प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मुख्य क्या है – शरीर, मन, या आत्मा? तीनों का समन्वय संसार में आवश्यक है, तो कैसे जिएँ? एक को पकड़ो, तो दो छूटते हैं। कृपया मार्गदर्शन करें।
आचार्य प्रशांत: मुख्य आप हैं।
क्योंकि आपको पहले से ही पता है कि तीन अलग-अलग इकाईयाँ हैं- शरीर, मन, और आत्मा। इनका विभाजन किसने किया? आपने किया। तो इन तीनों से बड़ा कौन हुआ? आप हुए। आपने पूछा ‘मुख्य’, ‘मुख्य’ माने – कीमती, पहला। जब इन तीनों का विभाजन आप कर रहे हो, तो निश्चित-सी बात है इन तीनों से प्रमुख आप हुए।
ये ‘आप’ जानते हैं कौन है? ये अहंता है, ये अहंकार है। कैसे पता आपको कि तीन अलग-अलग होते हैं – शरीर, मन, आत्मा?
पर सवाल आप ऐसे पूछते हैं कि बिलकुल आपकी अपनी जानकारी है। ख़ुद गए थे और कहीं देखकर आए थे कि तीन पेड़ों पर तीन अलग-अलग फल हैं - शरीर, मन और आत्मा। कुछ पता है आपको शरीर का? आत्मा से क्या परिचय है आपका? मन का कब अवलोकन किया आपने? पर कितने विश्वास से पूछा!
और यही नहीं पूछा कि – “तीन हैं क्या?” “तीन हैं, ये तो हमें पता है! आप बताइए कि तीनों में प्रमुख कौन है?”
तीनों में प्रमुख आप हैं। तीनों के बाप आप हैं। ये तीनों आप से ही उद्भूत हैं।


