खोजना है खोना, ठहरना है पाना || आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर (2014)

हरि रासि मेरी मनु वणजारा सतिगुर ते रासि जाणी ।
-( श्री गुरु ग्रंथ साहिब)
अनुवाद : प्रभु हैं मेरा धन; मेरा मन है व्यापारी
वक्ता: हरि रासि मेरी मनु वणजारा सतिगुर ते रासि जाणी ।
बहुत सुन्दर पद है, समझेंगे। तीन हिस्से कर लीजिये।
१. हरि रासि मेरी
२. मनु वणजारा
३. सतिगुर ते रासि जाणी
तीन ही हैं, और तीन ही सदा हैं। संसार, सत्य और सम्बन्ध। संसार, सत्य और उनके बीच का सम्बन्ध या सीढ़ी। तीन ही हैं। तीन का ये जो आंकड़ा है, ये बहुत महत्वपूर्ण है। संसार, सत्य और सीढ़ी।

