विद्रोह के लिए सामर्थ्य की प्रतीक्षा मत करो, विद्रोह से ही सामर्थ्य आता है || आचार्य प्रशांत (2013)

प्रश्नकर्ता: सर, हम दूसरों को तो छोटी-छोटी चीज़ों में भी परखना चाहते हैं, पर अपने अन्दर कभी झाँक कर नहीं देखते।
आचार्य प्रशांत: मैं एक आयोजित चीज़ की बात नहीं कर रहा हूँ जो आपके अहंकार से निकलती है; मैं सहजता से निकलने वाले मुक्त आचरण की बात कर रहा हूँ। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि आप यहाँ से उठकर जाएँ और जो आपने तय ही कर रखा है वो करें। ये घटनाएँ बड़ी अकस्मात् होंगी, बड़ी अचानक से होंगी, एक धमाके की तरह होंगी। आपको यह तो पता है न कि आप उपदेश देने में बहुत अच्छे हो, पर क्या आप दौड़ने में भी अच्छे हो क्या? ऐसा भी हो सकता है कि आपको बहुत भागना पड़े। उपदेश देना तो आपकी एक सिद्ध उपाधि है, पर हो सकता है कि सहजता आपसे कहे कि दौड़ बेटा दौड़।
प्र: आप एक बोतल को फैंकने के लिए बोतल के पास गए, पर जब आप बोतल के पास पहुँचे तो उस लम्हे ने आपसे कहा कि बैठो और बोतल से पियो।
आचार्य: हाँ, यह भी हो सकता है। आप जो बोल रहे हैं वो मैं समझ रहा हूँ। आप कह रहे हैं कि ख़ुद तो खड़े हो गढ्ढे में और दूसरों को उपदेश दे रहे हो कि चाँद की यात्रा करो। आप उस चीज़ की बात कर रहे हो कि बिना ख़ुद को देखे दूसरों की ओर क्यों देख रहे हो? अब मैं आपसे कह रहा हूँ कि आवाज़ें हमेशा कुँए से ही नहीं आती हैं, आवाज़ें कभी-कभी और नीचे से भी आती हैं; उस वक़्त उनको बाधित मत करिए। और कुआँ हमेशा थोड़ा-बहुत गंदा रहेगा। इस नाते आपको यह हक़ नहीं बनता कहने का कि अभी तो मैं ही गंदा हूँ तो मैं दूसरों की कैसे सफाई कराऊँ?
यह अहंकार का बड़ा साधन बन सकता है कि ईसा-मसीह ने कहा था कि, ‘तुम दूसरों की आँख में तिनका तक देखते हो पर अपनी आँखों में पूरी लकड़ी भी नहीं दिखती’, कि पहले देखो तुम कैसे हो, फ़िर दूसरों की बात करना। ‘मैं कैसा हूँ’, मैं यही देख रहा हूँ और मैं इसीलिए आपसे बात कर रहा हूँ। क्योंकि हम रिश्तों में जीते हैं। तो जब मैं आपसे बात कर रहा हूँ तो मैं कुछ निजी कार्य कर रहा हूँ। उसमें आप आकस्मिक हो, जो भी कुछ हो रहा है वो मेरे जीवनकाल में हो रहा है। यह एक आकस्मिक बात है कि जिस वक़्त मैं कुछ कह रहा हूँ, आप वहाँ मौजूद हो, पर वो हो मेरे ही जीवनकाल में रहा है। मैं आपको उपदेश दे रहा हूँ तो मैं अपने जीवनकाल में कुछ कार्य कर रहा हूँ। तो जीवन क्या है? रिश्ते ही तो हैं। तो जो है, मेरे बारे में ही है। मैं अपने लिए काम कर रहा हूँ। आप अपने लिए कैसे काम करोगे? अकेले कमरे में बैठकर करोगे क्या? जब आप कहते हो कि, ‘मैं अपनी बुरी आदतों से छुटकारा पाना चाहता हूँ’, तो आप कैसे छुटकारा पाओगे?


