किसे बदलना चाहिए और किसे नहीं? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)

*प्रश्न: क्या बदलाव सही है और क्या गलत?*
आचार्य प्रशांत: सही गलत का सवाल नहीं उठता, बदलाव है, जो हो ही उसपर सही गलत का ठप्पा नहीं लगाना चाहिए, बदलाव जीवन है, हम सब समय में जीते हैं, और समय का अर्थ ही है बदलना।
*प्र: लेकिन मैं यह जानना चाहता हूँ कि हम खुद को परिस्थिति के हिसाब से बदलते हैं तो क्या यह सही है?*
आचार्य जी: अब यह सवाल का दूसरा भाग हुआ, पहला तो यह कि बदलाव है, और दूसरा यह कि क्या बदलाव उचित है?
तो बदलाव तो है, और बिलकुल सामने है, उसको नकारने की कोशिश फ़ालतू है, तुम प्रतिपल बदल रहे हो, समय का अर्थ ही है बदलना, समय में जो कुछ है, सब बदलेगा, तुम किसी भो तरीके से उसको रोक नहीं सकते, बिलकुल रोक नहीं सकते।
दूसरी बात यह कि ‘क्या यह बदलाव उचित है?’
जिसको बदलना चाहिए वो ही बदले, जिसको नहीं बदलना चाहिए वो बिलकुल न-बदले।
जो बाहरी है, बदलना उसकी प्रकृति है, और वो बदलेगा, बहुत अच्छी बात है कि बदले, उसके बदलने के रास्ते में रोड़े मत अटकाना, और कुछ तुम्हारे भीतर ऐसा है, जो बदल सकता ही नहीं, उसको कोशिश भी न करना की बदल जाए।

