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Saint Kabir

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Saint Kabir
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Every Caste Debate Misses the Real Question
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Every Caste Debate Misses the Real Question
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The UGC regulations are only a spark. The explosive material is something far more intimate: the unexamined conviction, lodged in the deepest chamber of the collective psyche, that birth determines worth and that this determination carries divine sanction. The atmosphere itself is the disease; the regulation is at best a painkiller. India’s foundational scriptures contain the strongest possible arguments against caste. The Upanishadic view begins where hierarchy ends.

अहंकार का विलोप ही शिवत्व: आचार्य प्रशांत
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अहंकार का विलोप ही शिवत्व: आचार्य प्रशांत
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ग्रेटर नोएडा। जीबीयू में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे आचार्य प्रशांत ने कहा कि महाशिवरात्रि केवल अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि यह मनुष्य को अपने भीतर झांकने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि शिव को केवल मूर्ति या रूप में सीमित कर देना उनकी व्यापकता को संकुचित करना…

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Saint Kabir
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Excerpts from Articles
आंसू अगर सच्चे हैं तो भीतर आनंद ही आनंद है
अगर आँसू सच्चे हैं तो उनका संबंध उत्सव और आनंद से है, उनका संबंध जाते हुए दुःख से है। आँसुओं के अर्थ ये नहीं है कि तुम दुखी हो, आँसुओं का अर्थ भी हो सकता है कि तुम आनंदित हो। मुक्त अनुभव कर रहे हो, भीतर की जकड़ को छोड़ने के लिए।
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राधा-कृष्ण में भी तो प्रेम था, तो आप हमारे प्रेम को सम्मान क्यों नहीं देते?
कृष्ण का खुद ऊँचा होना, कृष्ण के पूरे जीवनवृत्त में, उनकी ज़िंदगी की जो पूरी कहानी है उसमें और श्री कृष्ण की प्रेमकथा में एक सूत्र है जो साझा पिरोया हुआ है। गीता की ऊँचाई, कृष्ण के जीवन की ऊँचाई, और कृष्ण के प्रेम की ऊँचाई तीनों एक हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि कृष्ण बहुत ऊँचे हों और उनका प्रेम निचले तल का हो जाए। ये संभव नहीं है।
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लोकमत न्यूज़ – "स्वतंत्रता दिवस: वास्तविक स्वतंत्रता क्या है
\"स्वतंत्रता कोई उपहार नहीं, बल्कि एक उपलब्धि है जिसे प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं अर्जित करना पड़ता है। राजनीतिक स्वतंत्रता हमें विरासत में मिल सकती है, किंतु मानसिक और आध्यात्मिक स्वतंत्रता के लिए सतत प्रयास
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Who controls your mood?
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जीवन-मरण का ये चक्र चल क्यों रहा है? || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2021)
जन्म-मरण का चक्र क्यों है? इसका अर्थ यही नहीं है कि शिष्य बस इतना ही पूछना चाहता है कि कोई जन्मता क्यों है, कोई मरता क्यों है, चक्र क्यों चल रहा है। वो वास्तव में सबकुछ पूछ रहा है, सबकुछ। अब ये पढ़ने वाले की बुद्धि पर है कि वो इस बात को समझ जाए कि इतना ही नहीं पूछा गया है कि जन्म-मरण का चक्र क्यों है।
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Why do I restless
Hindi article on restlessness by AP
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रक्षा बंधन पर आचार्य प्रशांत का संदेश
\"रक्षाबंधन एक स्मरण हो सकता है कि हम सब मिलकर उस विवेक, उस करुणा की रक्षा करें जो जीवन को जीवन बनाती है। यह पर्व केवल उपहारों का आदान-प्रदान न रह जाए, बल्कि यह एक ऐसा संकल्प बन जाए जिसमें हम एक-दूसरे के आत्मबल और ऊंची चेतना के
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शिव-शक्ति
नवरात्र का माहौल है। शक्ति के बारे में कुछ बातें करना प्रासंगिक रहेगा। शिव केंद्र हैं, शिव सत्य हैं। शिव वो हैं जिन तक मन, 'मन' रह कर नहीं पहुंच सकता। शिव को तो रहस्य रहना है सदा। शक्ति, मन है, संसार है। शिव में स्थिरता है, अचलता है।
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गुरु के प्रति धन्यवाद कम क्यों हो जाता है? आचार्य प्रशांत (2017)
अब देखिएगा, क्या हो रहा है। कोई कृतज्ञ कब अनुभव करेगा? जब पहले उसकी हालत ख़राब हो और कोई बचाए। आपके भीतर अभी यह इच्छा शेष है कि आप कृतज्ञ अनुभव करती रहें और कृतज्ञता अनुभव करने के लिए ज़रूरी है कि कुछ गड़बड़ हो और फिर उस गड़बड़ से आप उबार ली जाएँ। तो फिर आप कृतज्ञ अनुभव करेंगी कि, अरे, मेरा सौभाग्य कि मुझे किसी ने बचा लिया।
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कर्म और अतीत से मुक्ति कैसे मिले ?
इन सब से मुक्ति का एक ही तरीका है, वो बचो ही नहीं जो मूर्ख जाकर के दुनिया से, जगत से, प्रकृति से कामना पूर्ति की आशा रखता था, वो बचो ही नहीं। उसके अलावा और तुम कितने भी हथकंडे लगा लो, अतीत तो लौट-लौट के बार-बार आएगा और सर पर चढ़ेगा ही चढ़ेगा।
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स्मोक टेस्ट हिन्दी लेख 16 अगस्त 2026
हिन्दी स्मोक टेस्ट लेख का संक्षिप्त विवरण।
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What does love mean?
You must know what is love. How it shapes your life.
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Why do I restless
This article is related to restlessness.
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Description enwcoiew fkwsc J. Krishnamurti.
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“माँसाहार गरीबों के लिए वरदान है क्योंकि माँसाहार के माध्यम से गरीबों को सस्ता प्रोटीन मिल जाता है।“ १ ग्राम प्रोटीन अगर आप मटन से लेते हैं तो लगते हैं ३ रुपये। उतना ही प्रोटीन, १ ग्राम, अगर आप अंडे से लेते हैं तो लगते हैं १ रुपय ३० पैसे, उतना ही प्रोटीन, १ ग्राम, अगर आप चिकन से लेते हैं तो लगता हैं १ रुपया।
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ऐसे नहीं चलेगा प्रेम || आचार्य प्रशांत, कबीर साहब पर (2019)
Saint Kabir
ऐसे नहीं चलेगा प्रेम || आचार्य प्रशांत, कबीर साहब पर (2019)
18min
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प्रश्नकर्ता: पिछली बार चंडीगढ़ तरफ़ से आया था जी,। आप से जुड़ा था। तबजब मैं अकेला आया था, बिलकुल हताश, परेशान था। आज मेरीमेरे साथ श्रीमती जी भी आईं हैं। मेरा प्रश्न यह है जी, जैसे संतों ने कहा है—

प्रेम-गली अति सांकरी, तामे दो न समाहिं। जब मैं था…

एक नाम ऐसा भी
Saint Kabir
एक नाम ऐसा भी
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आचार्य प्रशांत: पूछा है कि, "कबीर साहब कह गए हैं कि;

कोटि नाम संसार में, तासे मुक्ति ना होए। आदि नाम जो गुप्त है, बूझे बिरला कोए।। ~कबीर साहब

तो इसमें किस नाम की बात हो रही है? फिर आगे कहते हैं कि ऐसे ही तुलसीदास कह गए हैं कि…

लूट सको तो लूट लो
Saint Kabir
लूट सको तो लूट लो
8min
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी को प्रणाम। आचार्य जी, कबीर दास जी कहते हैं , "लूट सको तो लूट लो, राम नाम की लूट। पाछे फिर पछताओगे, प्राण जाएँ जब छूट।" तो राम नाम की लूट से क्या आशय है? कृपया प्रकाश डालें और प्रणाम स्वीकार करें।

आचार्य प्रशांत: कपिल (प्रश्नकर्ता), जीवन…

आत्महत्या क्या? शांति कैसे मिले? || गुरु कबीर पर (2018)
Saint Kabir
आत्महत्या क्या? शांति कैसे मिले? || गुरु कबीर पर (2018)
8min
23reads

प्रश्नकर्ता: सर, कोई आदमी कब सुसाइड (आत्महत्या) करने के बारे में सोचने लगता है? हम लोगों के दिमाग में तो आता भी नहीं है यह ख़याल।

आचार्य प्रशांत: यह किसके दिमाग में आया अभी-अभी?

प्र: कुछ लोग मर जाते हैं सुसाइड करके, क्यों?

आचार्य: बेटा, हर आदमी लगातार दुःख से…

पुरुष और स्त्री का मूल संबंध || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2017)
Saint Kabir
पुरुष और स्त्री का मूल संबंध || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2017)
17min
51reads

खसम उलटि बेटा भया, माता मिहरी होय।

मूरख मन समुझै नहीं, बड़ा अचम्भा होय।।

~ कबीर साहब

आचार्य प्रशांत: कर्म, कर्म का केंद्र, कर्म का स्वामी, कर्मफल—समझेंगे इनको।

खसम उलटि बेटा भया

'खसम' का अर्थ हुआ जिसको तुमने स्वामी का स्थान दिया, और 'बेटा' हुआ स्वामी को स्वामित्व देने का…

कब हटेगी हिंसा? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2017)
Saint Kabir
कब हटेगी हिंसा? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2017)
17min
17reads

कहता हूँ कहि जात हूँ, कहा जु मान हमार।

गल तुम काटि हो, सो फिर काटि तुम्हार।।

~ संत कबीर

आचार्य प्रशांत: कबीर जो भी कहें, उसमें शब्द भले ही हमारी भाषा के हों, वस्तुएँ भले ही हमारी ज़िंदगी की हों, सारे प्रतीक, सारी उपमाएँ हमारे ही संसार के हों,…

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
Saint Kabir
बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
6min
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बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर। ।

~गुरु कबीर

प्रश्न: आचार्य जी, प्रणाम। कृपया गुरु कबीर की इन पंक्तियों का आशय स्पष्ट करें।

आचार्य प्रशांत जी:

एक ही है जो बड़ा है, जो वृहद है, उसे ‘ब्रह्म’ कहते हैं। उसके…

सब करके भी कुछ नहीं करते || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2019)
Saint Kabir
सब करके भी कुछ नहीं करते || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2019)
4min
14reads

प्रश्न: आचार्य जी, नमन।

कबीर दास जी का एक दोहा है –

सभी कर्म हमारो किया, हम कर्मण ते न्यारे हो

कृपया आशय स्पष्ट करें ।

आचार्य प्रशांत जी: ये कबीरों की, संतों की अपनी आंतरिक स्थिति है, अपनी कहावत है। कह रहे हैं, “ऊपर-ऊपर से प्रतीत होता है कि…

खाने और कपड़ों के प्रति आकर्षण || आचार्य प्रशांत (2018)
Saint Kabir
खाने और कपड़ों के प्रति आकर्षण || आचार्य प्रशांत (2018)
7min
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प्रश्न:

कबिरा यह मन लालची, समझे नहीं गंवार।भजन करन को आलसी, खाने को तैयार।।

~ गुरु कबीर

आचार्य जी, मेरा मन तो खाने के साथ-साथ वस्त्रों आदि की ओर भी बहुत आकर्षित रहता है । वस्त्र खरीदती भी बहुत हूँ, पर कभी तृप्त नहीं होती । कृपया मार्गदर्शन करें…

गुरु बिनु होत नहीं उजियारी || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
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गुरु बिनु होत नहीं उजियारी || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
5min
15reads

चकमक पत्थर रहे एक संगा, नहीं उठे चिंगारी।

बिनु दया संयोग गुरु बिनु, होत नहीं उजियारी।।

~ संत कबीर साहिब

आचार्य प्रशांत: चकमक पत्थर। चकमक कौन-सा पत्थर होता है?

श्रोता: आग जलाने के काम आता है।

आचार्य प्रशांत: ठीक है!

चकमक पत्थर रहे एक संगा।

अकेला है वो। वो कह…

डरो नहीं, तुम सुरक्षित हो || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2017)
Saint Kabir
डरो नहीं, तुम सुरक्षित हो || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2017)
23min
22reads

लकड़ी जल डूबे नहीं, कहो कहाँ की प्रीति।

अपनी सीची जानि के, यहीं बड़ने की रीति।।

~ गुरु कबीर

आचार्य प्रशांत: “लकड़ी जल डूबे नहीं, कहो कहाँ की प्रीति” — सवाल उठा रहे हैं कबीर, यह कौन सा प्रेम है, यह किसका प्रेम है, क्या प्रकार है इसका कि एक…

अबहूँ मिला तो तबहूँ मिलेगा || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
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अबहूँ मिला तो तबहूँ मिलेगा || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
16min
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*साधो भाई जीवत ही करो आसा।***

*जीवत समझे, जीवत बुझे,* *जीवत मुक्तिनिवासा।*

*जीवत करम की फाँस न कटी,* *मुये मुक्ति की आसा।*

*तन छूटे, जिव मिलन कहत है,* *सो सब झूठी आसा।*

*अबहूँ मिला तो…

मुझे मरण का चाव || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
Saint Kabir
मुझे मरण का चाव || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
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गगन दमदमा बाजिया, पड़ेया निसानी घाव।खेत बुहारया सूरमा, मुझे मरण का चाव।।

~ कबीर

आचार्य प्रशांत: जब कबीर गगन की, आकाश की बात करते हैं, तो उनका आश्य होता है मन का आकाश, चिदाकाश। वो बात कर रहें हैं कि जो आपका आतंरिक आकाश है, वहाँ पर ध्वनि हो…

निर्गुण के गुण || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
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निर्गुण के गुण || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
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जो तू चाहे मुक्त को, छोड़ दे सब आस|

मुक्त जैसा ही हो रहे, सब कुछ तेरे पास||

~ कबीर

आचार्य प्रशांत: तो अनु पूँछा है कि ‘मुक्त जैसा ही’ माने क्या? ये बड़ी सुंदर विधि है, जो कबीर ने बताई है और इस विधि का बहुत सारी परम्पराओं में…

डूब के जानो, झूम के गाओ || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
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डूब के जानो, झूम के गाओ || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
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सुख सागर का शील है, कोई न पावै थाह।

सुख सागर का शील है, कोई न पावै थाह।

शब्द बिना साधू नहीं, द्रव्य बिना नहीं शाह।।

~कबीर

आचार्य जी: दो तरफा प्रयोजन है यहाँ पर कबीर का, शब्द से। एक तो गहरी परीक्षा साधू…

निन्दा कहाँ से? अहं का स्त्रोत? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
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निन्दा कहाँ से? अहं का स्त्रोत? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
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निन्दक तो है नाक बिन, सोहै नकटी माहि। साधुजन गुरुभक्त जो, तिनमे सोहै नाही॥

निन्दक नियरे राखिये, आंगन कुटी छवाय। बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय॥

~ गुरु कबीर

आचार्य प्रशांत: निंदक तो है नाक बिन। नाक से अर्थ है—मान, कीमत। उसकी अपनी कोई कीमत नहीं होती है। उसकी…

प्रसन्नता और आनंद में क्या अंतर है? स्वभाव क्या? || आचार्य प्रशांत, कबीर पर (2017)
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प्रसन्नता और आनंद में क्या अंतर है? स्वभाव क्या? || आचार्य प्रशांत, कबीर पर (2017)
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जाके जौन स्वाभाव, छूटे नहीं जीव सो,

नीम ना मीठी होय, सींचै गुड़ घीव सो।।

संत कबीर

प्रश्न: जब स्वभाव बदल ही नहीं सकता तो गुरु किसी मनुष्य को कैसे जगाने में सहायता कर सकता है?

आचार्य प्रशांत: यहाँ पर कबीर जिस स्वभाव की बात कर रहे हैं,…

उमरिया धोखे में बीत गयो रे || (2017)
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उमरिया धोखे में बीत गयो रे || (2017)
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उमरिया धोखे में खोये दियो रे पाँच बरस का भोला भला, बीस में जवान भयो। तीस बरस में माया के कारण, देश-विदेश गयो। उमर सब धोखे में… चालीस बरस अंत अब लागै, बाढ़ै मोह गयो। धन धाम पत्र के कारण, निस दिन सोच भयो।। बरस पचास कमर भई टेढ़ी, सोचत…

कर्म छू नहीं सकता शब्द से भी पाएगा कौन, राम तक पहुँचेगा मन होकर मात्र मौन
Saint Kabir
कर्म छू नहीं सकता शब्द से भी पाएगा कौन, राम तक पहुँचेगा मन होकर मात्र मौन
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हाथ सुमरनी पेट कतरनी, पढ़त भागवत गीता ।

राम भजा सो जीता जग में, राम भजा सो जीता ।।

संत कबीर

वक्ता: पढ़ने में और भजने में क्या अंतर है?

श्रोता१: भजा तभी जा सकता है जब उस चीज़ को समझ सको।

श्रोता२: भजा मतलब एक पूरी मौजूदगी इन्वॉलव्ड है।…

तुम्हारी सहमति के बिना ठगे नहीं जा सकते तुम || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
Saint Kabir
तुम्हारी सहमति के बिना ठगे नहीं जा सकते तुम || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
21min
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कबिरा आप ठगाइये, और न ठगिए कोय|

आप ठगे सुख होत है, और ठगे दुःख होय||

~संत कबीर

वक्ता: इसको समझने के लिए एक दोहा और लिखिए इसके साथ:

माया तो ठगनी भयी, ठगत फिरत सब देश|

जा ठग ने ठगनी ठगी, ता ठग को आदेश||

मुक्ति सर्व आयामी और…

दुःख में याद रहे, सुख में भूले नहीं || आचार्य प्रशांत,संत कबीर पर (2015)
Saint Kabir
दुःख में याद रहे, सुख में भूले नहीं || आचार्य प्रशांत,संत कबीर पर (2015)
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दुःख में सुमिरन सब करै, सुख में करै न कोय।

जो सुख में सुमिरन करै, तो दुःख काहे को होय।।

संत कबीर

प्रश्न: आपने कई बार कहा है कि सुख, दुःख अलग-अलग नहीं, पर यहाँ पर कबीरदास कहते हैं कि सुख के क्षणों में याद करने से दुःख से…

पानी में घर मीन का, काहे मरे पियास || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
Saint Kabir
पानी में घर मीन का, काहे मरे पियास || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
19min
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आशा तो गुरुदेव की, दूजी आस निरास।

पानी में घर मीन का, क्यों मरे पियास।।

कबीर

वक्ता: मुदित जी का सवाल है कि, अष्टावक्र जैसे ज्ञानियों ने कहा है कि आशा ही परमम दुखम। और दूसरी ओर कबीर कह रहे हैं कि आशा तो गुरुदेव की, दूजी आस नीरास। ये…

हम हँसें जग रोये || आचार्य प्रशांत, गुरु कबीर पर (2014)
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हम हँसें जग रोये || आचार्य प्रशांत, गुरु कबीर पर (2014)
42min
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कबीरा जब पैदा हुए तो जग हँसा हम रोये

ऐसी करनी कर चलो कि हम हँसे जग रोये

सात जन्म के सात फेर हैं

साँप सीढ़ी है भाई

जम का दंड मुंड पे लागे

धरी रहे चतुराई

कबीरा जब पैदा हुए तो जग हँसा हम रोये

ऐसी करनी कर चलो…

जिसके खालीपन में झलके अनंत, उसी को शून्यवत कहो उसी को संत || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
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जिसके खालीपन में झलके अनंत, उसी को शून्यवत कहो उसी को संत || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
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सन्त पुरुष की आरसी, सन्तों की ही देह|

लखा जो चाहे अलख को, उन्हीं में लख लेह||

~संत कबीर

वक्ता: संत कौन है? संत पुरुष की आरसी, सन्तों की ही देह, लखा जो चाहे अलख को, उन्हीं में लख जे लेह| संत कौन है? संत वो है जिसने अपनी हर…

खेल के जारी रहने में मज़ा है और काम के खत्म हो जाने में || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
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खेल के जारी रहने में मज़ा है और काम के खत्म हो जाने में || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
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वक्ता: दो बातें हैं। पहली, योग है। दूसरी, अनंत समय है।

“युगन युगन हम योगी।” और ये दोनों ही बातें जब एक साथ कह दी जाती हैं, तो पूर्ण कह दिया जाता है। योग का अर्थ है: केंद्र। ‘अनंत समय’ का अर्थ है: उस केंद्र से फैला हुआ पूरा विस्तार।…

जीवन गँवाने के डर से अक्सर हम जीते ही नहीं || आचार्य प्रशांत,संत कबीर पर (2014)
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जीवन गँवाने के डर से अक्सर हम जीते ही नहीं || आचार्य प्रशांत,संत कबीर पर (2014)
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जिन खोजा तिन पाइयां, गहरे पानी पैठ। मैं बपुरा डूबन डरा, रहा किनारे बैठ।।

~ संत कबीर

प्रश्नकर्ता: इस दोहे को जब मैं अपने जीवन के सन्दर्भ में देखती हूँ तो पाती हूँ कि मेरे सारे प्रयत्न, जवाबों को ढूँढने की राह में कम ही पड़ते हैंI अपने प्रयासों को…

संत के शब्द - एक आमन्त्रण || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
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संत के शब्द - एक आमन्त्रण || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
25min
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वक्ता: एक तरफ़ तो ये कहा गया है कि प्राप्ति, उपलब्धि तत्क्षण है। जो समयातीत है, उसे समय का उपयोग करके नहीं पाया जा सकता। भविष्य में आगे देखना, कल्पना करना कि, ‘’किसी मार्ग के द्वारा, किसी विधि के द्वारा मैं शान्ति को, मुक्ति को पाउँगा, ये सिर्फ़ आपकी…

तुम्हारा प्रतिरोध व्यर्थ है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
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तुम्हारा प्रतिरोध व्यर्थ है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
15min
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बिरहिन ओदी लाकड़ी, सकुचे और धुन्धाये ।छुटी पड़ी यह बिरह से, जो सगरी जली जाये ।।

~ संत कबीर

वक्ता: नियति तो उसकी जलना ही है। और नहीं जलेगी तो इतना ही करेगी कि, खूब धुआं देगी। कोई रोशनी नहीं, कोई ऊष्मा नहीं, सिर्फ़ धुआं। गंदगी फैलाएगी। जलेगी,…

मैं इकट्ठा क्यों करता हूँ? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
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मैं इकट्ठा क्यों करता हूँ? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
12min
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साधु गाँठ न बाँधई, उदर समाता लेय ।

आगे पाछे हरि खड़े, जब माँगे तब देय ।।

~संत कबीर

वक्ता: साधु बस उतना ही लेगा जितना उसके उदर में समा जाए, बस उतना ही लेगा। उदर अर्थ सिर्फ़ भूख नहीं और कुछ भी होगा। गाँठ नहीं बांधेगा, आगे पीछे…

बाहर काम अंदर आराम || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
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बाहर काम अंदर आराम || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
12min
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“श्रम से सब कुछ होत है,बिन श्रम मिले कुछ नाहीं।

सीधे उंगली घी जमो,कबसू निकसे नाहीं।“

~ संत कबीर

वक्ता: कबीर हैं।

सवाल यह है कि कबीर श्रम की महत्ता पर इतना ज़ोर दे रहें हैं, और आपने बार-बार कहा है कि श्रम की कोई कीमत…

संवेदनशीलता क्या है? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
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संवेदनशीलता क्या है? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
5min
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कबीर क्षुधा कूकरी, करे भजन में भंग

वाकूं टुकड़ा डारि के, सुमिरन करूँ सुरंग

~ संत कबीर

प्रश्न:मैं खा रहा हूँ या शरीर अपना काम कर रहा है?

वक्ता:संवेदनशीलता का अर्थ ही यह है कि ‘मैं’ बीच में न आए। जहाँ ‘मैं’ बीच में आ जाता…

जो वचन आपसे न आए, वही मीठा है || संत कबीर पर (2016)
Saint Kabir
जो वचन आपसे न आए, वही मीठा है || संत कबीर पर (2016)
6min
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ऐसी वाणी बोलिये, मन का आपा खोय। औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।

~ संत कबीर

आचार्य प्रशांत: बड़ी ग़लती कर देते हैं हम, हमें लगता है कबीर कह रहे हैं - ऐसी वाणी बोलिये जिससे मन का आपा खो जाए, नहीं। कबीर कह रहे हैं - ऐसी वाणी…

टुकड़ा टुकड़ा मन || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
Saint Kabir
टुकड़ा टुकड़ा मन || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
6min
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धरती फाटे, मेघ मिलै, कपडा फाटे डौर,

तन फाटे को औषधि, मन फाटे नहिं ठौर।

~ संत कबीर

वक्ता: धरती फट गई हो, ऐसा ताप पड़ा हो कोई वर्षा न हुई हो और धरती फट उठी हो। तो इलाज संभव है। मेघ आएगा और सींच देगा। फटी धरती दुबारा नम…

मुझे इतनी ठोकरें क्यों लगती हैं? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
Saint Kabir
मुझे इतनी ठोकरें क्यों लगती हैं? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
24min
8reads

सोना, सज्जन, साधुजन, टूट जुड़े सौ बार

दुर्जन कुम्भ कुम्हार के, एकै धक्का दरार

~ संत कबीर

वक्ता: क्या है टूटना? और जुड़ना क्या है? एक टूटना-जुड़ना तो वो होता है, जो हम लगातार अनुभव करते ही रहे हैं और दुनिया में भी रोज़ होता देखते हैं। मन कहीं जाकर…

तुम ही साधु, तुम ही शैतान || संत कबीर पर (2015)
Saint Kabir
तुम ही साधु, तुम ही शैतान || संत कबीर पर (2015)
8min
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सोया साधु जगाइए, करे नाम का जाप ये तीनो सोते भले, साकट सिंह और साँप

-संत कबीर

आचार्य प्रशांत: आध्यात्मिकता के प्राथमिक सूत्रों में ही यह है कि संत जो भी कहे, उस बात को संसार का नहीं मन का जानो, भले ही उसमें जो दृष्टांत दिया गया हो, वो…

मन की दौड़ ही मन का बंधन है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
Saint Kabir
मन की दौड़ ही मन का बंधन है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
15min
14reads

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।

कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥

– कबीर

वक्ता: मन से ज्यादा कहीं पहुँचने को कोई आतुर नहीं होता और मन से ज्यादा पहुँचने से कोई डरता नहीं है। बड़ी गहरी बेचैनी रहती है मन की, कि किसी…

उसके बिना तड़पते ही रहोगे || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
Saint Kabir
उसके बिना तड़पते ही रहोगे || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
6min
8reads

राम बिनु तन को ताप न जाई

जल में अगन रही अधिकाई

राम बिनु तन को ताप न जाई

तुम जलनिधि में जलकर मीना

जल में रहि जलहि बिनु जीना

राम बिनु तन को ताप न जाई

तुम पिंजरा मैं सुवना तोरा

दरसन देहु भाग बड़ मोरा

राम बिनु तन…

अपने अंधकार से दूसरों को कैसे रौशन कर पाओगे || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
Saint Kabir
अपने अंधकार से दूसरों को कैसे रौशन कर पाओगे || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
3min
16reads

पंडित और मशालची, दोनों सूझत नांहि

औरन को करै चांदना, आप अँधेरे मांहि

संत कबीर

वक्ता: चिराग की रोशनी तो फिर भी उसकी अपनी है, यहाँ तो मशाल पकड़ी हुई है, जो तुम्हारा हिस्सा भी नहीं। तुम मशाल नहीं हो, तुमने तो मशाल उठा ली है बस,…

गगन घटा गहरानी रे || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
Saint Kabir
गगन घटा गहरानी रे || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
8min
17reads

अवधूता गगन घटा गहरानी रे।।

पच्छम दिसा से उलटी बादली, रुमझुम बरसे मेहा,

उठो ज्ञानी खेत संभारो, बह निसरेगा पानी।।१।।

निरत सूरत के बेल बनावो, बीजा बोवो निज धानी,

दुबध्या डूब जन्म नहीं पावे, बोवो नाम की धानी।।२।।

चारों कोनें चार रखवाले, चुग न जावे मृग धानी,

काटया खेत मींड़ा…

जानकर यदि भूल गये तो कभी जाना ही नहीं || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
Saint Kabir
जानकर यदि भूल गये तो कभी जाना ही नहीं || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
5min
12reads

सौ बरसा भक्ति करे, एक दिन पूजे आन ।

सौ अपराधी आत्मा, पड़े चौरासी खान ।।

~संत कबीर

वक्ता: सौ साल की भक्ति के बाद अगर एक दिन फिसल गए, तो उस एक दिन के फिसलने से ये तय है कि वो सौ साल में जो कर…

सच क्या कभी तुम्हें भाएगा? || (2015)
Guru
सच क्या कभी तुम्हें भाएगा? || (2015)
8min
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गुरु नारायन रूप है, गुरु ज्ञान को घाट। सतगुरु बचन प्रताप सों, मन के मिटे उचाट।। ~ संत कबीर

प्रश्नकर्ता: सर, हम छात्रों को जवाब देते हैं, तो मौका मिल रहा है, आप जैसा बनने का। मन में बड़ी हलचल सी मची है इस बात को लेकर, कुछ कहें।

आचार्य…

अमरता का वास्तविक अर्थ || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
Saint Kabir
अमरता का वास्तविक अर्थ || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
11min
6reads

शून्य मरे, अजपा मरे, अनहद हूँ मरी जाय।

राम सनेही ना मरे, कहे कबीर समझाय।।

~ संत कबीर

वक्ता: ‘चंदा मरे है, सूरज मरे है’, बात कल्पना से थोड़ी आगे की है। खींचती है कल्पना को, आमतौर पर हम कभी ऐसा सोचते नहीं कि दुनिया ऐसी भी हो,…

जीव के लिए ही मृत्यु है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
Saint Kabir
जीव के लिए ही मृत्यु है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
31min
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नाहं देहो न मे देहो, जीवो नाहमहं हि चित्।

अयमेव हि मे बन्ध् आसीध्या जीविते स्पृहा।।

–अष्टावक्र गीता

वक्ता: यदि देह हूँ मैं, तो जन्म हुआ है मेरा, यदि जन्म हुआ है मेरा तो एक ही मंज़िल है मेरी, मौत। यदि देह हूँ मैं, तो जीवन…

सन्यास- मूर्खता का प्रतिरोध || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
Saint Kabir
सन्यास- मूर्खता का प्रतिरोध || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
12min
11reads

नारि पुरुष की इसतरी, पुरुष नारि का पूत।

याही ज्ञान विचारि के, छाडि चले अवधूत।।

~ संत कबीर

वक्ता: अवधूत शब्द ही गहरा है; अव-धूत: जिसके मन से धूल, धुंआ पूरी तरह साफ़ हो गया, वो अवधूत। क्या दिखता है अवधूत को अपने साफ़ मन…

गहरी वृत्ति को जानना ही है त्याग || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
Saint Kabir
गहरी वृत्ति को जानना ही है त्याग || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
2min
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मन मते माया तजि, यूँ करे निकस बहार।

लागी रही जानी नहीं, भटकी भयो खुआर।।

संत कबीर

आचार्य प्रशांत: मन ने बड़ी होशियारी दिखाई, मन ने कहा माया तज दो, माया के नाम पर क्या तज दिया?

माया के नाम पर लोग क्या तजते हैं? ये खाऊंगा नहीं, ये पहनूंगा…

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