खाली करो, खाली करो || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग, संत रूमी पर (2015)

Anyone can bring me gifts; give me someone who can take away
Rumi
एनीवन कैन ब्रिंग मी गिफ्ट्स; गिव मी समवन हू कैन टेक अवे
रूमी
वक्ता: मुझे ‘दे’ तो कोई भी सकता है, चाहिए कोई ऐसा जो मुझे ‘खाली’ कर दे। गिफ्ट्स शब्द का उपयोग है — भेंट, उपहार। खूब भेंटे मिली हैं, खूब उपहार मिले हैं दुनिया से; जो मिला है वो सब भेंट और उपहार है क्योंकि बहुधा जिन्होंनें दिया, उन्होंनें भी यह सोच कर दिया कि कुछ भलाई होगी।
उपहार का क्या अर्थ है?
वो जो किसी को इसलिए दिया जाए जिससे उसका भला हो सके। तो अधिकांशत: तो जिन्होंनें तुम्हें दिया, उन्होंनें इसीलिए दिया कि तुम्हारा भला हो। और जब तुमने लिया भी, स्वीकार भी किया, तो यही सोचकर किया कि इससे हमारी बेहतरी होगी।
रूमी कह रहे हैं कि ऐसा नहीं है कि जो बाहर से मिला उसमें कुछ अच्छा और कुछ बुरा था। यह तो तुमने खूब सुना होगा न कि “अच्छा-अच्छा ले लो, बुरा-बुरा छोड़ दो।” यहाँ तुम्हें एक नई ही परिभाषा दी जा रही है ‘अच्छे’ और ‘बुरे’ की। रूमी पूरी बात में एक क्रांतिकारी परिवर्तन कर रहे हैं। वो कह रहे हैं: ज्यों ही तुम्हें बाहर से मिला, भले उपहार स्वरूप मिला हो, वही बुराई है।

