प्रश्न: आचार्य जी, मुझे अपनी आगे की पढ़ाई के लिए कुछ ऐसे विषयों का चुनाव करना पड़ रहा है जिनमें मेरी बहुत ज़्यादा रुचि नहीं है। ऐसा लगता है उनमें नकली रुचि जगानी पड़ेगी। लेकिन ऐसा भी लग रहा है कि वो विषय आगे कैरियर में बहुत लाभ देंगे, और वो मानवता से जुड़े कार्यक्षेत्रों में भी काम आएँगे।
मैं उन विषयों में अपनी रुचि कैसे जगाऊँ? या उन विषयों को छोड़कर कुछ ऐसे विषय चुनूँ, जिनमें मेरी रुचि है?
आचार्य प्रशांत: अगर कह रहे हो कि कोई ऐसा क्षेत्र है जो तुम्हें भी लाभ देगा, और मानवता के लिए भी अच्छा है, तो उसमें तुम्हें नकली रुचि क्यों बनानी पड़ेगी? वास्तविक रुचि क्यों नहीं?
प्रश्नकर्ता: क्योंकि उन विषयों की पढ़ाई मुझे बहुत जल्दी समझ नहीं आती है। जैसे कंप्यूटर और गणित हैं, इन विषयों में मुझे हमेशा से दिक़्क़त महसूस होती है।
आचार्य प्रशांत: तो अब समझो।
इंटरेस्ट या रुचि छोटी चीज़ होती है, सत्यता बड़ी चीज़ होती है। अहंकार कहता है, “रुचि को प्रधानता दो।” अध्यात्म कहता है, “धर्म प्रधान है।” अध्यात्म का अर्थ ही है – रुचि की परवाह ही न करना, और उस तरफ़ चलना जिस तरफ़ धर्म है, जिधर सत्य है।


