
कृष्ण का खुद ऊँचा होना, कृष्ण के पूरे जीवनवृत्त में, उनकी ज़िंदगी की जो पूरी कहानी है उसमें और श्री कृष्ण की प्रेमकथा में एक सूत्र है जो साझा पिरोया हुआ है। गीता की ऊँचाई, कृष्ण के जीवन की ऊँचाई, और कृष्ण के प्रेम की ऊँचाई तीनों एक हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि कृष्ण बहुत ऊँचे हों और उनका प्रेम निचले तल का हो जाए। ये संभव नहीं है।

लड़का-लड़की पंद्रह साल के हुए नहीं कि माँ-बाप बन सकते हैं, फिर? बहुत अक्ल आ जाएगी उनमें? और फिर जो बच्चा पैदा हो उसको सिखाएँ कि, “यह देवी-देवता हैं, हमने पैदा किया है।“ वह देवी-देवता ने नहीं पैदा किया है, वह पैदा इसलिए हो गया था क्योंकि देवी जी बहकी…

“ओ ले-ले-ले! मेला शोमू कितना स्टुपिड है!" अरे! स्टुपिड (मूर्ख) है तो यह बोलने के लिए भी काहे को रुकी कि शोमू स्टुपिड है? भाग! जान बचाकर भाग। पर शोमू क्यूट ही इसीलिए है क्योंकि वह स्टुपिड है। अजीब बात है! तुमको पता है वह स्टुपिड है पर तुम तब

लोग कहते हैं सच्चा प्यार मिलता नहीं, मैं कहता हूँ सच्चा प्यार तुमसे बर्दाश्त होता नहीं। मिल तो आज जाए, झेल लोगे? बड़े अफ़साने लिखे जाते हैं, शायरों की दूकान ही चल रही हैं इसी बात पर कि ‘हम तो बड़े क़ाबिल थे पर कमबख़्त ज़िंदगी ने धोखा दे दिया,…

यह एक बड़ा भ्रम कि जल्दी से शादी कर लो और शादी करने से दूसरा व्यक्ति ज़िम्मेदार हो जाएगा। जो माँ-बाप कहते हैं, “ये बड़ा उद्दण्ड है, लड्डू। गाँव भर में लुढ़कते फिरता है लड्डू। तो लड्डू को ज़िम्मेदार बनाने के लिए लड्डू की शादी कर देते हैं।” घर में…

यह जगत तो लाभ का सौदागर है। वो आप से नहीं प्रेम करता; आपसे जो मिल रहा है उसे से प्रेम करता है। और इस बात का बड़ा कड़वा अनुभव आपको तब होता है जब आप देना बंद कर देते हैं। आप तो यही सोचते रह गए कि उस व्यक्ति…

ये ब्रेकअप होता क्या है? तुम्हें अगर प्रेम है तो क्या तुम तय करके किसी से दूर हो सकते हो? कर कैसे लोगे? ये बात तो हृदय की होती है, आत्मा की होती है। तुम तय थोड़े ही करोगे कि कल से इससे बात नहीं करनी है क्योंकि हमारा ब्रेकअप…

प्रश्नकर्ता: “जाने वो कैसे लोग थे, जिनके प्यार को प्यार मिला।“
आचार्य प्रशांत: वो बहुत अलग लोग थे, तुम्हारे जैसे लोग नहीं थे; 'जाने वो कैसे लोग थे, जिनके प्यार को प्यार मिला, हमने तो जब कलियाँ माँगी तो काँटों का हार मिला।' अरे! तुम ख़ुद बहुत बड़ा काँटा हो!…

दुनिया में एक-से-बढ़कर-एक प्रकाशित स्त्रियाँ हुईं हैं, जाओ उन्हें चाहो, बिलकुल उनके प्रेम में पड़ जाओ, न्योछावर हो जाओ उनपर, तुम्हारी ज़िंदगी बन जाएगी। पर तुम ऐसा करते नहीं। ऊँची स्त्रियों से तुम्हें भय लगता है, क्योंकि ऊँची स्त्री के पास जाकर के तुम अपना बौनापन बरक़रार नहीं रख सकते।…

किसी ने आपसे पूछा, “अरे! तुमने मुझे पाँच दिन से फ़ोन नहीं किया, तुम्हें मेरी याद नहीं आयी?” आप कहते हैं, “अगर मैं इसको सच बता दूँ तो इस बेचारे के दिल को चोट लगेगी, ये दुख जाएगा।“ तो आप कहते हैं, “नहीं याद तो बहुत आयी, वो नेटवर्क नहीं…

जिस स्तर के तुम आदमी हो, जिस औकात की तुम्हारी ज़िंदगी है, तुम्हारी प्रेम कथा भी उसी स्तर, उसी औकात की होगी। तो ये हिमाक़त तो करना ही मत कि ज़िंदगी है दो फुट की औकात की और दुनिया को बताते घूम रहे हो कि, “मेरी आशिक़ी का आसमानी अफ़साना…

प्रेम का अर्थ ये नहीं कि, “तुम मुझे खुश रखो, मैं तुम्हें खुश रखूँ।“ बिलकुल भी नहीं!
जिससे देह का सुख मिल गया, जिससे मन का सुख मिल गया, धन का सुख मिल गया उसी को कह दिया, ‘इससे प्रेम है।‘ यही है न प्रेम हमारा?
दूसरे को सुख देने…

ये सब भी पिक्चरों में होता है कि वहाँ जाकर पूछा जाता है कि, “*टी और कॉफी? योर प्लेस ऑर माय प्लेस?*” (चाय या कॉफ़ी? तुम्हारे घर या मेरे घर?)
हिंदुस्तान में तो ऐसे पूछते हैं, “जात बताएगी?” फिर जैसे ही जात मिली...
”गोत्र बता, गोत्र?”

प्रश्नकर्ता: बच्चा पैदा करने को प्रेम का एक प्रतीक भी माना गया है। जल्दी ही वेलेंटाइन डे भी आ रहा है। कृपया आप उस पर कुछ कहें। आचार्य प्रशांत: छोटा था, स्कूल के बाहर खड़ा था – वहाँ देखूँ, एक गधा एक गधी को दौड़ाए हुए है। मुझे वो पूरा…

शादी का ही उत्सव ऐसा करा था जिसमें न-जाने कितना प्रदूषण फैला दिया। और प्रदूषण फैलाने को नहीं मिल रहा आजकल कोरोना के कारण, तो बड़े दिल टूट रहे हैं। कह रहे हैं, “सिर्फ़ पचास ही लोग आएँगे क्या? हमें वातावरण तबाह करने का मौका नहीं दोगे, प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़…

कोई साधारण कद-काठी का आदमी हो, और वो चला जा रहा है, और पीछे से कोई आवाज़ दे उसे, “ओ मोटे!” इस आदमी का दिल टूट जाएगा? इसका दिल टूट जाएगा? और दूसरी और हो कि सवा-सौ किलो का वो किसी तरह लुढ़कता-पुड़कता चला जा रहा हो, और पीछे से…

प्रेम कोमलता की बात है? नहीं, प्रेम के लिए तो लोहा चाहिए! “जो ज़रा मुलायम दिल के लोग होते हैं, प्रेम तो उनकी बात है।” – नहीं! जो ये कोमल और मुलायम होते हैं यह तो बचेंगे ही नहीं कहीं प्रेम में, एकदम नष्ट हो जाएँगे।
प्रेम उनके बूते की,…

जिसी स्त्री के नितंब बड़े हों, स्तन बड़े हों, चर्बी खूब हो कोमल-कोमल, तुम्हारी भाषा में, वो पुरुष को तत्काल पसंद आ जाती है। उसमें सुंदरता की कोई बात नहीं है; उसमें प्राकृतिक व्यवस्था है गर्भाधान की। वह प्राकृतिक व्यवस्था है कि पुरुष की आँखें ढूँढ़ती ही ऐसी स्त्री को…

"हम इतना प्यार करते हैं उधर से कुछ आता नहीं।" जब यह प्रश्न उठे तो अपने-आप से पूछिए कि, "मैं माँग क्या रही हूँ?"
'आई हियर बाय रिक्वेस्ट यू टू लव मी' (मैं तुमसे मुझे प्रेम करने की प्रार्थना करती हूँ)
"महोदय, सविनय निवेदन है कि कृपया थोड़ा…

देवी जी आईं, बोलीं, “पैसा नहीं है।“
मैंने कहा, "आप का कुछ अपना खाता-वाता नहीं है?" बोलीं, “है।“
“उसमें कुछ नहीं?”

“आज ज़रा नॉन-वेज (माँस) खाने का मन था!” अरे! नॉन-वेज क्या होता है? सीधे बोलो, “आज किसी की जान लेने का मन था। आज किसी की गर्दन पर छुरी चलाने का मन था।“ पर ये बात बोलोगे तो तुम्हें ही अच्छा नहीं लगेगा। तो कहते हो, “चलो जी थोड़ा नॉन-वेज…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपका हमारे लिए क्या संदेश है?
आचार्य प्रशांत: (प्रेमपूर्वक हँसते हुए) मुझे ही ले चलो, मैं ही संदेश हूँ!
मज़ाक नहीं, मैं ही संदेश हूँ भाई! क्या संदेश दूँगा! जो भी संदेश दूँगा शाब्दिक होगा, तो अधूरा होगा। जैसे जी रहा हूँ देख लो, वही संदेश है।

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपने जैसे कहा था कि “जब कोई पैदा होता है, तो वो वृत्तियों और विकारों के साथ पैदा होता है।” तो छोटे बच्चे इतने खुश क्यों मालूम पड़ते हैं?
आचार्य प्रशांत: जिनके पास बच्चे हों, उनसे पूछो ज़रा!
ये सवाल कोई छड़ा (कुँवारा) ही पूछ सकता है,…

"मुक्ति के लिए अपने मन से वस्तुओं के उपभोग की इच्छा को विष की तरह त्याग दो, क्षमा, सरलता, दया, संतोष तथा सत्य का अमृत की तरह सेवन करो" ~ अष्टावक्र गीता, अध्याय १, श्लोक २
आचार्य प्रशांत: अष्टावक्र गीता, पहला अध्याय, दूसरा श्लोक।
अष्टावक्र दया की बात क्यों कर…

प्रश्नकर्ता: कई बार सुना ओशो साहब से; सुनते रहते थे। लेकिन आपके सानिध्य में आने पर स्पष्टता आई कि जीव का परम के प्रति जो एक मिलने की चाह है; वो प्रेम है। तो शुरू में जैसे पत्नी के साथ; देखने गए तो देह का ही सम्बन्ध रहा, देह को…

प्रश्नकर्ता: मैंने ये अक्सर पाया है कि मेरी सोच जो है, न घर में पत्नी और माँ के साथ मेल खाती है, और न ही काम पर बॉस और सहकर्मियों के साथ मेल खाती है। उस चक्कर में वाद-विवाद हो जाता है, या फ़िर मैं एक सुनिश्चित सी दूरी बना…

प्रश्नकर्ता: अभी हम ये उपनिषद् पढ़ रहे हैं और आपसे समझ रहे हैं, तो ये बार-बार आप बता रहे हैं कि जब पढ़ो ब्रह्म और परमात्मा के बारे में तो अपनी ओर देखो; लेकिन यदि कोई खुद से ही बैठकर पढ़ता है तो ये मुश्किल होता है। तो उस संदर्भ…

प्रश्नकर्ता : आचार्य जी, क्या जीवन में इच्छाएँ होनी चाहिए या नहीं?
आचार्य प्रशांत: अपने स्वभाव में तुम स्थित हो जाओ, ये इच्छा बुरी नहीं है। 'इच्छा', 'इच्छा' में फर्क होता है। 'अपेक्षा', 'अपेक्षा' में फर्क होता है। तुम कहो कि तुम्हें बोझमुक्त जीना है, हल्का जीना है, आनदिंत जीना…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, बहुत लोग ऐसे हैं जिन्होंने अपना जीवन औरों को समर्पित किया है। उन्हें हम महात्मा कहते हैं, हीरो कहते हैं, अवतार कहते हैं, महापुरुष कहते हैं। इन लोगों ने औरों को अपने आप से ऊपर रखा है। लेकिन मैंने अपने कुछ लोगों का एक दायरा बनाया हुआ…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मैं जिसके प्रेम में हूँ उसका मन बहुत अशांत रहता है, उसकी वजह से मैं अशांत हो जाती हूँ तो इससे कैसे निजात पाया जाए?
आचार्य प्रशांत: अपने प्रेम में से स्वार्थ कम करते जाओ। तुम प्रेम में हो, यही सबसे बड़ा इलाज है। और किसी ईलाज…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, पिछले काफ़ी समय से मैं किसी व्यक्ति को विशेष महत्व नहीं दे पाती हूँ, अब कोई अनजान व्यक्ति हो या रिश्तेदार, सबको एक समान देखती हूँ, और इसी कारण मेरे रिश्ते ख़राब हो रहे हैं। क्या करूँ? कृपया मदद कीजिए।
आचार्य प्रशांत: पहली बात तो ये है…

आचार्य प्रशांत: प्रेम और कारोबार के नियम अलग-अलग होते हैं। कारोबार का नियम है कि अगर लिया है तो लौटाना पड़ेगा, और प्रेम का नियम होता है कि मिला हो चाहे न मिला हो, बाँटना पड़ेगा। प्रेम यह देखता ही नहीं मिला कितना और कारोबार अगर यह न देखे कि…

प्रश्नकर्ता: हम जिनसे प्यार करते हैं, वो हमसे नफ़रत क्यों करते हैं?
आचार्य प्रशांत: तकलीफ़ क्या है? आप तो प्रेम कर ही रहे हैं। प्रेम तकलीफ़ की चीज़ थोड़े ही है। आप तो अपने मन का काम कर ही ले रहे हैं न? आपको क्या करना था? प्रेम। और आपने…

प्रश्नकर्ता: आप बार-बार हमारे साधारण और सांसारिक प्रेम को झूठा सिद्ध करने में लगे रहते हैं। आप बार-बार कहते हैं कि हमारे प्रेम में कोई दम नहीं, हमारा प्यार कुछ असली नहीं। जब दुनिया के बड़े-बड़े ज्ञानी भी आज तक प्यार की कोई परिभाषा नहीं दे पाए तो आपको कैसे…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्यार क्यों नहीं है रिश्तों में आजकल?
आचार्य प्रशांत: किसके?
प्र: सबके।

प्रश्नकर्ता: मैं लोगों के सामने अपना व्यक्तित्व ऐसे पेश करता हूँ कि मुझे लोगों से प्यार ही मिले और नफरत न मिले। मैं चाहता हूँ कि मुझे लोगो से प्यार ही मिले। और मुझे यह अच्छा भी लगता है जब मुझसे कोई प्रेमपूर्वक व्यवहार करता है, भले ही वह व्यक्ति…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अपनों को खो देने का डर हमेशा लगा रहता है। पति को, या बेटे को कुछ हो न जाए, ये विचार हमेशा मन में चलता रहता है। इसी से जुड़ा एक और प्रश्न फिर मन में उठता है, कि क्या खुशकिस्मती और बदकिस्मती जैसा कुछ होता है?…

प्रश्नकर्ता: क्या ज़िंदगी में किसी दूसरे व्यक्ति का साथ ज़रूरी है? आज मैंने प्रेम विषय पर आपको पढ़ा। आपने बताया कि प्रेम दूसरे से चिपकने का नाम नहीं है। मन शांत हो, अकेला हो तब उसे प्रेम समझ में आता है पर मैं तो अकेले नहीं रह पाती हूँ। क्या…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, चार साल से एक लड़के के साथ संबंध में हूँ। हम एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं, पर प्यार के साथ रिलेशनशिप (सम्बंध) में रोमांस और इंटिमेसी (अंतरंगता) भी आते हैं। आज इतने सालों में उसको देखती हूँ तो दिखता है कि उसे तो सिर्फ फिजिकल लव…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जैसे कबीर साहब ने कहा है कि ढाई अक्षर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय। तो क्या ये इंसान से प्रेम करने की बात कह रहे हैं? मुझे लगता है कि ये इंसान से प्रेम करने की बात कह रहे हैं क्योंकि वो देखते हैं कि जग…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, क्या प्रेम किसी से भी हो सकता है?
आचार्य प्रशांत: एक व्यक्ति वह होता है जो किसी और से कोई संबन्ध रख ही नहीं सकता क्योंकि वह बहुत स्वकेंद्रित होता है। यह मन का सबसे निचला तल है, स्वकेंद्रित मन। वह किसी से कोई रिश्ता रख ही…

प्रश्नकर्ता: जब भी आपसे कोई प्रश्न पूछना चाहता हूँ, बेईमानी एकदम मुँह फाड़े खाने को खड़ी रहती है और मैं अपनी बची हुई सेल्फ-इमेज (आत्म छवि) को लेकर भागता हूँ इस डर से कि उसे भी खो न दूँ। इस दलदल से निकलने का समाधान प्रेम प्रतीत होता है पर…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रेम क्या है और हम प्रेममय जीवन कैसे जी सकते हैं? बिना प्रेम का जीवन और प्रेममय जीवन में क्या अंतर होता है और उस अंतर को हम कैसे देख सकते हैं?
आचार्य प्रशांत: बिना प्रेम का जीवन ऐसा है जैसे सूखा पत्ता उड़ रहा है हवाओं…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आप कह रहे हैं कि खुद के प्रति प्रेम होना चाहिए। आपके अनुसार हमें अपने आंतरिक कष्ट से मुक्ति की कोशिश करनी चाहिए। एक तरह से ये स्वार्थ तो गहन अहंकार हुआ।
आचार्य प्रशांत: हाँ, तो वो गहन अहंकार चाहिए, गहन माने गहरा। गहरा अहंकार है जहाँ,…

प्रश्नकर्ता: हाल ही में परिवार में किसी अतिप्रिय व्यक्ति का देहाँत हुआ। मन को आघात लगा जब परिवार से संबंधित कई तथ्य उजागर हुए। मैने जाना कि दशकों साथ रहने के बाद भी एक परिवार के लोगों में आपसी नज़दीकी नहीं होती। क्या परिवार की संस्था ही अप्रेम पर आधारित…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, हमारे जो ये सम्बन्ध होते हैं, उसमें हम ये दावा तो करते हैं कि बेशर्त प्रेम है, पर एक इंसान कोशिश करता रहता है कि प्रेम सम्बन्ध टूटे नहीं और एक इंसान बार-बार निराशा से सम्बन्ध तोड़ देता है, कि मुझसे और हो नहीं रहा। वो ये…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। इस गीत में प्यार का मतलब प्रतीत होता है किसी व्यक्ति के प्रति गहरा आकर्षण। मैंने खुद की ज़िन्दगी में भी ये महसूस किया है कि किन्हीं व्यक्तियों को देखते या सुनते ही अचानक एक जुड़ाव अनुभव होता है और बाद में समय के साथ यह…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम! मेरा प्रश्न वृत्तियों के ऊपर है। गौतम बुद्ध कहते हैं कि वृत्तियों को बिना राग और द्वेष जगाए होशपूर्वक देखने मात्र से वृत्तियाँ क्षीण हो जाती हैं। परंतु मैं कितना भी प्रयास कर लूँ तब भी राग और द्वेष से निर्लिप्त नहीं हो पाता। इसका कारण…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रेम और मोह में क्या फ़र्क होता है?
आचार्य प्रशांत: प्रेम ऐसा है कि जैसे कोई चार दीवारों में क़ैद है और क़ैद उसे अखरने लगी है, बाहर की हवा प्यारी लगने लगी है, और बाँसुरी पर दी हुई तान हवा पर बहती हुई, उसकी दीवारों के…

प्रश्नकर्ता: काम को ले कर मैं पूरा श्रम नहीं करता; पता होते हुए भी नहीं करता। जैसे नींद आती है पढ़ाई के समय। एक तरह की बेईमानी भी है। उस काम में मेरी पूरी रुचि नहीं होने का एक कारण यह भी रहा है कि वो चीज़ मूल्यहीन लगती रही…
“फिर?”
“नहीं, वो ए. टी. एम एक ही है, वह उनके पास रहता है।“
मैंने कहा, “ले!”
अपना खाता रखो, और ए. टी. एम का पासवर्ड पतिदेव…
प्र: जिनसे हम जुड़े हुए हैं।
आचार्य: बस। तो अगर…