प्रश्न: जीवन का ऊँचे से ऊँचा सुख क्या है?
वक्ता: जीवन का ऊँचे से ऊँचा सुख क्या है, अब इसमें, ध्यान सारा परम सुख की ओर चला गया, जीवन का परम सुख।इसमें जीवन को भूल गए, सवाल तो ऐसे पूछ रहे हो जैसे ‘जीवन’ पता ही हो। ‘जीवन तो हमें पूरा पता है, आप बस इतना बता दीजिये कि उसमें सुख क्या है?’ हो गयी ना गड़बड़? जीवन अपने-आप में पूरा-पूरा सुख है, उसमें कोई कांट-छांट थोड़े ही करनी है कि सुख इतना है और दुःख इतना है, और सुख में भी परम सुख इतना है। जो जीवन को जान जाए, उसके लिए ये प्रश्न ही महत्वहीन हो जाता है, फिर वो यह पूछेगा ही नहीं कि जीवन में परम सुख क्या है।
जो भी जीवन में परम सुख मांग रहा है वो जीवन के टुकड़े कर रहा है, वो जीवन को बांट रहा है, और जब भी तुम जीवन को बाँटोगे, तुमने खुद दुःख को बुला लिया। जीवन को जानते हो हम कैसे बाँटते हैं? हम कहते हैं, ‘अगर ऐसा-ऐसा परिणाम आया तब तो मैं अधिकारी हूँ खुश होने का वरना नहीं’, ये मैंने बांट दिया, मैंने शर्त लगा दी। मैंने कहा, ‘अगर तुम ऐसा-ऐसा करो तब तो तुम मेरे दोस्त हो वरना नहीं’, ये मैंने बांटा, शर्त लगा दी। अब मुझे दिक्कत होगी, दुःख होगा। अगर आज बादल निकल आये, तब तो मैं मानूंगा कि मैं सुखी हूँ और अगर धुप निकल आयी, पसीना आया तो मैं कहूँगा, ‘बड़ा दुःख है’। ‘अगर इतने हज़ार की नौकरी लग गयी तब तो मानूंगा कि सुख है, वरना बड़ा दुःख है’, अब तो तुम्हें दुःख मिलेगा क्योंकि जो तुम चाहते हो वो हो नहीं सकता क्योंकि उसके होने में हज़ार और कारण भी सहभागी हैं।
जीवन में कोई परम सुख नहीं है, जीवन ही परम सुख है। लगातार जो हो रहा है तुमने उसको ठीक से अनुभव नहीं किया इसलिए तुम्हें जीवन बहुत सस्ता लगता है। अभी यहाँ बैठे हो ना, ज़रा दो मिनट न लो, फिर तुम्हें पता चल जाएगा कि साँस लेना कितना बड़ा सुख है। तुम कहोगे कि इस से बड़ा सुख हो नहीं सकता, पर ये तुम तभी मानोगे जब पहले दुःख मिले, जब पहले कोई तुम्हारी नाक बंद कर दे। जब मरने के करीब आ जाओगे तब मानोगे कि साँस लेने से बड़ा सुख हो क्या सकता था पर मैंने कभी धन्यवाद् नहीं दिया कि मुझे साँस लेने को मिल रही है। अपनी ही आँखें बंद करो और कल्पना करो कि ये आँखें कभी नहीं खुलेंगी, कि तुम अंधे ही हो गए, उसके बाद पता चलेगा कि ये देख पाना ही कितना बड़ा सुख है। ये जो तुम्हें मिला ही हुआ है, इसका तुम शुक्रिया कभी अदा करते नहीं, इसलिए इस से आगे के किसी सुख की तलाश रहती है।



