आचार्य प्रशांत: कबीर का है,
सज्जन जन वही है, ढाल सरीखा होय।
दुःख में आगे रहे, सुख में पाछे होय।।
~ कबीर
ये इसमें, कहाँ है? ये कहाँ से आया है कि ‘सज्जन जन वही है जो दूसरों की मुसीबत के ख़ुद आने वाली चीज़ को ढाल की तरह आगे आकर रोक ले।’
श्रोता: ये वो दोहा दिया था उसमे हिंदी, ये, दोहे के नीचे अंग्रेज़ी का भी थोड़ा लिखा हुआ था।
आचार्य जी: नहीं, कहाँ पर? किसने दिया ये?
श्रोता: आचार्य जी, वो हमको लिंक्स भेजा था किसी ने।
आचार्य जी:



