वक्ता: मन का ये बड़ा ही शातिर खेल होता है कि जिस भी चीज़ से उसे डर लगता है, वो उसे इमप्रैक्टिकल लेबल कर देता है और फिर कहता है कि, ‘’ये कार्य किया नहीं जा सकता क्योंकि ये इमप्रैक्टिकल है’’ कार्य इमप्रैक्टिकल है या तुमने उसे ऐसा लेबल दे दिया? कि आया था पहले?
श्रोतागण: लेबल।
वक्ता: पहले आप किसी चीज़ कोइमप्रैक्टिकल कहो और फिर कह दो कि ये किया नहीं जा सकता।
श्रोता१: वो बुरे आदमी है।
वक्ता: तुम उसके पास क्यूँ नहीं जाते? ‘’क्यूँकी वो बुरा आदमी है,’’ अब ये तुमने उसे लेबल दिया है या वो सच में बुरा है।
श्रोतागण: लेबल।
श्रोता२: सर, हम अपने आदतों को छोड़ना नहीं चाहते क्यूँकी हमें डर लगता है और फिर हम कहते हैं कि डर हटाओ। ये समझ नहीं आता।


