क्या पूर्वजन्म के कर्मों का फल इस जन्म में मिलता है? || (2019)

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम। ये पूछना था कि मैंने कई बार देखा है कि बचपन में ही छोटे बच्चे बहुत ही गंभीर हालत में बीमारियों में आ जाते हैं अस्पतालों में, कैंसर हो जाता है, बहुत सी अलग-अलग बीमारियाँ हो जाती हैं। सबका कारण यही दिया जाता है कि ये तो पूर्वजन्मों का कर्मफल है, तो इसमें क्या सच्चाई है? आज की वर्तमान बीमारियों का पिछले जन्म के कर्मों से क्या कोई सम्बन्ध है?
आचार्य प्रशांत: इसकी वज़ह ये है कि हमारी मान्यता में एक इन्डिविजुअल-सेल्फ (व्यक्तिगत मैं) बैठा हुआ है। ग़ौर से समझेंगे तभी बात बनेगी। हम ये मानते हैं कि वो जो बच्चा हमारे पास आया है पाँच साल का, उसका कोई व्यक्तिगत 'मैं' है, उसकी कोई व्यक्तिगत सत्ता है, उसका कोई व्यक्तिगत 'आई ' है। हम कहते हैं उसका कोई व्यक्तिगत 'सेल्फ ' है। अगर उसका व्यक्तिगत सेल्फ है तो फिर उस बच्चे के साथ जो कुछ हो रहा होगा उसके लिए वो व्यक्तिगत सेल्फ ही उत्तरदाई होगा।
तो अब हम देखते हैं उस पाँच साल के बच्चे को कैंसर हो गया। तो हम कहते हैं, "इसको कैंसर हुआ है न, इसको कैंसर हुआ है तो कैंसर की वजह भी इसी से संबंधित होनी चाहिए", क्योंकि हम उस बच्चे को एक आइसोलेटेड, डिवाइडेड, इन्डिविजुअल इकाई मान रहे हैं। हम कह रहे हैं इसका एक व्यक्तिगत सेल्फ है। हम कह रहे हैं इसको कैंसर हुआ है तो उसकी वजह भी इसी बच्चे में निहित होगी। कुछ इस बच्चे के अतीत में होगा जिसकी वजह से इसको कैंसर हो गया। तो फिर हम खोजने की कोशिश भी करते हैं कि इसके अतीत में ऐसा क्या है कि इसको कैंसर हो गया। पर पाते हैं कि उसकी ज़िंदगी ही पाँच साल की है तो फिर हम अनुमान लगाते हैं कि कुछ पूर्वजन्म वगैरह का चक्कर होगा, किसी ऋषि महात्मा ने श्राप दे दिया इसलिए ऐसा हो गया।
ये सारा अनुमान हम लगाते रहते हैं अपनी मान्यता को आधार बनाकर और मान्यता ये है कि ये बच्चा और दुनिया का हर आदमी एक व्यक्तिगत सेल्फ




