वक्ता: महावीर का हम सबने सुना है कि जब चलते थे तो कहते हैं कि उनके आस-पास छ: कोस तक कोई हिंसक घटना नहीं हो सकती थी। (वाक्य पर ज़ोर देते हुए) उनके आस-पास छ: कोस तक कोई हिंसक घटना नहीं हो सकती थी, होती ही नहीं थी। उन्हीं की जीवनी से यह भी है कि एक बार जा रहे थे, सामने एक कांटा पड़ा हुआ था ऐसे करके (इशारा करके बताते हुए), महावीर पास आने लगे तो कांटा यूँ हो गया (मुड़ गया), कि चुभ न जाऊं। यह क्या चल रहा है? ऐसा हो कैसे सकता है?
बुद्ध और बोधिवृक्ष का जो रिश्ता है वो भी हम जानते ही हैं। बोद्ध आज तक उस बोधिवृक्ष को ज़िन्दा रखें हुए हैं। यह पेड़, कांटे, जानवर, इनमें समझ आ जाती है क्या? यह क्या चक्कर है? बात क्या है?
आपकी रामायण भरी हुई है: *‘हे खग-मृग, हे मधुकर श्रेणी, तुम देखी सीता मृगनैनी।* ‘
अब खग! खग माने?
श्रोतागण: पक्षी।
वक्ता: और मृग
श्रोतागण: हिरण।

