वक्ता: जहाँ ‘ब्रह्मन’ (अंग्रेज़ी में) लिखा हुआ है, वह ब्रह्म है| ब्रह्म का मतलब होता है निराकार, बेनाम, पूरा स्रोत|
(मौन)
अच्छा एक सवाल| अभी मैंने जैसे बोला कि ब्रह्म माने निराकार, बेनाम, स्रोत, यह बात पूरी तरह से शुद्ध नहीं थी| क्यों शुद्ध नहीं थी?
श्रोता १: क्योंकि आपने उसको एक नाम दे दिया था|
वक्ता: नहीं, मैंने कहा, ‘निराकार, बेनाम, स्रोत’|
श्रोता २: क्योंकि जिसका आकार है, नाम है, सब कुछ, वह भी तो ब्रह्म ही है|
श्रोता ३: स्रोत अपनी अभिव्यक्ति भी तो अकार से ही करेगा|
वक्ता: हम बार-बार ‘स्रोत’ बोलते हैं| उसे ‘स्रोत’ बोलने में भी अगर बारीकी से देखो तो गड़बड़ है| क्या गड़बड़ है?



