वक्ता: फॉर मैनी आर काल्ड बट ओन्ली फ्यू आर चोज़न
बात समझ में आ रही है? बुलाया बहुतों को जा रहा होगा पर तुम्हें सुनाई भी तो दे कि तुम्हें बुलाया जा रहा है। तुम्हें आवाज दी जाए तो थोड़ा-बहुत तुम्हें सुनाई भी तो देना चाहिए न कि तुम्हें बुलाया गया है। अगर नाश्ते में, दोपहर में और रात में नशा ही लेते हो तो कितनी आवाजें दी जाएँ तुम्हें? सुनाई क्या देगा? ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि आवाज़ देने वाला अपनी ओर से कोई चुनाव करता है। बिल्कुल मत सोचना ऐसा कि जो आवाजें दे रहा है वो चुनाव करता है कि कौन आएगा और कौन नहीं आएगा। न आने का चुनाव तुम करते हो।
उदाहरण ले लो- कल यहाँ शाम को मैंने बहुतों को बुलाया, लिख करके बुलाया, एक-दो आए और कुछ नहीं भी आए। अब कहो कि “मैनी आर काल्ड बट ओन्ली फ्यू आर चोज़न” तो बुलाने वाले के साथ अन्याय है। उसने तो बुलाया था। अपनी और से उसने कोई भेद नहीं किया। उसने आवाज़ सबको दी, पर तुम्हें सुनाई पड़ती है क्या? तुममें थोड़ी तो इच्छा होनी चाहिए न, मुक्ति की, जानने की, समझने की। तुममें ज़रा तो साहस होना चाहिए न, अपने ढर्रों से, पिंजरों से बाहर आने की।
अभी तुम पिंजरों की बात कर रहे थे थोड़ी देर पहले, जो पक्षी उड़ना चाहता हो उसको तुम ताली बजाओ बाहर से, आवाज़ दो तो वो उसके लिए प्रेरणा बन जाती है और जो पक्षी पिंजरे में ही रहना चाहता हो उसको तुम बाहर से, पिंजरे का द्वार खोल के ही सही, ताली मारो, आवाज़ दो, वो उसके लिए खौफ़ बन जाता है।
समझना बात को।
अगल-बगल दो पिंजरे रखें हों, दोनों के द्वार खोल दो। एक उड़ना चाहता है, उसको ताली मारो वो उड़ जाएगा। ताली उसके लिए सूचना बन जाएगी। ताली उसके लिए इशारा बन जाएगी कि उड़ और दूसरा जो उड़ना नहीं चाहता उसका द्वार खोल दो और ताली मारो तो वो और संकुचित हो जाएगा, वो सहर उठेगा। ताली उसके लिए धमकी बन जाएगी।


