
लड़की को पढ़ाई के लिए दो-सौ किलोमीटर दूर भेजना हो तो यही माँ-बाप और भाई कन्नी काट जाते हैं, और ब्याह कर वो दो-हज़ार किलोमीटर दूर जा रही हो इन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा। और पढ़ाई के लिए जाएगी तो किसी यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहेगी, सुरक्षा में रहेगी, हॉस्टल…

तो शादी से पहले तो तुम ख़ुद ही सच्चाई को पर्दे में रखते हो। तुम ख़ुद ही एक दूसरे के सामने सभ्यता का, शालीनता का, भलाई का मुखौटा पहन कर बैठते हो। “नहीं, नहीं तुम बैठो! पॉपकॉर्न मैं ले आता हूँ।“
“नहीं, नहीं तुम क्यों खर्च करोगी, मैं कर रहा…

यह एक बड़ा भ्रम कि जल्दी से शादी कर लो और शादी करने से दूसरा व्यक्ति ज़िम्मेदार हो जाएगा। जो माँ-बाप कहते हैं, “ये बड़ा उद्दण्ड है, लड्डू। गाँव भर में लुढ़कते फिरता है लड्डू। तो लड्डू को ज़िम्मेदार बनाने के लिए लड्डू की शादी कर देते हैं।” घर में…

लड़के अगर बेरोज़गार हों और शादी के लिए लालायित हो जाएँ तो तुम कहोगे, “छी! कमाता ना धमामा, शादी करने चला है!”
और लड़कियों से यह बात तुम बोलते नहीं। क्योंकि लड़कियाँ तो गाय हैं, उन्हें कमाना-धमाना थोड़े ही है। उन्हें तो घर में बैठकर बछड़े जनने हैं।
जब बहन…

लड़की होगी वो चाहे गुड़गाँव में काम कर रही हो, चाहे बंबई में, चाहे बेंगलुरु में, उसकी दो ज़िंदगियाँ होती हैं। एक जो दफ्तर में होती है, दफ्तर में हो सकता है मैनेजर हो, पंद्रह लोग उसको रिपोर्ट करते हों, पंद्रह लोग उसके अधीनस्थ हों। और वहाँ पर वो एक…

किसी भी आम लड़के से पूछ लो वो किसलिए विवाह करता है; सम्मानजनक काम करने के लिए तो वो भी विवाह करता नहीं, काम वह सारे ऐसे ही करता है जो विवाह के बिना करदे तो तुम कहोगे 'ज़लील, लुच्चे, लफ़ंगे! गायब हो जा यहाँ से!'
तो तुम जो अपना…

प्रश्नकर्ता: सर, लोग दहेज क्यों लेते हैं?
आचार्य प्रशांत: कोई किसी का साथ पैसे लेकर के करेगा तो मैं कैसे बोलूँ इस पर? मैं मुश्किल पाता हूँ इस बात को कल्पित करना, उस आदमी की शक्ल को चित्रित करना जो कह रहा है कि, “मैं किसी के साथ हो सकता…

पूछो किसी से, “विवाह क्यों कर रहे हो?” तो सीधे थोड़े ही बता देगा कि, “इसलिए कर रहे हैं...” क्योंकि नर खरगोश मादा खरगोश के पास क्यों जाता है? प्रकृति चाहती है कि नन्हे-मुन्ने खरगोश आएँ, बस इतनी सी बात, इसलिए जाता है।
यही विवाह के वक़्त स्त्री और पुरुष…

ये सब भी पिक्चरों में होता है कि वहाँ जाकर पूछा जाता है कि, “*टी और कॉफी? योर प्लेस ऑर माय प्लेस?*” (चाय या कॉफ़ी? तुम्हारे घर या मेरे घर?)
हिंदुस्तान में तो ऐसे पूछते हैं, “जात बताएगी?” फिर जैसे ही जात मिली...
”गोत्र बता, गोत्र?”

शादी का ही उत्सव ऐसा करा था जिसमें न-जाने कितना प्रदूषण फैला दिया। और प्रदूषण फैलाने को नहीं मिल रहा आजकल कोरोना के कारण, तो बड़े दिल टूट रहे हैं। कह रहे हैं, “सिर्फ़ पचास ही लोग आएँगे क्या? हमें वातावरण तबाह करने का मौका नहीं दोगे, प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़…

हज़ार में से नौ-सौ-निन्यानवे लोगों के पास कोई ऐसा ऊँचा लक्ष्य, मकसद नहीं होता जिसको वह अपनी ज़िंदगी क़ुर्बान कर सकें, तो उनको शादी कर लेनी चाहिए। क्योंकि शादी नहीं करेंगे तो बड़ा उपद्रव करेंगे। उनके मन में ये शिक़ायत रह जाएगी कि, “बाकी दुनिया को तो कुछ खास मिल…

विवाह के दिन हर लड़का, चाहे वह कितना भी बड़ा... (मूर्ख हो), घोड़ी पर तो चढ़ लेता है न? नहीं तो ऐसे तो उसको टट्टू भी अनुमति ना दे। टट्टू भी बोलेगा, “मैं तुझ पर चढूँ वो ज़्यादा शोभा देगा!” विवाह के दिन, एक-से-एक मूर्खानंद घोड़ी चढ़ने को पा जाते…

बहुत सारी लड़कियों को शादी का आकर्षण इसलिए रहता है कि, ‘उसके बाद किसी की आमदनी मेरी हो जाएगी। पति घर लाएगा और मेरे हाथ मैं तनख़्वाह रख देगा।‘ क्षमा माँगते हुए कह रहा हूँ, ये वैश्यावृति है।
बड़ी साधारण योग्यता की कोई लड़की अगर पा जाए कोई ऊँचे पद…

तुम कर लो विवाह, पर यह उम्मीद मत रखना कि उससे अकेलापन कम हो जाएगा। संभोग इत्यादि के अवसर खूब उपलब्ध हो जाएँगे, वह सब हो जाएगा। बच्चे वगैरह हो जाएँगे, घर-खानदान खड़ा हो जाएगा, माता-पिता इत्यादि अगर तुमसे उम्मीदें कर रहे होंगे तो वो उम्मीदें पूरी हो जाएँगी। वह…

प्रश्नकर्ता: (प्रश्नकर्ता ने अपना प्रश्न आचार्य जी तक मोबाइल में सन्देश के ज़रिए पहुँचाया था) प्रणाम आचार्य जी, मुझमें अपराध भाव बढ़ता जा रहा है, मैं शादी नहीं करना चाहता। जो भी मेहमान घर पर आते हैं वह कहते हैं कि, "शादी की खुशख़बरी कब?" सब के अनुसार शादी और…

प्रश्नकर्ता: मैं अपने बेटे की शादी करना चाहती थी, उसको तैयार कर लिया था, सारी बात जमा दी थी, वो शादी से पाँच दिन पहले घर से भाग गया। मेरे सारे सपने टूट गए। अब मैं बहुत दुखी हूँ। अब मुझे सत्संग ही बचाएगा।
आचार्य प्रशांत: सत्संग को आपसे कौन…

प्रश्नकर्ता: मैं अपने परिवार की एक स्थिति में असमंजस में पड़ा हुआ हूँ। मेरे भाई एक लड़की से प्रेम करते हैं जो दूसरी जाति की है। इसी कारण मेरे घरवाले इस रिश्ते से काफी अप्रसन्न हैं। भाई बोलता है कि माँ-पापा को समझाओं और मेरी मदद करो और माँ-पापा कहते…

प्रश्नकर्ता: पिछले तीन साल से आपको सुन रहा हूँ और अब कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लेने हैं — नौकरी चुननी है और विवाह संबंधित कुछ फैसले लेने हैं। और आप कहते हैं कि शादी और नौकरी, ये किसी की ज़िंदगी या तो बना सकते हैं या बिगाड़ सकते हैं। आपने एक…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मेरा मेरी पत्नी से कोई लगाव वगैरह कुछ नहीं है। बस सामाजिक दबावों से उसके साथ हूँ। तलाक से डरता हूँ। डर लगता है कि तलाक हुआ तो पता नहीं क्या-क्या देखना पड़ेगा। पत्नी से सम्मान की इच्छा रहती है, मिलता बस अपमान है, लेकिन मैं चाहता…

प्रश्नकर्ता: नमस्कार, सर। पिछले ही साल मेरी शादी हुई। मेरी पत्नी एक टीचर है। मैंने देखा है कि मैं उसके प्रति अविश्वास से भरा रहता हूँ, चोरी छुपे उसके फोन और अलमारी पर नज़र रखता हूँ। मुझे खुद अपने पर बहुत घिन आती है पर यह करने से खुद को…

प्रश्नकर्ता: जब मैं आपको नहीं सुनता था तो ऐसा सोचता था कि जो माता-पिता शादी करवाते हैं वह कुदरती घटना है। क्योंकि हम जन्मे वह भी कुदरती, तो जो समाज में शादी हुई वह भी कुदरती घटना है और जो लव मैरिज करते हैं वह आर्टिफिशियल है लेकिन आपको सुनते-सुनते…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, सामान्यतया यह देखा जाता है कि विवाह के लिए लड़की की आयु लड़के से कम होती है। कृपया इस विषय पर कुछ कहने की कृपा करे।
आचार्य प्रशांत: उसके प्राकृतिक कारण हैं, उसका प्रेम से थोड़ी कोई संबंध है। वो तो आप जानते ही हैं जो भी…

आचार्य प्रशांत: दो वक्तव्य हैं ओशो के, दोनों कैसे समझें? उनको अगल-बगल रखते हैं तो कुछ सूझता नहीं।
पहला वक्तव्य है, "स्त्री ईश्वर की उत्कृष्टतम कृति है।" और दूसरा वक्तव्य है, "पत्नियाँ टाँग नहीं तोड़तीं, वे तुम्हारी आत्मा ही तोड़ देती हैं।"
(मुस्कुराते हुए) क्या बात है!

प्रश्नकर्ता: नमन आचार्य श्री, मैं शादी करने जा रहा हूँ। मगर मैं समझ रहा हूँ कि ये अच्छा नहीं हो रहा। मगर दूसरी तरफ़ मुझसे ये अकेलेपन से भरी हुई ज़िंदगी बर्दाश्त नहीं होती। कृपया मार्ग दिखाएँ।
आचार्य प्रशांत: अब तो मंज़िल ही मिल गई, मार्ग क्या दिखाऊँ?

प्रश्नकर्ता: औरतों का हर जगह शोषण क्यों होता है?
आचार्य प्रशांत: क्या इरादा है? अकारण तो नहीं पूछा ये सवाल। देखो बेटा, मेरे लिए बड़ा आसान होगा कि मैं कह दूँ, जैसे आमतौर पर कहा जाता है, समसामयिक नारी विमर्श में, नारीवादियों द्वारा कि ये सब इसलिए है क्योंकि पुरुषसत्ता…

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, मैम ने बंधनों की बात की तो मैं भी वैसा महसूस करती हूँ। मुझे ऐसा लगता है कि बंधन कुछ उम्र तक ही होता है। पर जब इनको देखा कि यह भी बंधनों में हैं तो मुझे अच्छा महसूस नहीं हुआ यह जानकार। परिवार वालों की…

प्रश्न: आचार्य जी, एक रिश्ता है जो सामाजिक बंधन के कारण बन गया है, विवाह का। और एक दूसरा रिश्ता है, जिसमें कोई सामाजिक बंधन नहीं है। क्या सामाजिक बंधन वाले रिश्ते को तोड़ना देना चाहिए, भले ही वो कितना ही मुश्किल हो? या उस रिश्ते को, जिसमें कोई सामाजिक…

वक्ता: प्रेम क्या है और उसका शादी से क्या सम्बन्ध है?
सुनने में ये दोनों एक ही संवर्ग के शब्द लगते हैं, प्रेम और विवाह । और एक शब्द तो प्रेमविवाह भी होता है । पर वास्तव में इनमें कोई विशेष रिश्ता-नाता है नहीं । बिलकुल भी नहीं है ।…



Questioner(Q): What is the process of clarity? Is it just listening with immersion and no resistance? What is Truth? How we decide it?
Acharya Prashant (AP): Listening without effort, plus if there is Truth in what you hear, there is change and transformation, and that Truth becomes the master. We…




पृथ्वी को बचाने के लिए यूनाइटेड नेशंस की सीओपी ने यह शर्त रखी थी कि 2030 तक वैश्विक तापमान 1.5 डिग्री से अधिक नहीं बढ़ना चाहिए। हमने वह सीमा 2025 में ही लांघ दी है। यह आने वाले बहुत-बहुत बड़े विनाश का संकेत है। आदमी के इतिहास में इससे ख़तरनाक पल कभी नहीं आया। उस ख़तरे को चुनौती देने के लिए ही यह "ऑपरेशन 2030" है, जिसका उद्देश्य है कि आम आदमी में चेतना जगाई जाए — “देखो, तुम्हारा ग्रह विनाश की ओर कितनी तेज़ी से बढ़ रहा है। तुम अपने बच्चों के लिए एक ऐसा ग्रह छोड़कर जा रहे हो, जहाँ आफ़तें ही आफ़तें होंगी।”






हम कहते हैं कि अब कुछ नया करते हैं, फ़ूड योगा , मूड योगा * । कोई ऐसा शब्द नहीं है जो अब * योगा के साथ नहीं जोड़ दिया गया है। नई-नई क्रियाएँ निकल रही हैं, नई-नई प्रक्रियाएँ निकल रही हैं। ये मुद्रा, ये आसान, ये करते हैं, वो


प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, हम लोग कुछ भी करने बैठें, जैसे पढ़ने बैठें, योग करें, मैडिटेशन करें, यहाँ तक कि जब मैं आपसे ये सवाल भी पूछ रहा हूँ तो ये सवाल पूछते हुए भी मेरे दिमाग में कुछ और चल रहा है। तो प्रश्न ये है कि मन को नियन्त्रित…

प्रश्नकर्ता: पिछली बार चंडीगढ़ तरफ़ से आया था जी, आपसे जुड़ा था। तब मैं अकेला आया था, बिलकुल हताश, परेशान था। आज मेरी साथ श्रीमती जी भी आई हैं। मेरा प्रश्न यह है जी, जैसे संतों ने कहा है—
"प्रेम-गली अति सांकरी, तामे दो न समाहिं। जब मैं था तब…



प्रश्नकर्ता: अभी आप कह रहे थे कि श्रीकृष्ण अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं और बाकी सब लोग अपने बारे में बोले जा रहे हैं। तो क्या इसका सम्बन्ध इससे है कि श्रीकृष्ण का कर्मफल और प्रारब्ध कट चुका है लेकिन बाकी सभी का कर्मफल और प्रारब्ध अभी जारी

कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः।
धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत ॥४०॥
"कुल के नाश से, चले आ रहे कुल के धर्म नष्ट हो जाते हैं और कुलधर्म के नष्ट होने से पाप समस्त कुल को दबा लेता है।"

आचार्य प्रशांत: श्रीकृष्ण की निकटता सीखनी है अर्जुन से; अर्जुन के भीतर का कोहरा उधार नहीं ले लेना है। और हमारी हालत ज़बरदस्त है, हमारे पास वो सब कुछ है जो अर्जुन के पास है, बस एक चीज़ नहीं है। हम हर मायने में अर्जुन हैं, अर्जुन का पूरा नर्क
अध्यात्म की रोशनी जीवन के हर क्षेत्र पर पड़ती है, तो राजनीति पर भी पड़ेगी ही पड़ेगी। ऐसा कुछ नहीं है कि आध्यात्मिक आदमी राजनीति के प्रति अंधा हो जाता है। बल्कि हक़ीक़त तो यह है कि राजनीति को आध्यात्मिक लोगों की बहुत सख़्त ज़रूरत है, क्योंकि राजनेता ताक़त की ऐसी गद्दियों पर बैठते हैं, जहाँ से वो आपके जीवन को बहुत तरीके से प्रभावित करते हैं। राजनेता अगर आध्यात्मिक नहीं है, तो देश रसातल में जाएगा। राजनीति त्यागनी नहीं है, सही राजनीति करनी है।https://acharyaprashant.org/en/articles/raajneeti-mein-adhyatm-kyon-zaroori-1_795988a15
This article is related to restlessness.
कृष्ण का खुद ऊँचा होना, कृष्ण के पूरे जीवनवृत्त में, उनकी ज़िंदगी की जो पूरी कहानी है उसमें और श्री कृष्ण की प्रेमकथा में एक सूत्र है जो साझा पिरोया हुआ है। गीता की ऊँचाई, कृष्ण के जीवन की ऊँचाई, और कृष्ण के प्रेम की ऊँचाई तीनों एक हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि कृष्ण बहुत ऊँचे हों और उनका प्रेम निचले तल का हो जाए। ये संभव नहीं है।
प्रश्नकर्ता: कृष्ण अध्याय नौ में बताते हैं कि वे सब भूतों में समभाव से व्यक्त हैं, वहीं अध्याय दस में बताते हैं कि जो कुछ भी विभूतियुक्त, कांतियुक्त और शक्ति युक्त है, वो कृष्ण की अभिव्यक्ति है। अध्याय नौ में कृष्ण कहते हैं कि ऋग्वेद, सामवेद, अथर्ववेद मैं ही हूँ…
या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी। यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुने:।।
जो सब जीवों के लिए रात्रि है, वह आत्मसंयमी के जागने का समय है और जो समस्त जीवों के जागने का समय है, वह आत्मनिरीक्षक मुनि के लिए रात्रि है।
—श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय २, श्लोक ६९
प्रश्नकर्ता: जब…
प्रश्नकर्ता: नमस्कार, सर। आज का सबसे पहला प्रश्न जो है वह सनातन के ऊपर है कि सनातन माने क्या? और ऐसा क्या है जिसको वास्तविक रूप में सनातन कहा जा सकता है?
आचार्य प्रशांत: देखिए, सनातन का अर्थ होता है वो जो काल की सीमाओं से के बाहर का हो।…
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, अर्जुन कहते हैं कृष्ण से कि ‘धृतराष्ट्र पुत्र चाहे मुझे मार भी दें तो भी उनसे लड़ना तो ग़लत ही है।‘ हमारे आम जीवन में भी ऐसे ही चलता रहता है कि हम इमोशनल ब्लैकमेल (भावनाओं से किसी को नियंत्रित करना) करते हैं बहुत बार, या…
प्रश्नकर्ता: कुछ दिन पहले आपने एक उदाहरण दिया था, एम एच ३७० का, कि हम जो खोज रहे हैं वो हमें कहीं मिल नहीं रहा इसलिए यूनिवर्स (ब्रह्माण्ड) इतना बड़ा है कि लगातार हम खोजते जा रहे हैं। तो स्पेस (स्थान) की तो बात उससे समझ में आ रही है।…
~ श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय १, अर्जुन विषाद योग, श्लोक ४०
आचार्य प्रशांत तो अर्जुन के…