
प्रश्नकर्ता: आज सुबह के सत्र में चर्चा हुई थी भय और सम्मान के बारे में। उस चर्चा में कुछ लोगों का कहना था कि हम अपने अभिभावकों की बात इसलिए मानते हैं क्योंकि हमें उनसे भय है, और कुछ का कहना था कि हम उनकी बात इसलिए मानते हैं क्योंकि…

अजीब सी स्थिति यह है कि एक साधारण दिखने वाली लड़की से शायद ज़्यादा मुश्किल है एक सुंदर लड़की की ज़िंदगी, क्योंकि उसके खरीददार बहुत ज़्यादा हैं और उसे बहुत कुछ मिल जाएगा। और यह जो तुमको मिल जाएगा न अपनी सुंदरता के कारण, यही नर्क है तुम्हारा। तुमको लगेगा,…

नकली चीज़ों का बाज़ार देखो, कई बार असली वस्तु से ज़्यादा गर्म होता है। और जो ख़रीदने वाले हैं वह जानते हैं कि मामला नकली है पर ख़रीदते हैं। भारत में रे-बैन के असली चश्मे कितने बिकते हैं, मुझे नहीं पता, नकली घर-घर में हैं। और ऐसा थोड़े-ही है कि…

आजकल चलती है ‘*पाउटिंग*’!
डैडी डार्लिंग यूँ थुथुन निकालेंगे – पाऊट माने थुथुन, जैसे सुअर का होता है – तो डैडी डार्लिंग यूँ निकालेंगे और कैटी डार्लिंग निकालेंगी, “ऊँ!” और कैटी डार्लिंग अभी हैं कुल डेढ़ साल की, और फिर दोनों थुथुन से थुथुन मिलाएँगे।
और कांटेस्ट (प्रतिस्पर्धा) होगा! “*हू

कहते हैं, “हमारे घर में बहुत खुला हुआ माहौल है। मैं तो अपने चौदह साल के लड़के के साथ बैठ कर ड्रिंक करता हूँ। बहुत लिबरल माहौल है हमारे घर का।“
ये लिबरल माहौल है या नरक का माहौल है? नरक और कौन-सी जगह होती है? वही तो जहाँ बाप…

जो आप अपने साथ ज़िन्दगी में घटिया-से-घटिया काम कर सकते हैं वो ये है कि आप अपने शारीरिक सौंदर्य की रोटी खाना शुरू कर दें। “लड़की बहुत सुंदर है, इसको तो बहुत अच्छा लड़का मिला है। बड़े डॉक्टर ने इसको पसंद किया है।“ अगर इस वजह से पसंद किया है…

कार खरीद कर और फर्नीचर खरीद कर ज़िंदगी नहीं बन जाती है। सुख के नाम पर क्या है? एक गाड़ी है, एक ईएमआई पर घर खरीद लिया है, एक घर पहले से था, फिर बीवी है जो बुढ़ा रही है, दो बच्चे हैं जो खून पीने को तैयार हो रहे…

यह लाज की, धिक्कार की बात है कि एक छोटे से सुख से ही खरीद लिया गया। अगर मैं छोटा आदमी होऊँगा ज़रूर जो इस छोटे से सुख से बिलकुल लार टपका दी मैंने। सवाल पूछते हैं फिर अपने-आप से कि, “तू इतना गिर गया? इतनी बड़ी चीज़ हो गई…

ना किसी के पैसे के प्रदर्शन के आगे दबो-झुको, ना किसी के ताक़त के प्रदर्शन के आगे दबो-झुको, और किसी की अंग्रेजियत के आगे तो बिलकुल दबना-झुकना नहीं है। और किसी के सौंदर्य के आगे भी दबना-झुकना नहीं है कि सुंदर लड़की आ गयी कि हैंडसम लड़का आ गया और…

सोचो तुम किसी शॉपिंग-मॉल में हो और वहाँ कबीर साहब का भजन बजने लग जाए; बिक्री आधी रह जाएगी बता रहा हूँ। इसलिए बाज़ार का अध्यात्म से छत्तीस का आँकड़ा है। बाज़ार कभी नहीं चाहेगा कि अध्यात्म सफल हो और बाज़ार हर तरह की साज़िशें करेगा अध्यात्म को गिराने की।…

वो कहानी याद है न कि दस जने उतरे हैं पीये हुए, किससे? एक नाव से उतरे हैं, ठीक है? अब वो गिनना चाहते हैं कि कोई एक रास्ते में टपक तो नहीं गया था नदी में। तो वो सब गिनना शुरू करते हैं, तो गिन रहे हैं कि भैया…

देखते नहीं हो बहुत सारी जो एडल्ट ड्रेसेस (बड़ों के कपड़े) होती हैं, वो बिलकुल वैसी ही होती हैं जैसे एक साल, दो साल के बच्चों के झबले। एक साल, दो साल के बच्चों के कपड़े देखे हैं कैसे होते हैं? बहुत सारी एडल्ट ड्रेसेस बिलकुल वैसी ही होती हैं।…

तुलना तो तुम्हें करनी ही है; इनसे क्या तुलना कर रहे हो, अपने दफ़्तर के लोगों से तुलना करते हो, वो सब तुम्हारे ही जैसे हैं।
ये क्या तुलना कर रहे हो कि, “मेरे पास आल्टो है, दूसरे के पास डिज़ायर है”, कि, “मेरे पास डिज़ायर है और दूसरे के…

आप एनडीटीवी पर चले जाइए, आप रैडिफ़ पर चले जाइए – मैं इनकी वेबसाइट की बात कर रहा हूँ। स्क्रोल करेंगे तो ४ खबरें होंगी और ४ खबरों के बाद कुछ नहीं होगा सिर्फ़ नंगी स्त्री देह की नुमाइश होगी। स्त्री देह का ऑब्जेक्टिफिकेशन (वस्तुकरण) लिबरल मीडिया (उदारवादी मीडिया) से…

कोई गर्मी का मौसम हो, तुम शरीर खुला रखो, बात समझ में आती है। तुम कहीं नदी में, स्विमिंग पूल (तरण ताल) में नहाने जा रहे हो, तुम कपड़े उतार दो, बात समझ में आती है। या तुम सिर्फ़ अपनी सुविधा के लिए कम कपड़े पहनो तो भी बात समझ…

इज़रायल की टीनएज (किशोर) लड़कियाँ फ़ौज में जाती हैं, और शहीद हो चुकी हैं।
और मेरे देश की लड़कियाँ क्या कर रही हैं? वह टिक-टॉक पर और इंस्टाग्राम पर कूल्हे मटका रही हैं।
किसी ने मुझे तस्वीर भेजी जिसमें इज़राइल की बच्चियाँ खड़ी हुई हैं, उनके कंधों पर बंदूकें हैं

विवाह के दिन हर लड़का, चाहे वह कितना भी बड़ा... (मूर्ख हो), घोड़ी पर तो चढ़ लेता है न? नहीं तो ऐसे तो उसको टट्टू भी अनुमति ना दे। टट्टू भी बोलेगा, “मैं तुझ पर चढूँ वो ज़्यादा शोभा देगा!” विवाह के दिन, एक-से-एक मूर्खानंद घोड़ी चढ़ने को पा जाते…

तुम्हें लगता है, “वाह! मज़ा आ गया। लाइन दे दी उसने।“
अरे! तुझे लाइन नहीं दे दी है। सेंटेंस लिख दिया है, मृत्युदंड!
जब किसी को मृत्युदंड दिया जाता है जानते हो क्या लिखता है जज? “टू बी हैंगड टिल डेथ!"

बहुत सारी लड़कियों को शादी का आकर्षण इसलिए रहता है कि, ‘उसके बाद किसी की आमदनी मेरी हो जाएगी। पति घर लाएगा और मेरे हाथ मैं तनख़्वाह रख देगा।‘ क्षमा माँगते हुए कह रहा हूँ, ये वैश्यावृति है।
बड़ी साधारण योग्यता की कोई लड़की अगर पा जाए कोई ऊँचे पद…

ये लाज की, धिक्कार की बात है कि छोटे से सुख से ही खरीद लिया गया। अगर मैं छोटा आदमी होऊँगा ज़रूर, जो छोटे से सुख से बिलकुल लार टपका दी मैंने। फिर सवाल पूछते हैं अपने-आप से कि, “तू इतना गिर गया, इतनी बड़ी चीज़ हो गई तेरे लिए…

दुनिया के सामने इंसान की तरह खड़े होना सीखो भाई! केचुए की तरह थोड़े ही है कि किसी भी के भी पाँव के नीचे आ गए। इस चेहरे पर तेज होना चाहिए, ऑंखों में ताक़त झलकनी चाहिए! कुछ बोलो तो उसमें साहस हो और संकल्प हो! आवाज़ काँपे नहीं, थरथराए…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, कभी मैं हीनभावना से ग्रस्त होता हूँ और कभी श्रेष्ठता की भावना से, पर सहज नहीं रह पाता। कृपया मार्गदर्शन प्रदान करने की कृपा करें।
आचार्य प्रशांत: बात इसकी नहीं है कि हीनभावना से ग्रस्त हो या बड़प्पन का बहुत अहंकार आ गया है, बात ये है…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जैसा कि आपने बताया कि विचार करो और विरोध करो। जो कुछ भी चेतना के तल पर नीचा है उसका विरोध करो लेकिन विरोध करने पर भी, जैसे सौ बार विरोध करना है तो उसमें जब नब्बे बार हार मिलने लगती है तो फिर इक्यानवे बार कोशिश…

प्रश्नकर्ता: मुझ से अतीत में अज्ञानवश कुछ ऐसे कर्म हुए हैं जो आज मुझे गलत लगते हैं व ग्लानि देते हैं। सकाम कर्म नहीं हुआ है इंडिरेक्टली (परोक्ष रूप से) हुआ है। मुझे इस ग्लानि से कैसे मुक्ति मिले? वो ग्लानि झूठ है ये तो अज्ञानी मन नहीं मानता। वो…

प्रश्नकर्ता: हीन भावना से कैसे बचें?
आचार्य प्रशांत: क्या नाम है आपका?
प्र: उज्ज्वल
आचार्य: क्या करते हो?

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, ग्लानि भाव को कैसे दूर करें?
आचार्य प्रशांत: “साइकिल बहुत तेज़ दौड़ाई, बहुत तेज़ दौड़ाई, पर सौ की गति नहीं पायी। अब बड़ी ग्लानि हो रही है कि ज़रूर मैंने ठीक से श्रम नहीं किया।”
या – “ज़रूर मेरी साइकिल में कुछ कमी थी, सौ की गति…

श्रोता: सर, जैसा कि आपने कहा कि हमारी अनिवार्य ज़रूरतें तो प्राकृतिक रूप से पूरी हो ही जाती हैं, तो मैं ये जानना चाहती हूँ कि जब हम किसी भी महानगर में प्रवेश करते हैं, तो हमें बहुत से लोग दिखाई देते हैं, जो सड़कों पर भीख मांग रहे होते…

वक्ता: सर, आपने जो कुछ भी बताया, जो कुछ भी हमने जाना, सीखा, उससे फायदा क्या हो गया? हासिल क्या हुआ? वाकई हासिल कुछ नहीं होगा, कुछ भी हासिल नहीं होगा। जो तुम्हारा शक है, वो बिल्कुल ठीक है, तुम्हें ठीक ही शक है कि कुछ हासिल नहीं होगा और…

प्रश्नकर्ता: सर, कल मेरे साथ एक दुर्घटना हुई। उसके बाद एक सुरूर-सा छा रहा है। ऐसा क्यों हो रहा है?
आचार्य प्रशांत: हम इतनी छोटी, तेजहीन और ओछी ज़िंदगी जीते हैं कि उसमें किसी भी प्रकार की असुरक्षा के लिए, ख़तरे के लिए, यहाँ तक कि विविधता तक के लिए…

वक्ता: सूरा के मैदान में, कायर फसिया आए। ना भागे ना लड़ सके, मन ही मन पछताए॥
बाकि सब ठीक है, पर ये भाग नहीं सकता, ये क्यों कह रहे हैं कबीर? ‘ना भागे ना लड़ सके’, लड़ नहीं सकता, ठीक बात है। कायर है, लड़ेगा क्या? पर वो भाग…

Questioner(Q): What is the process of clarity? Is it just listening with immersion and no resistance? What is Truth? How we decide it?
Acharya Prashant (AP): Listening without effort, plus if there is Truth in what you hear, there is change and transformation, and that Truth becomes the master. We…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, एक तरफ़़ तो फ़िल्में हमें मनोरंजन देती हैं, हँसाती हैं, रुलाती हैं और दूसरी ओर उसी इंडस्ट्री से दुःखद और चौका देने वाली खबरें भी आती रहती हैं। कुछ कहिए।


Text in the middle to test if 2nd image is considered in truncated. or not
\n\n29 अप्रैल से 1 मई, 2022 तक आयोजित हुए वेदांत महोत्सव के एक प्रतिभागी की प्रेरणास्पद कहानी\n\nमेरा नाम राकेश कुमार है। मैं कानपुर नगर से हूँ। पिछले चार माह से मैं हर…



कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मानिवर्तितुम्। कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन ॥३९॥
"तो कुल क्षय से होने वाले दोष को देख-सुन कर भी हम लोगों को इस पाप से निवृत्त होने का विचार क्यों नहीं करना चाहिए?"

यह सब अय्याशियाँ होती हैं, “मन कर रहा है, मन नहीं कर रहा है, आज दिल तन्हा सा है, उदास सा है।“ यह क्या है? मन गया भाड़ में! इधर काम रखा हुआ है, जो ज़रूरी चीज़ है वह करेंगे न, मन का क्या है!

भई! गर्मी का मौसम हो, तुम शरीर खुला रखो बात समझ में आती है। तुम कहीं नदी में, स्विमिंग पूल (तरणताल) में नहाने जा रहे हो, तुम कपड़े उतार दो, बात समझ में आती है। या तुम सिर्फ़ अपनी सुविधा के लिए कम कपड़े पहनो तो भी बात समझ में…

लड़का पच्चीस साल का, तीस साल का है और कुल एक भाई एक बहन है। अकसर माँ-बाप कार्यरत रहे थे, दोनों ही कमाते थे तो बचत है घर में। मकान अपना है। लड़का अगर पच्चीस-तीस साल का है तो माँ-बाप कितने साल के हैं?
साठ-पैंसठ।
अभी-अभी रिटायर (सेवानिवृत) हुए हैं,

दूसरे आपका हाथ मरोड़ रहे हैं, समझिए क्यों। क्योंकि आप हाथ मरोड़वाने के लिए तैयार खड़े हैं।
धोखा एक बार हो सकता है न, बार-बार हो तो इसका क्या मतलब है? कोई व्यक्ति आपके साथ एक बार दुर्व्यवहार कर गया, ठीक। बार-बार कर रहा है, क्या मतलब है इस बात…

स्त्री चूँकि गर्भ रखती है तो प्रकृति ने ही उसे शरीर के प्रति बड़ा संवेदनशील बना दिया है। वो बार-बार अपने शरीर को देखती रहती है क्योंकि उसको एक बहुत महीन काम करना है, डेलिकेट काम; उस काम में अगर ज़रा भी गड़बड़ हो गई, इंफेक्शन हो सकता है, कुछ…

ये तुम्हारी ज़िन्दगी को समझने की उम्र है। कहाँ तुम ये रिश्तेबाज़ी में फँस रही हो? उसके लिए बहुत समय पड़ा है। पहले थोड़ा मन को जान लो, जीवन को जान लो। समझ तो लो तुम्हारे भीतर वो कौन-सी वृत्ति बैठी है जो खिंची जा रही है लड़कों की ओर।…

यही जीवन जीने की कला है, मौज करो, मस्ती करो! गंभीर मत हो जाना। बिलकुल हल्के रहो, क्योंकि रखा क्या है?
आज तुम जिस बात को गंभीरता से लेते हो, कल वो तुम्हारे लिए दो पैसे की हो जाएगी। याद है, जब चौथी-पाँचवी में रिज़ल्ट आया था तो तुम कैसे…

जब सड़क पर निकलो न तो अपनी कमियाँ पता चलती हैं। जो व्यक्ति घर में ही बैठ गया वो बड़ा दम्भी, घमंडी, अहंकारी हो जाता है क्योंकि उसे अपनी कमियों का पता भी नहीं होता। अकसर गृहिणियों की अकड़ बिलकुल लाजवाब होती है। “मैं ही बेग़म हूँ, मैं ही रानी…

कभी किसी से बड़ी नफ़रत उठे तो मैं एक सूत्र बता देता हूँ – अपनी नफ़रत को और अपने अहंकार को थोड़ी देर के लिए किनारे रख कर उससे 1 घण्टे बात कर लेना, फिर नफ़रत कर नहीं पाओगे और ज़्यादा। इसलिए जिन्हें नफ़रत क़ायम रखनी होती है, पहला काम…

ऐसा तो नहीं है कि दस-बारह साल के बच्चे को अगर आप रामकृष्ण की बोध कथाएँ पढ़ाएँगे तो उसे समझ में नहीं आने वाली। आएँगी न। आपके घरों में क्यों नहीं है रामकृष्ण परमहंस की सरल साधारण कथाओं की किताब? कृष्णमूर्ति साहब का साहित्य आता है ‘*कृष्णमूर्ति फॉर द यंग*’।…

स्वामी विवेकानंद अनूठे हैं, बहुत कम तुमने साधु-संत-सन्यासी देखे होंगे जो इतने सुघटित सुडौल शरीर के हों, जितने विवेकानंद थे।
खेल की, कसरत की उनकी दिनचर्या में बंधी हुई जगह थी। और यही नहीं कि बस व्यक्तिगत रुप से खेलते थे, अपने साथियों से कहें – व्यायाम आवश्यक है।
जिस

१० साल पीछे जाना और देखना है कि उस समय मन पर कौन से मुद्दे हावी थे, याद करो! कहाँ गए वह मुद्दे? और पीछे जाओ, अब तुम १५ साल के हो, याद करो मन पर कौन से मुद्दे हावी थे, कहाँ गए मुद्दे?
कितने लोगों को दसवीं के बोर्ड…
आचार्य: इसी साल?
प्र: २०१६ में।
आचार्य: कहाँ से?
प्र: आचार्य जी, सीतापुर से
आचार्य: लखनऊ में रहते हो?
प्र: अभी तो घर पर रहते हैं,…
आचार्य प्रशांत: सबसे पहले तो हमें इस धारणा से बाहर आना होगा कि फ़िल्में हमें मात्र मनोरंजन…
भारतीयों को शायद यह लगता है कि हिंदुस्तान से बाहर जहाँ कहीं कोई मिलेगा वह ‘अंग्रेज़ी’ ही बोल रहा होगा। एक तो यह बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी है – बाहर जैसे ही हम निकलेंगे वैसे ही जो मिल रहा होगा अंग्रेज़ी ही बोल रहा होगा। हिंदुस्तान बेचारा बस पिछड़ा हुआ है,…
आचार्य प्रशांत: इसी आशय के तर्क आगे भी…
मनचलों के लिए दुनिया की…