
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, हम लोग कुछ भी करने बैठें, जैसे पढ़ने बैठें, योग करें, मैडिटेशन करें, यहाँ तक कि जब मैं आपसे ये सवाल भी पूछ रहा हूँ तो ये सवाल पूछते हुए भी मेरे दिमाग में कुछ और चल रहा है। तो प्रश्न ये है कि मन को नियन्त्रित…

ज़ेन कोआन: मोकुसेन का हाथ
मोकुसेन तांबे के घर में रहते थे। एक अनुयायी ने एक दिन मोकुसेन को अपनी पत्नी के कंजूस व्यवहार के बारे में बताया। मोकुसेन उस अनुयायी के घर गए और उसकी पत्नी को अपनी बंद मुट्ठी दिखाई।
अनुयायी की पत्नी ने आश्चर्य से पूछा, “इसका

एंटरिंग द फ़ॉरेस्ट ही मूव्स नॉट ऑन द ग्रास
एंटरिंग द वाटर ही मेक्स नॉट अ रिप्पल
~ जेनरिन कुशु



Questioner(Q): What is the process of clarity? Is it just listening with immersion and no resistance? What is Truth? How we decide it?
Acharya Prashant (AP): Listening without effort, plus if there is Truth in what you hear, there is change and transformation, and that Truth becomes the master. We…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, एक तरफ़़ तो फ़िल्में हमें मनोरंजन देती हैं, हँसाती हैं, रुलाती हैं और दूसरी ओर उसी इंडस्ट्री से दुःखद और चौका देने वाली खबरें भी आती रहती हैं। कुछ कहिए।


हम कहते हैं कि अब कुछ नया करते हैं, फ़ूड योगा , मूड योगा * । कोई ऐसा शब्द नहीं है जो अब * योगा के साथ नहीं जोड़ दिया गया है। नई-नई क्रियाएँ निकल रही हैं, नई-नई प्रक्रियाएँ निकल रही हैं। ये मुद्रा, ये आसान, ये करते हैं, वो

यह सब अय्याशियाँ होती हैं, “मन कर रहा है, मन नहीं कर रहा है, आज दिल तन्हा सा है, उदास सा है।“ यह क्या है? मन गया भाड़ में! इधर काम रखा हुआ है, जो ज़रूरी चीज़ है वह करेंगे न, मन का क्या है!

दूसरे आपका हाथ मरोड़ रहे हैं, समझिए क्यों। क्योंकि आप हाथ मरोड़वाने के लिए तैयार खड़े हैं।
धोखा एक बार हो सकता है न, बार-बार हो तो इसका क्या मतलब है? कोई व्यक्ति आपके साथ एक बार दुर्व्यवहार कर गया, ठीक। बार-बार कर रहा है, क्या मतलब है इस बात…

स्त्री चूँकि गर्भ रखती है तो प्रकृति ने ही उसे शरीर के प्रति बड़ा संवेदनशील बना दिया है। वो बार-बार अपने शरीर को देखती रहती है क्योंकि उसको एक बहुत महीन काम करना है, डेलिकेट काम; उस काम में अगर ज़रा भी गड़बड़ हो गई, इंफेक्शन हो सकता है, कुछ…

हार मोतियों का हज़ार बार भी टूटेगा तो उसे तुम हज़ार बार जोड़ोगे, बार-बार जोड़ो! सुजन अगर रूठ जाएँ, तो बार-बार मनाओ क्योंकि उनसे प्यास बुझती है।
पर जिससे प्यास बुझती ना हो, उससे बस आदतवश जुड़े हो, भ्रमवश, धारणावश जुड़े हो, इसलिए जुड़े हो कि बीस साल से जुड़े…

ये तुम्हारी ज़िन्दगी को समझने की उम्र है। कहाँ तुम ये रिश्तेबाज़ी में फँस रही हो? उसके लिए बहुत समय पड़ा है। पहले थोड़ा मन को जान लो, जीवन को जान लो। समझ तो लो तुम्हारे भीतर वो कौन-सी वृत्ति बैठी है जो खिंची जा रही है लड़कों की ओर।…

यही जीवन जीने की कला है, मौज करो, मस्ती करो! गंभीर मत हो जाना। बिलकुल हल्के रहो, क्योंकि रखा क्या है?
आज तुम जिस बात को गंभीरता से लेते हो, कल वो तुम्हारे लिए दो पैसे की हो जाएगी। याद है, जब चौथी-पाँचवी में रिज़ल्ट आया था तो तुम कैसे
वक्ता: यही जीवन जीने का तरीका है। एक कविता है, बड़ी खूबसूरत है, जो बिलकुल ऐसे ही है कि किसी के कमरे में प्रवेश करना हो और चाहे किसी के…
आचार्य प्रशांत: सबसे पहले तो हमें इस धारणा से बाहर आना होगा कि फ़िल्में हमें मात्र मनोरंजन…
श्रद्धावान् लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेन्द्रिय: | ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति || ४, ३९ || जितेन्द्रिय, साधनापरायण और श्रद्धावान मनुष्य ज्ञान को प्राप्त होता है तथा ज्ञान को प्राप्त होकर वह बिना विलम्ब के तत्काल ही भगवत्प्राप्तिरूप शान्ति को प्राप्त हो जाता है। —श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय ४, श्लोक ३९प्रश्नकर्ता: आचार्य जी,…
मनचलों के लिए दुनिया की…

बहुत सारा मेडिटेशन वगैरह वही है जो आपको झटका नहीं खाने देगा। ज़िन्दगी बर्बाद चल रही है, सबकुछ आपका ग़लत है, लेकिन सुधरने की कोई ज़रूरत नहीं। आधे-एक घण्टे बैठ करके गाइडेड मेडिटेशन कर लो, वहाँ तुमको गुरुजी कान में बता देंगे कि तुम एक सरोवर के किनारे बैठे हो,…

जब सड़क पर निकलो न तो अपनी कमियाँ पता चलती हैं। जो व्यक्ति घर में ही बैठ गया वो बड़ा दम्भी, घमंडी, अहंकारी हो जाता है क्योंकि उसे अपनी कमियों का पता भी नहीं होता। अकसर गृहिणियों की अकड़ बिलकुल लाजवाब होती है। “मैं ही बेग़म हूँ, मैं ही रानी…

हिंदुस्तान में अभी भी दो जगह हैं जहाँ पर लडकियाँ बहुत कम पायी जाती हैं – लड़कियाँ, स्त्रियाँ सब – एक, श्मशान घाट, दूसरा, सत्संग। दोनों ही जगहों पर सच दिख जाता है न, और दोनों ही जगहों पर देह की नश्वरता दिख जाती है न। समाज नहीं चाहता है…

कभी किसी से बड़ी नफ़रत उठे तो मैं एक सूत्र बता देता हूँ – अपनी नफ़रत को और अपने अहंकार को थोड़ी देर के लिए किनारे रख कर उससे 1 घण्टे बात कर लेना, फिर नफ़रत कर नहीं पाओगे और ज़्यादा। इसलिए जिन्हें नफ़रत क़ायम रखनी होती है, पहला काम…

१० साल पीछे जाना और देखना है कि उस समय मन पर कौन से मुद्दे हावी थे, याद करो! कहाँ गए वह मुद्दे? और पीछे जाओ, अब तुम १५ साल के हो, याद करो मन पर कौन से मुद्दे हावी थे, कहाँ गए मुद्दे?
कितने लोगों को दसवीं के बोर्ड…

बताओ प्रतियोगी परीक्षा क्यों दे रहे हो? अगर तुम्हें साफ़-साफ़ पता हो कि तुम क्यों दे रहे हो परीक्षा तो ऐसा कैसे होगा कि तुम फिर उसमें मेहनत नहीं करोगे? या तो मेहनत करोगे पूरी या फिर परीक्षा छोड़ ही दोगे। पर तुम ये कभी पता ही करने की कोशिश…

पढ़ाई में मन नहीं लगता क्योंकि वो पढ़ाई शायद तुम्हारे लिए है ही नहीं। वो पढ़ाई तुम कर ही रहे हो उनके दबाव में जो तुमको एक तरह से स्पॉन्सर कर रहे हैं कि ‘तू घर बैठ, तुझे रोटी-पानी की फ़िक्र करने की अभी कोई ज़रूरत नहीं साल-दो-साल, तू बैठ…

वो कहानी याद है न कि दस जने उतरे हैं पीये हुए, किससे? एक नाव से उतरे हैं, ठीक है? अब वो गिनना चाहते हैं कि कोई एक रास्ते में टपक तो नहीं गया था नदी में। तो वो सब गिनना शुरू करते हैं, तो गिन रहे हैं कि भैया…

तुम ग़लत राहों को ठुकरा कर तो देखो, सही राह खुलती है कि नहीं खुलती। और यह घटिया और झूठा तर्क बिलकुल मत दे दो कि, “मुझे सही राह मिली नहीं मैं इसलिए ग़लत राह चल पड़ा।“ बात यह नहीं है, सही राह हमेशा खुली होती है और उपलब्ध होती…

किसी ने आपसे पूछा, “अरे! तुमने मुझे पाँच दिन से फ़ोन नहीं किया, तुम्हें मेरी याद नहीं आयी?” आप कहते हैं, “अगर मैं इसको सच बता दूँ तो इस बेचारे के दिल को चोट लगेगी, ये दुख जाएगा।“ तो आप कहते हैं, “नहीं याद तो बहुत आयी, वो नेटवर्क नहीं…

तुम मुझे एक आदमी दिखा दो जो इन दोनों कामों के अलावा कोई तीसरा काम करता हो। आम व्यक्ति का सारा जीवन इन्हीं दो कामों में जा रहा है कि नहीं? पहला, ठूसना – और मैं सिर्फ़ मुँह से ठूसने की बात नहीं कर रहा, जेब में ठूसना, आँख में…

कि सुंदर लड़की आ गई या हैंडसम लड़का आ गया और तुम बिलकुल कँपने लग गए, हिलने-डुलने लग गए। जो तुम्हें अपना शरीर दिखा करके प्रभावित करना चाहे, तुम पर हावी होना चाहे, उसका प्रतिरोध आवश्यक है। कोई साधारण तौर पर सुंदर हो और तुम्हारे सामने आ जाए, उसकी तो…

देखते नहीं हो बहुत सारी जो एडल्ट ड्रेसेस (बड़ों के कपड़े) होती हैं, वो बिलकुल वैसी ही होती हैं जैसे एक साल, दो साल के बच्चों के झबले। एक साल, दो साल के बच्चों के कपड़े देखे हैं कैसे होते हैं? बहुत सारी एडल्ट ड्रेसेस बिलकुल वैसी ही होती हैं।…

जब शरीर का कोई हिस्सा बड़ी माँग करने लगे किसी भी तरीके से, पेट माँग करता है कि, ‘मुझे भोजन दो’, कहीं दर्द हो गया तो वो जगह माँग करती है कि, ‘मुझे आराम दो, दवा दो।‘
कामोत्तेजना चढ़ने लगी तो जननांग माँग करते हैं कि, ‘हमपर ध्यान दो’, तो…

अगर कोई महिला ठीक-ठाक भी होती है तो उसको बिगाड़ने का काम उसका प्रेमी या उसका पति कर देता है। देखिए, महिला को सम्मान मिलना चाहिए उसके ज्ञान से, उसके गुणों से, उसकी आंतरिक शक्ति से। लेकिन आप जब उस महिला को महत्व देना शुरू कर देते हो इस वजह…

कोई गर्मी का मौसम हो, तुम शरीर खुला रखो, बात समझ में आती है। तुम कहीं नदी में, स्विमिंग पूल (तरण ताल) में नहाने जा रहे हो, तुम कपड़े उतार दो, बात समझ में आती है। या तुम सिर्फ़ अपनी सुविधा के लिए कम कपड़े पहनो तो भी बात समझ…

दुनिया अगर ताक़त की भाषा समझती है तो ताक़त अर्जित करो। दुनिया अगर पैसे की बात सुनती है तो पैसा होना चाहिए तुम्हारे पास। हाँ, शर्त बस एक है कि तुम्हारी बात सदा सच्ची रहे। यह ना हो कि पैसा आ गया तो बात में झूठ आ गया।
जितना तुम्हारी…

ये मेडिटेशन चीज़ क्या है? मैं बताता हूँ यह चीज़ क्या है, यह फ़र्ज़ी चीज़ है, यह फ़रेब है, यह आत्म-प्रवंचना है, ख़ुद को धोखा है। यह जीवन के आमूलचूल बदलाव का तरीका नहीं है, यह कुछ समय का आध्यात्मिक मनोरंजन है। यह आपको आपकी गंदी दिनचर्या के तनाव से…

सेक्स अगर तुम्हें शांत कर सकता होता, दो बार, चार बार में कर गया होता न? यहाँ तो लोग अपने जीवन काल में हज़ारों बार कर जाते हैं और उसके बाद भी लालायित रहते हैं, प्यास ही नहीं बुझती।
अधेड़ हो गए, साठ के हो गए, अस्सी के हो गए,…

मैं जितने भी कपटी लोगों से मिलता हूँ, उनकी धूर्तता की कोई सीमा नहीं। उनका दिमाग चल रहा है। वो महत्वकांक्षी हैं। वो कुछ भी कर दिखाने को तैयार हैं। उनमें ऊर्जा पूरी है, वो दुनिया पर छा जाने के लिए हौसला रख रहे हैं। उनका आत्मविश्वास देखो!
और मैं…

जिसी स्त्री के नितंब बड़े हों, स्तन बड़े हों, चर्बी खूब हो कोमल-कोमल, तुम्हारी भाषा में, वो पुरुष को तत्काल पसंद आ जाती है। उसमें सुंदरता की कोई बात नहीं है; उसमें प्राकृतिक व्यवस्था है गर्भाधान की। वह प्राकृतिक व्यवस्था है कि पुरुष की आँखें ढूँढ़ती ही ऐसी स्त्री को…

"हम इतना प्यार करते हैं उधर से कुछ आता नहीं।" जब यह प्रश्न उठे तो अपने-आप से पूछिए कि, "मैं माँग क्या रही हूँ?"
'आई हियर बाय रिक्वेस्ट यू टू लव मी' (मैं तुमसे मुझे प्रेम करने की प्रार्थना करती हूँ)
"महोदय, सविनय निवेदन है कि कृपया थोड़ा…

डिप्रेशन तब तक नहीं हो सकता जब तक अपने-आप को बहुत मजबूर अनुभव ना करो । और मजबूर हम नहीं होते, मजबूर हमें हमारी अंधी कामनाएँ बनाती हैं। अन्यथा कोई मजबूर नहीं है। कामनाओं में भी कोई दिक़्क़त नहीं है, अगर वो अंधी ना हों। कुछ ऐसा माँग रहे हो…

जो लोग दस दरवाज़ों पर खटखटा रहे होते हैं न उन बेचारों की त्रासदी यही होती है, वह ऐसे होते हैं जैसे कि कोई दस जगह गड्ढा खोदे।
यह ग्रंथों का अपमान है कि उनको एक बार पढ़ कर के किनारे रख दो। “मैंने गीता पढ़ ली!” कि, “मैंने बाइबल…

पुरुषों ने खूब बहती गंगा में हाथ धोए हैं। स्त्री वैसे ही आतुर रहती है कि कोई ज़रा तारीफ़ कर दे, तो उन्होंने कहा “इसको फँसाने का तो बढ़िया तरीका है, ज़रा-सी तारीफ़ कर दो।”
एक बात बताना, तुमने आज तक कितनी शायरी, कितनी कविताएँ, ग़ज़लें, नग़में पढ़ीं जिसमें स्त्री…

तुम्हें क्या लगता है नर्क वो जगह है जहाँ बड़े-बड़े कड़ाहों में तेल उबल रहा है और लोग उसमें पकौड़ो की तरह तले जा रहे हैं? ना! नर्क वो जगह है जहाँ सब खूब मेहनत करते हैं, कमाते हैं, खाते हैं और सो जाते हैं। नर्क बड़ी साफ़-सुथरी जगह है…

सिकंदर दुनिया में सिर्फ़ एक ही है असली; कौन? जो घड़ी को हरा दे। वरना बहुत बड़े-बड़े बादशाह हो गए, सब से जीत लेते हैं, किससे हार जाते हैं? घड़ी से; घड़ी से जीत कर दिखाओ तो बात है! समझ में आ रही बात?
वो टिक-टिक लगातार याद रहे। कलाई…

जब भी कभी मन में यह प्रश्न आए, “क्या करूँ?” – कोई भी मुद्दा, कोई भी किस्सा हो सकता है, उस किस्से के अंत में अगर प्रश्न है कि, “क्या करूँ?” तो क्या करना है? यह सब अच्छे से समझ लीजिए, जो कर रहे हैं उस पर ग़ौर करना है;…

एवं देहद्वयादन्य आत्मा पुरुष ईश्वरः। सर्वात्मा सर्वरूपश्चसर्वातीतोऽहमव्ययः।।
इस प्रकार आत्मा पुरुष या ईश्वर स्थूल एवं सूक्ष्म दोनों प्रकार के शरीरों से भिन्न है। अतः मैं सर्वात्मा, सर्वरूप, अविनाशी और सबसे परे हूँ।
~ अपरोक्षानुभूति (श्लोक ४०)
आचार्य प्रशांत: (प्रश्न पढ़ते हुए) शंकराचार्य के श्लोक को उद्धृत किया है, “आत्मा स्थूल…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपने जैसे कहा था कि “जब कोई पैदा होता है, तो वो वृत्तियों और विकारों के साथ पैदा होता है।” तो छोटे बच्चे इतने खुश क्यों मालूम पड़ते हैं?
आचार्य प्रशांत: जिनके पास बच्चे हों, उनसे पूछो ज़रा!
ये सवाल कोई छड़ा (कुँवारा) ही पूछ सकता है,…

आचार्य प्रशांत: (प्रश्न पढ़ते हुए) मूलतः बात ये पूछी है कि “आत्मा को कहा तो निर्गुण जाता है, और निर्गुण का अर्थ हुआ कि कोई एट्रिब्यूट (गुण) नहीं, कोई उपमा-उपाधि नहीं। तो फिर आत्मा को निर्गुण के साथ ही निर्विकार, निर्मल, निराकार, अविनाशी, नित्य, शुद्ध, अजर-अमर इत्यादि क्यों कहा जाता…

हरि है खांड रेत मांहि बिखरी, हाथी चुनी न जाई। कहैं कबीर गुरु भली बुझाई, चींटी होय के खाई।। ~ संत कबीर
आचार्य प्रशांत: (प्रश्न पढ़ते हुए) कबीर साहब का एक श्लोक भेजा है, कह रहे हैं कि इसका अर्थ बताएँ। और कहते हैं कि “इन्होंने भी नित्य और अनित्य…

लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः। छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः।।
जिनके सब पाप नष्ट हो गए हैं, जिनके सब संशय ज्ञान के द्वारा निवृत्त हो गए हैं, जो सम्पूर्ण प्राणियों के हित में रत हैं और जिनका जीता हुआ मन निश्चलभाव से परमात्मा में स्थित है, वे ब्रह्मवेत्ता पुरुष शांत मन को प्राप्त…

इहैव तैर्जितः सर्गो येषां साम्ये स्थितं मनः। निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद्ब्रह्मणि ते स्थिताः।।
जिनका मन समभाव में स्थित है, उनके द्वारा उस जीवित अवस्था में ही सम्पूर्ण संसार जीत लिया गया है, क्योंकि सच्चिदानंदघन परमात्मा निर्दोष और सम है, इससे वे सच्चिदानंदघन परमात्मा में ही स्थित हैं।
—श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय…

प्रश्नकर्ता: बोध क्या है? अबोध कौन है और आत्मबोध कब प्राप्त होता है?
आचार्य प्रशान्त: भाषा की मजबूरी यह है कि उसे वो सब भी कहना पड़ जाता है जो कहा नहीं जा सकता और जिसे कहने की चेष्टा भी नहीं करनी चाहिए। उसमें खूबसूरती तो है पर ख़तरा भी…