वक्ता: प्रेम क्या है और उसका शादी से क्या सम्बन्ध है?
सुनने में ये दोनों एक ही संवर्ग के शब्द लगते हैं, प्रेम और विवाह । और एक शब्द तो प्रेमविवाह भी होता है । पर वास्तव में इनमें कोई विशेष रिश्ता-नाता है नहीं । बिलकुल भी नहीं है ।
सबसे निचले तल का जो प्रेम होता है, वो आकर्षण भर होता है- सिर्फ एक आकर्षण । और वो ये भी ज़रूरी नहीं है कि ये किन्हीं दो व्यक्तियों के बीच में हो । वो व्यक्ति और वस्तु के बीच में भी हो सकता है और वस्तु और वस्तु के बीच में भी हो सकता है । तुम खिंचे चले जाते हो एक नए मोबाइल की तरफ । एक नया मोबाइल लॉन्च हुआ है बाज़ार में और तुम खिंच गए उसकी तरफ, या कि लोहा खिंच गया चुम्बक की तरफ । वस्तु और वस्तु, व्यक्ति और वस्तु ।
ये सबसे निचले तल का प्रेम है । ये इतना निचला है कि इसको प्रेम कहना भी उचित नहीं होगा, पर चलो कहे देते हैं क्योंकि हम अक्सर प्रेम शब्द का प्रयोग यहाँ भी कर जाते हैं । हम कह देते हैं कि मुझे अपनी बाइक से प्यार है । वो सिर्फ एक आकर्षण है पर हम कह देते हैं कि मुझे अपनी बाइक से प्यार है । तो ये दुरूपयोग ही ही है उस शब्द का पर चलो, ठीक, तुम करते हो, कोई बात नहीं । ये सबसे निचले तल का है, इसमें कोई समझ नहीं है । तुम बिल्कुल नहीं जानते क्या हो रहा है,बिल्कुल बेहोशी है ।
उससे थोडा सा ऊपर एक दूसरा प्रेम होता है जिसमें तुम्हें झलक तो मिलती है – समझ की भी, जानने की भी, असली अपनेपन की भी । जिसमें तुम वस्तु में भी वस्तु के पार कुछ देखते हो, जिसमें तुम व्यक्ति में भी व्यक्ति के पार कुछ और देखते हो पर बस झलक मिलती है ।
जो सबसे निचले तल का प्रेम होता है वो शोषण भर होता है, कुछ तुम्हारा फायदा हो रहा होता है इसलिए आकर्षण है । बाइक से उसी दिन तक आकर्षित हो जब तक वो अच्छी दिखती है और अच्छी चलती है । वही बाइक अभी कूड़ा बन जाए तो तुम्हें आकर्षण नहीं रहेगा । वही मोबाइल जिस दिन काम करना बंद कर देता है, जिस दिन उसकी उपयोगिता नहीं रहती है तुम उसे फेंक देते हो, बेच देते हो या दे ही देते हो किसी को । वो सबसे निचला तल था ।

