India
भारत या इंडिया? (और मानसिक गुलामी के 5 लक्षण) || आचार्य प्रशांत (2023)
प्रसंग:
This article has been created by volunteers of the PrashantAdvait Foundation from transcriptions of sessions by Acharya Prashant

◾ एक ही जाति होती है - वह है "बल"। बल विकसित करो अपने भीतर।
◾ मिथ्याचारी वह है जो आगे के लालच में अच्छा काम करता है।
◾ आत्मा का विकृत सिद्धांत ही भारत की दुर्दशा…


भारतीयों को शायद यह लगता है कि हिंदुस्तान से बाहर जहाँ कहीं कोई मिलेगा वह ‘अंग्रेज़ी’ ही बोल रहा होगा। एक तो यह बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी है – बाहर जैसे ही हम निकलेंगे वैसे ही जो मिल रहा होगा अंग्रेज़ी ही बोल रहा होगा। हिंदुस्तान बेचारा बस पिछड़ा हुआ है,…