साहसी मन समस्या को नहीं, स्वयं को सुलझाता है || आचार्य प्रशांत (2014)

प्रश्नकर्ता: किसी अप्रिय स्थिति का सामना करें या उससे बच कर ही रहें? दोनों ही विकल्प बड़ी ऊर्जा माँगते हैं।
आचार्य प्रशांत: दोनों स्थितियाँ भरपूर ताकत माँगती हैं। देखो, अंत तो सामना करने से ही होगा। प्रश्न ये नहीं है कि, "मैं क्या करूँ?" प्रश्न ये है, ‘’मैं किस लायक हूँ?’’ अंत तो सामना करके ही होगा स्थिति का। सामना करने का अर्थ है स्थिति से आँखे चार करना। स्थिति को, उसकी पूर्णता में देखना; दूध-का-दूध, पानी-का-पानी। और स्थिति को उसकी पूर्णता में देखने का मतलब है: हो क्या रहा है? दिख क्या रहा है? नाम क्या दिए जा रहे हैं? अर्थ क्या बनाए जा रहे हैं? सब कुछ। भाव क्या उठ रहे हैं? सब, पूरा।
तो ये तो होगा। इसके बिना कुछ गलता नहीं है, गाँठ पूरी-की-पूरी बनी रहती है। पर ये होगा, ऐसा कोई आदर्श मात्र तो नहीं हो सकता न? ऐसा होने की शर्त होती है कि तुम में ऐसा कर पाने की काबिलियत हो। और जब काबिलियत होती है, तो तुम ये सवाल उठाते नहीं हो कि, "सामना करूँ या पड़ा रहने दूँ?" तो ये सवाल अभी भी मत उठाओ। तुम बस अपनेआप को तैयार करो। फिर एक स्थिति हो, चाहे पचास स्थितियाँ हो, तरह-तरह की स्थितियाँ हों, तुम पाओगे कि तुम खुद ही उनका सामना कर लेते हो। ये प्रश्न ही नहीं उठता है।
भई, अगर सामना उचित प्रकार से कर ही सकते, तो तुम ये सवाल पूछते नहीं न। ये सवाल ही बता रहा है कि कहीं-न-कहीं अटके हुए हो, गाँठ है। अंततः तो सामना ही करना है। वो सामना अगर इसी पल हो जाए तो बहुत बढ़िया। पर इस पल होगा नहीं, जब तक तुमने अपने मन का रेचन किया नहीं। मन ऐसा तैयार करो कि वो हर स्थिति को देख ले; पूरा देख ले; पार देख ले। और फिर कहीं से भागेगा नहीं वो। वो सामना ही करता है। कुछ पड़ा नहीं रहने देता।
तो तुम तैयार करो, साफ़ रखो। उसके बाद एक अद्भुत घटना और भी घट सकती है। वो ये कि तुम्हें किसी परिस्थिति को हल करना ही न पड़े। तुम्हारी आहट भर से परिस्थिति खुद हल हो जाए। तुम्हारे आस-पास समस्याएँ, माया भटके ही न। नज़र तुम्हारी इतनी तेज़ हो कि देखने भर से जितना अज्ञान है, सब घुल जाए। तुम जिस कमरे में बैठे हो, अपनेआप वहाँ का माहौल ऐसा हो जाए कि अब यहाँ कोई टुच्ची बात हो ही नहीं सकती। तुम जिस घर में हो, उस घर की तबियत बदल जाए। वो सब अपनेआप होने लगेगा। तुमको बहुत श्रम नहीं करना पड़ेगा कि, "मैं समस्या का उन्मूलन करने के लिए आ गया।"

