीं है कि आध्यात्मिक आदमी राजनीति के प्रति अंधा हो जाता है। बल्कि हक़ीक़त तो यह है कि राजनीति को आध्यात्मिक लोगों की बहुत सख़्त ज़रूरत है, क्योंकि राजनेता ताक़त की ऐसी गद्दियों पर बैठते हैं, जहाँ से वो आपके जीवन को बहुत तरीके से प्रभावित करते हैं। राजनेता अगर आध्यात्मिक नहीं है, तो देश रसातल में जाएगा। राजनीति त्यागनी नहीं है, सही राजनीति करनी है।https://acharyaprashant.org/en/articles/raajneeti-mein-adhyatm-kyon-zaroori-1_795988a15
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अब देखिएगा, क्या हो रहा है। कोई कृतज्ञ कब अनुभव करेगा? जब पहले उसकी हालत ख़राब हो और कोई बचाए। आपके भीतर अभी यह इच्छा शेष है कि आप कृतज्ञ अनुभव करती रहें और कृतज्ञता अनुभव करने के लिए ज़रूरी है कि कुछ गड़बड़ हो और फिर उस गड़बड़ से आप उबार ली जाएँ। तो फिर आप कृतज्ञ अनुभव करेंगी कि, अरे, मेरा सौभाग्य कि मुझे किसी ने बचा लिया।
कृष्ण का खुद ऊँचा होना, कृष्ण के पूरे जीवनवृत्त में, उनकी ज़िंदगी की जो पूरी कहानी है उसमें और श्री कृष्ण की प्रेमकथा में एक सूत्र है जो साझा पिरोया हुआ है। गीता की ऊँचाई, कृष्ण के जीवन की ऊँचाई, और कृष्ण के प्रेम की ऊँचाई तीनों एक हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि कृष्ण बहुत ऊँचे हों और उनका प्रेम निचले तल का हो जाए। ये संभव नहीं है।
प्रश्नकर्ता: कृष्ण अध्याय नौ में बताते हैं कि वे सब भूतों में समभाव से व्यक्त हैं, वहीं अध्याय दस में बताते हैं कि जो कुछ भी विभूतियुक्त, कांतियुक्त और शक्ति युक्त है, वो कृष्ण की अभिव्यक्ति है। अध्याय नौ में कृष्ण कहते हैं कि ऋग्वेद, सामवेद, अथर्ववेद मैं ही हूँ…
या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी। यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुने:।।
जो सब जीवों के लिए रात्रि है, वह आत्मसंयमी के जागने का समय है और जो समस्त जीवों के जागने का समय है, वह आत्मनिरीक्षक मुनि के लिए रात्रि है।
—श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय २, श्लोक ६९
प्रश्नकर्ता: जब…
प्रश्नकर्ता: नमस्कार, सर। आज का सबसे पहला प्रश्न जो है वह सनातन के ऊपर है कि सनातन माने क्या? और ऐसा क्या है जिसको वास्तविक रूप में सनातन कहा जा सकता है?
आचार्य प्रशांत: देखिए, सनातन का अर्थ होता है वो जो काल की सीमाओं से के बाहर का हो।…
◾ आत्मा का विकृत सिद्धांत ही भारत की दुर्दशा…
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, अर्जुन कहते हैं कृष्ण से कि ‘धृतराष्ट्र पुत्र चाहे मुझे मार भी दें तो भी उनसे लड़ना तो ग़लत ही है।‘ हमारे आम जीवन में भी ऐसे ही चलता रहता है कि हम इमोशनल ब्लैकमेल (भावनाओं से किसी को नियंत्रित करना) करते हैं बहुत बार, या…